जेएनयू में नारेबाजी का मामला, BJP ने छात्रों की हरकत को निंदनीय बताया

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नई दिल्ली। दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में दिल्ली दंगा मामले के आरोपियों उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में हुए प्रदर्शन का एक वीडियो मंगलवार को सामने आया, जिसमें कुछ छात्र विवादित नारे लगाते दिखाई दे रहे हैं। करीब 35 सेकंड के इस वीडियो में छात्र “मोदी-शाह की कब्र खुदेगी, जेएनयू की धरती पर” जैसे नारे गाते हुए नजर आ रहे हैं, जिसके बाद यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। बताया जा रहा है कि यह प्रदर्शन दिल्ली दंगा केस में उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज किए जाने के विरोध में किया गया था। वीडियो के सामने आने के बाद विश्वविद्यालय परिसर और राजनीतिक हलकों में इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने पर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) के कैंपस में हुई नारेबाजी पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने नारे लगाने वालों को अलगाववादी बताते हुए कहा कि ये लोग सिर्फ देश को बांटने की बातें करते हैं, जो शर्मनाक है। मनजिंदर सिंह सिरसा ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा, “अगर हर मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन होगा, तो फिर क्या बचेगा? इन लोगों को देश, संविधान या कानून से कोई मतलब नहीं है। ये लोग अलगाववादी हैं और सिर्फ ऐसी बातें करते हैं जो देश को बांटती हैं। इन्होंने देश के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का अपमान किया है।”
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने वीडियो को पोट करते हुए लिखा कि देशद्रोही उमर खालिद और शरजील इमाम के समर्थन में अर्बन नक्सलियों ने JNU में साबरमती हॉस्टल के बाहर देर रात विरोध प्रदर्शन किया. यह विरोध प्रदर्शन नहीं है, यह भारत विरोधी सोच को बढ़ावा देना है. बौद्धिक आतंकवादी एकेडमिक्स, डॉक्टर या इंजीनियर हो सकते हैं.
वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली सरकार में मंत्री कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सांपों के फ़न कुचले जा रहें हैं. सपोलें बिलबिला रहें हैं. JNU में नक्सलियों, आतंकियों, दंगाइयों के समर्थन में भद्दे नारें लगाने वाले हताश हैं क्योंकि नक्सली खत्म किए जा रहें हैं, आतंकी निपटाए जा रहें हैं और दंगाइयों को कोर्ट पहचान चुका है.
इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए JNU स्टूडेंट्स यूनियन की अध्यक्ष अदिति मिश्रा ने स्पष्ट किया कि हर वर्ष 5 जनवरी 2020 को कैंपस में हुई हिंसा की निंदा के लिए छात्र विरोध प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने समाचार एजेंसी PTI से कहा कि प्रदर्शन के दौरान लगाए गए नारे वैचारिक थे और किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाने के उद्देश्य से नहीं थे। मिश्रा के अनुसार, नारे किसी के खिलाफ व्यक्तिगत हमले के रूप में नहीं थे और उन्हें गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है।

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