जोधपुर: जोधपुर में भव्य स्वामिनारायण अक्षरधाम मंदिर का लोकार्पण समारोह सम्पन्न, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक गौरव का बना केंद्र

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जोधपुर। सूर्य नगरी जोधपुर में स्वामिनारायण संप्रदाय के सबसे भव्य अक्षरधाम मंदिर का विधिवत प्राण प्रतिष्ठा और लोकार्पण समारोह अत्यंत श्रद्धा और भक्ति के वातावरण में सम्पन्न हुआ। इस ऐतिहासिक अवसर पर देश-विदेश से भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और मंत्रोच्चारण, कीर्तन व भजनों के बीच पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। समारोह की अध्यक्षता प्रकट ब्रह्म स्वरूप महंत स्वामी महाराज ने की, जिनके सान्निध्य में मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा और लोकार्पण सम्पन्न हुआ। उन्होंने मंदिर निर्माण में जुटे जोधपुर के कारीगरों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया और इसे सनातन संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का प्रतीक बताया।जोधपुर की प्रसिद्ध छीतर पत्थर से निर्मित यह भव्य मंदिर स्थापत्य और शिल्प कला का अद्वितीय उदाहरण है। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामिनारायण संप्रदाय के कीर्तन से हुई, जिसमें प्रमुख संत श्वेत प्रकाश स्वामी, ज्ञानानंद स्वामी, योगीप्रेम स्वामी और अक्षरप्रेम स्वामी सहित कई संतों ने प्रवचन और भक्ति गीतों के माध्यम से श्रद्धालुओं को प्रेरित किया।जस्टिस विनीत माथुर ने इस अवसर पर कहा कि यह मंदिर न केवल श्रद्धा का केंद्र बनेगा, बल्कि जोधपुरवासियों की आस्था और संस्कृति को भी नई ऊंचाई प्रदान करेगा। उन्होंने कहा कि मंदिर का उद्देश्य पूर्ण हुआ है और यह जोधपुरवासियों के लिए गर्व की बात है।केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, “इस मंदिर की स्थापना धर्म और संस्कृति की जड़ों को और मजबूत करेगी। यह न केवल एक आध्यात्मिक केंद्र है, बल्कि संस्कृति की चेतना को भी उजागर करने वाला स्थल बनेगा।”रेल मंत्री अश्विनी कुमार वैष्णव ने भारत के गौरवशाली अतीत और आर्थिक, सांस्कृतिक पुनरुत्थान की बात करते हुए कहा कि “हम जिस मानसिक गुलामी से अब उबर रहे हैं, यह मंदिर उस चेतना का प्रतीक है जो हमें फिर से आत्मविश्वासी भारत की ओर ले जा रही है। ”मंदिर परिसर में विशाल पंडाल में श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी, जहां स्वयंसेवकों ने सेवा भाव से सभी व्यवस्थाओं को संभाला। इस अवसर पर भव्य सत्संग, प्रवचन, भजन संध्या और विशेष आरती के आयोजन भी किए गए।लोकार्पण समारोह के साथ जोधपुर की सांस्कृतिक धरोहर में एक और गौरवपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। यह नया स्वामिनारायण अक्षरधाम मंदिर आने वाले समय में न सिर्फ आध्यात्मिक चेतना का केंद्र बनेगा, बल्कि मारवाड़ और समग्र राजस्थान में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का आधार भी बनेगा।

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