राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ का असर जारी, 25 से ज्यादा जिलों में बारिश-ओलावृष्टि का अलर्ट

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जयपुर। राजस्थान में पश्चिमी विक्षोभ (वेस्टर्न डिस्टर्बेंस) का असर लगातार बना हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र जयपुर ने चार अप्रैल को भी प्रदेश के 25 से अधिक जिलों में तेज आंधी-बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि का अलर्ट जारी किया है। इससे पहले शुक्रवार को भी 10 से ज्यादा जिलों में तेज बरसात हुई। बीकानेर, श्रीगंगानगर और जैसलमेर में ओले गिरने से जनजीवन प्रभावित हुआ, वहीं राजधानी जयपुर में आए तेज अंधड़ ने हादसों को जन्म दिया, जिसमें दो लोगों की मौत हो गई।

जयपुर में शुक्रवार शाम शुरू हुआ आंधी-बारिश का दौर देर रात तक जारी रहा। तेज हवाओं के कारण शहर के कई इलाकों में नुकसान हुआ।

जवाहर नगर इलाके में बिजली का पोल गिरने से बाइक सवार रामजीलाल महावर (50) की मौत हो गई। वहीं, जवाहर सर्किल क्षेत्र में ग्रेनाइट पत्थर गिरने से एक बुजुर्ग की जान चली गई।

लगातार हो रही बारिश और ओलावृष्टि के कारण प्रदेश के अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान में सात डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ गई है।

कई इलाकों में दिन के समय हल्की ठंडक महसूस की गई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली।

मौसम के इस अचानक बदलाव का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ा है। राज्य के कई जिलों में गेहूं, सरसों और चने की खड़ी फसलें बारिश और ओलों से खराब हो गई हैं। मंडियों में खुले में रखी फसल भी भीगने से नुकसान बढ़ गया है।

पिछले 24 घंटे में हनुमानगढ़, चूरू, सीकर, झुंझुनूं, नागौर, अजमेर, टोंक सहित कई जिलों में बारिश हुई। अजमेर में 17.6 मिमी, हनुमानगढ़ में 11.5 मिमी और झुंझुनूं में 12.2 मिमी वर्षा मापी गई।

मौसम विभाग के अनुसार मौजूदा सिस्टम के प्रभाव से चार अप्रैल को उदयपुर, कोटा, भरतपुर संभाग सहित कई क्षेत्रों में तेज आंधी-बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। हालांकि 5-6 अप्रैल को कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन 7 अप्रैल से एक नया मजबूत सिस्टम सक्रिय होने के संकेत हैं, जिससे फिर मौसम बिगड़ सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च के बाद आमतौर पर पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ते हैं, लेकिन इस बार लगातार सिस्टम सक्रिय रहने से मौसम का पैटर्न असामान्य हो गया है। इसका सीधा असर कृषि और जनजीवन दोनों पर पड़ रहा है।

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