सामाजिक ताने बाने को नष्ट भ्रष्ट कर रही वेब सीरीज

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बालमुकुंद ओझा
आजकल वेब सीरीज की चर्चा ज्यादा हो रही है। क्या आप जानते है वेब सीरीज क्या होती है और इसका मतलब क्या होता है। वेब सीरीज दरअसल इंटरनेट पर जारी धारावाहिक या वीडियो एपिसोड की एक श्रृंखला होती है और इसे वेब शो के नाम से भी जाना जाता है। वेब सीरीज को भी टीवी सीरियल की तरह डिजाइन किया जाता है। वेब सीरीज का प्रसारण सिर्फ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ही किया जाता है। इसका प्रसारण सिर्फ इंटरनेट पर होने के कारण ही इसे वेब सीरीज कहा जाता है। वेब सीरीज में अश्लीलता दिखाई जा रही है जो कि समाज के लिए हानिकारक है। वेब सीरीज में गालियां एवं अश्लीलता को खुल कर दिखाया जाता है जिससे कि वेब सीरीज का गरम मसाला बरकरार रहता है एवं इसकी ओर ज्यादा से ज्यादा लोग आकर्षित होते रहते हैं। युवाओं पर भी इनका गहरा असर पड़ता है। वेब सीरीज में दिखाए जाने वाले नशे, रंगीन लाइफस्टाइल में जीना युवाओं की पसंद बन जाती है। मनोरंजन के साधन का यह बदलता स्वरूप अपने आप में एक बड़ा विषय है जिसकी हमें समीक्षा करने की जरूरत हैं। वेब सीरीज के प्रति युवा पीढ़ी का आकर्षण बढ़ा है। इसमें सामाजिक व नैतिक मूल्यों को दरकिनार करके कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाने की शिकायतें उठ रही हैं। वेब सीरीज से सामाजिक तानाबाना प्रभावित हो रहा है। परिवार में रिश्ते भी प्रभावित हो रहे हैं। भारतीय सभ्यता और संस्कृति दुनिया में सबसे उम्दा है। इसके संरक्षण की आवश्यकता है। इसी कड़ी में वेबसीरीज पर रोकथाम जरूरी है। इंटरनेट पर अनेक वेब सीरीज उपलब्ध हैं। इसमें अपराधों के साथ ही अश्लीलता भरे कार्यक्रम प्रस्तुत किए जा रहे हैं। यह भारतीय सभ्यता और संस्कृति के लिए खतरा है। अधिकांश वेब सीरीज समाज में गंदगी फैला रहे हैं। देश की संस्कृति को गलत दिशा में मोड़ने का कुचक्र किया जा रहा है।
इन दिनों देश में वेब सीरीज की चर्चा ज्यादा हो रही है। हमारे देश में वेबसीरीज का प्रभाव इतना बढ़ गया है कि अमेरिका की दो सबसे बड़ी कंपनिया नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम ने भारतीय भाषा में कंटेंट बनाना शुरू कर दिया है। भारत में अमेज़न प्राइम, नेटफ्लिक्स, जी 5, हॉटस्टार प्रीमियम, अल्ट बालाजी जैसे कुछ सबसे प्रसिद्ध एप्लीकेशन है जिनकी मदद से हम वेबसीरिज का आनंद उठा सकते है। वेब सीरीज के संवादों में गाली-गलौज से लेकर लिंगसूचक, जातिगत और व्यक्तिगत टिप्पणी का बोलबाला अधिक हो रहा है जो हमारे सामाजिक ताने बाने को क्षतिग्रस्त कर रहे है। हमारा युवा नशाखोरी के मकड़जाल में फंसता जा रहा है। इन दिनों OTT प्लेटफॉर्म का खूब बोलबाला है। डिजिटल प्लेटफॉर्म पर वेब सीरीज में सरे आम नशे और अश्लीलता को परोसा जा रहा है। गन्दी बात के साथ ड्रग्स, सिगरेट और शराब का सरेआम सेवन हो रहा है। युवा वर्ग आजकल फिल्मों के स्थान पर वेब सीरीज में अधिक डूबा हुआ है। वेब सीरीज का मतलब है इंटरनेट पर उपलब्ध वीडियों की श्रंखला है इसकी सर्वप्रथम शुरूआत 1990 के दशक में हुई थी मगर 2000 आते-आते वेब सीरीज का चलन एकदम से बढ़ने लगा। अब तो वेब सीरीज ने सारे रेकार्ड तोड़ते हुए शराब और सिगरेट के नशे का प्रचार शुरू कर दिया है जिसमें हमारा युवा वर्ग डुबकी लगाने लगा है।
नशे के रूप में लोग शराब, गाँजा, जर्दा ,ब्राउन.शुगर, कोकीन ,स्मैक आदि मादक पदार्थों का प्रयोग करते हैं ,जो स्वास्थ्य के साथ सामाजिक और आर्थिक दोनों लिहाज से ठीक नहीं हैं। नशे का आदी व्यक्ति समाज की दृष्टी से हेय हो जाता हैं, और उसकी सामाजिक क्रियाशीलता जीरो हो जाती हैं ,फिर भी वह व्यसन को नहीं छोड़ता हैं। धूम्रपान से फेफड़े में कैंसर होता हैं, वहीँ कोकीन ,चरस ,अफीम लोगों में उत्तेजना बढ़ाने का काम करती हैं, जिससे समाज में अपराध और गैरकानूनी हरकतों को बढ़ावा मिलता हैं। इन नशीली वस्तुओं के उपयोग से व्यक्ति पागल और सुप्तावस्था में चला जाता हैं। तम्बाकू के सेवन से तपेदिक ,निमोनिया ,साँस की बीमारियों का सामना करना पड़ता हैं। इसके सेवन से जन और धन दोनों की हानि होती हैं।
आजादी के बाद देश में शराब की खपत 60 से 80 गुना अधिक बढ़ी है। यह भी सच है कि शराब की बिक्री से सरकार को एक बड़े राजस्व की प्राप्ति होती है। मगर इस प्रकार की आय से हमारा सामाजिक ढांचा क्षत-विक्षत हो रहा है और परिवार के परिवार खत्म होते जा रहे हैं। हम विनाश की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। देश में शराब बंदी के लिए कई बार आंदोलन हुआ, मगर सामाजिक, राजनीतिक चेतना के अभाव में इसे सफलता नहीं मिली। सरकार को राजस्व प्राप्ति का यह मोह त्यागना होगा तभी समाज और देश मजबूत होगा और हम इस आसुरी प्रवृत्ति के सेवन से दूर होंगे।
बालमुकुंद ओझा

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