घातक और जानलेवा बीमारियों का रक्षा कवच है टीकाकरण

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देश में 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस आमजन में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इस वर्ष की थीम सभी के लिए टीकाकरण मानवीय रूप से संभव है रखी गई है। इस थीम का मुख्य संदेश है कि यदि सामूहिक प्रयास और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था हो, तो हर व्यक्ति तक टीकाकरण की सुविधा पहुँचाना संभव है। इसका लक्ष्य समाज के हर वर्ग {चाहे वह आर्थिक, सामाजिक या भौगोलिक रूप से कहीं भी हो} तक टीकों की समान पहुंच सुनिश्चित करना है, ताकि सार्वजनिक स्वास्थ्य को बेहतर तरीके से सुरक्षित रखा जा सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट के अनुसार, टीके हर साल लगभग 2 से 3 मिलियन लोगों को बचाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक टीकाकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से किसी व्यक्ति की प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर और स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाने वाले विकार या वायरस के खिलाफ मजबूत हो जाती है। टीका शरीर में मौजूद रक्त में घुलने के बाद स्वास्थ्य प्रतिरक्षा प्रणाली को एंटीबॉडी बनाते हुए बाहरी आक्रमण यानी वायरस के हमलों से सुरक्षित बनाने में सहायता करता है। टीके न सिर्फ एक बच्चे की, बल्कि पूरे समुदाय की रक्षा करते हैं। जब अधिकांश बच्चों का टीकाकरण हो जाता है, तो सामूहिक प्रतिरक्षा क्षमता (हर्ड इम्यूनिटी) स्थापित हो जाती है, जिसका अर्थ है कि संक्रमण आसानी से नहीं फैल सकता – यहाँ तक कि उन लोगों की भी रक्षा होती है जिनका चिकित्सकीय कारणों से टीकाकरण नहीं हो सकता।
टीकाकरण की खोज ,मानव सभ्यता से प्रमुख अविष्कारों में से एक है। जब किसी बीमारी का टीका लगया जाता है,तो शरीर में उस बीमारी से लड़ने की क्षमता आ जाती है और शरीर बीमारी से बच जाता है। टीकाकरण गंभीर बीमारियों के खिलाफ सबसे प्रभावी निवारक उपाय है, जिनमें कुछ टीके आजीवन प्रतिरक्षा प्रदान करते हैं। टीकाकरण का तत्काल लाभ है व्यक्ति की प्रतिरक्षा। यह किसी रोग के खिलाफ जीवन भर सुरक्षा प्रदान करता है। तक बीमारियों ने भारत को अपने आगोश में ले रखा है। ये खतरनाक बीमारिया विशेषकर गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं के लिए घातक होती है। इन बीमारियों से बचाव के टीके लगाए जाते हैं। यह टीके रक्षा कवच का काम करते हैं। सरकार के लाख प्रयासों के बाद भी हमारे देश में घातक बीमारियों से होने वाले नुकसान के बावजूद लोग सावधानी नहीं बरतते हैं। टीकों के प्रति जागरूकता लाने के लिए प्रति वर्ष 16 मार्च को राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के बाशिंदों को टीकाकरण के प्रति जागरूक करना है। हर माँ और बाप की यही चाहत रहती हैं की उसका बच्चा कभी बीमार ना हो और ऐसा तभी संभव हैं जब आपके बच्चे में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक होगी। टीकाकरण प्रत्येक बच्चों का अधिकार है। इससे शिशु मृत्यु दर में कमी आती है। पोलियो और चेचक जैसी बीमारियाँ बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियानों के जरिए लगभग समाप्त कर दी गई हैं, जो साबित करता है कि टीके कितने शक्तिशाली हो सकते हैं। 2014 से पहले, भारत में टीकाकरण की कम कवरेज, टीबी की उच्च दर, महिलाओं और बच्चों में व्यापक मीजल्स, रूबेला व मलेरिया (Measles, Rubella & Malaria) जैसे रोगों के बार-बार प्रकोप जैसी चुनौतियाँ थीं। आज 2025 आते आते यह तस्वीर बदल चुकी है, भारत दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी और सफल स्वास्थ्य मिशन में से एक है।

-बाल मुकुन्द ओझा

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