जयपुर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान में शिक्षा के परिदृश्य में बड़ा बदलाव आ रहा है। प्रदेश में ड्राॅप आउट रेट में उल्लेखनीय कमी एवं संक्रमण दर में सुधार राज्य सरकार के प्रयासों के परिणाम को दर्शाते हैं, तो वहीं वर्ष 2026-27 के बजट के प्रावधान गुणवत्तापूर्ण, रोजगारपरक एवं नवाचार आधारित शिक्षा के सशक्त एवं संतुलित विजन को रेखांकित करते हैं। आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार माध्यमिक से उच्च माध्यमिक में संक्रमण दर वर्ष 2023-24 की तुलना में वर्ष 2024-25 में 82.6 से बढ़कर 88.2 एवं प्राथमिक से उच्च प्राथमिक में 90.7 से बढ़कर 93.8 हुई। वहीं, ड्राॅप आउट रेट प्राथमिक स्तर के लिए 7.6 से घटकर 3.6, उच्च प्राथमिक स्तर के लिए 6.8 से घटकर 3.6 एवं माध्यमिक स्तर के लिए 11.1 से घटकर 7.7 रह गई। प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण स्थापित किए जाने की कड़ी में बजट वर्ष 2026-27 में प्रारम्भिक शिक्षा के लिए 21 हजार 646 करोड़ रुपये से अधिक तथा माध्यमिक शिक्षा के लिए 19 हजार 473 करोड़ रुपये से अधिक के प्रावधान किए गए है। इसके अन्तर्गत समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रारम्भिक शिक्षा में 13 हजार 767 करोड़ रुपये से अधिक तथा माध्यमिक शिक्षा में 2 हजार 821 करोड़ रुपये से अधिक का व्यय प्रस्तावित है। इसके अलावा आरटीई के अंतर्गत निजी विद्यालयों को शिक्षण शुल्क पुनर्भरण के लिए 1 हजार 250 करोड़ रुपये तथा पीएमश्री योजना के लिए 434 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है।
निःशुल्क यूनिफॉर्म के लिए डीबीटी, 250 करोड़ रुपये का प्रावधान
विद्यार्थियों के लिए टेबलेट/लैपटॉप, साइकिल और यूनिफॉर्म वितरण जैसी योजनाओं को समयबद्ध एवं अधिक पारदर्शी बनाने के लिए बजट में डीबीटी एवं ई-वाउचर की घोषणा की गई है। इसके तहत कक्षा 8, 10 और 12 के चयनित मेधावी विद्यार्थियों को टेबलेट या लैपटॉप खरीदने के लिए ई-वाउचर के माध्यम से 20 हजार रुपये तक की सहायता एवं आगामी वर्ष 9वीं कक्षा में प्रवेश लेने वाली जरूरतमंद छात्राओं को साइकिल हेतु ई-वाउचर प्रदान किए जाएंगे। साथ ही, निःशुल्क साइकिल वितरण योजना के अन्तर्गत लगभग 3.90 लाख बालिकाओं को लाभान्वित किए जाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अतिरिक्त, बजट में कक्षा 1 से 8 तक के 40 लाख से अधिक जरूरतमंद विद्यार्थियों को निःशुल्क यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए डीबीटी करने की घोषणा करते हुए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
शैक्षिक सत्र 2025-26 में 80 लाख विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तकें वितरित
विद्यार्थियों में सीखने की निरंतरता बनाए रखने के लिए निःशुल्क पाठ्यपुस्तक वितरण योजना के तहत शैक्षिक सत्र 2025-26 में लगभग 80 लाख विद्यार्थियों को 4 करोड़ से अधिक पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया गया है। वहीं, बजट वर्ष 2026-27 में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए 150 करोड़ रुपये एवं माध्यमिक शिक्षा के लिए 90 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
400 विद्यालयों का सीएम राइज विद्यालयों में होगा क्रमोन्नयन, एक हजार करोड़ रुपये का प्रावधान
रोजगारपरक शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में आगामी सत्र में 500 अतिरिक्त विद्यालयों में व्यावसायिक पाठ्यक्रम के लिए बजट 2026-27 में 51 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। इसी तरह, प्रत्येक जिले में व्यावसायिक शिक्षा के लिए ‘स्कूल टू वर्क‘ कार्यक्रम, घुमंतू और अर्ध-घुमंतू समुदायों के बच्चों के लिए ‘स्कूल ऑन व्हील्स‘, जयपुर और जोधपुर में विज्ञान एवं तकनीकी विषयों के प्रति रुचि बढ़ाने के लिए स्पेस गैलरी तथा एक हजार विद्यालयों में एआई आधारित पर्सनलाइज्ड लर्निंग लैब्स की स्थापना की भी इस बजट में पहल की गई है। इसके अलावा, डिजिटल शिक्षा संसाधनों के विस्तार के लिए 400 विद्यालयों को चरणबद्ध रूप से ‘सीएम राइज’ विद्यालयों में क्रमोन्नत किए जाने की घोषणा के साथ ही, इसके लिए एक हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।


