विकसित भारत में पुस्तकालय की भूमिका पर दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस

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जयपुर। राजस्थान टेक्नीकल लाइब्रेरी एसोसिएशन की ओर से आईएचएचएमआर यूनिवर्सिटी में 11वां अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “नॉलेज कॉमन्स : लाइब्रेरीज एज केटालिस्ट फॉर विकसित भारत—2047” का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ है। दो दिवसीय इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश से आए पुस्तकालयाध्यक्षों, शिक्षाविद्, शोधार्थियों एवं विशेषज्ञों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। आयोजन सचिव डॉ. श्रद्धा कल्ला ने बताया कि उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में इंडियन लाइब्रेरी एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. प्रदीप राय ने पुस्तकालय के इतिहास से लेकर वर्तमान स्वरूप एवं आधुनिक तकनीकों पर प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता पूर्व अध्यक्ष, इंडियन लाइब्रेरी एसोसिएशन डॉ. डीवी सिंह ने कहा कि सामान्य अध्ययन के साथ—साथ शोध एवं अनुसंधान से संबंधित कार्यों में पुस्तकालय का विशेष महत्व है। उन्होंने विकसित भारत के परिप्रेक्ष्य में पुस्कालय की महत्ता पर जानकारी दी। प्रो. पीआर सोढ़ानी ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि डिजिटल युग में पुस्तकालयों को नवाचार, तकनीकी समावेशन और उपयोगकर्ता-केंद्रित सेवाओं के माध्यम से स्वयं को ज्ञान कॉमन्स के रूप में स्थापित करना होगा। विशिष्ट अतिथि प्रो. राजकुमार भाकर (संरक्षक, आरटीएलए एवं डॉ. धर्म कुमार ने भी पुस्तकालयों की प्रासंगिकता के संबंध में विचार रखे। सम्मेलन के दौरान संपादित शोध-संग्रह का विमोचन किया गया।

तकनीकी सत्रों में शोधपरक विमर्श
पहले दिन दो तकनीकी सत्र आयोजित किए गए। ट्रैक–I में मॉडर्न सस्टेनेबल लाइब्रेरीज अलाइन्ड विद विकसित भारत—2047 विषय पर विशेषज्ञ व्याख्यान प्रस्तुत किए गए। विभिन्न शोधपत्रों में स्कूल पुस्तकालयों में नवाचार, विरासत संरक्षण, डिजिटल नॉलेज कॉमन्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सेवाओं तथा समावेशी पुस्तकालय सेवाओं पर विचार-विमर्श हुआ। द्वितीय सत्र में एआई टूल्स, पुस्तकालय नीति एवं शासन, डिजिटल परिवर्तन, ओपन एक्सेस संसाधनों तथा क्लाउड आधारित सेवाओं पर 10 शोधपत्र प्रस्तुत किए गए। दूसरे दिन ऑनलाइन एवं ऑफलाइन सत्रों में अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने भाग लिया। वक्ताओं ने हाइब्रिड लाइब्रेरी मॉडल, सार्वजनिक स्वास्थ्य साक्षरता, अनुसंधान समर्थन सेवाओं एवं समुदाय-आधारित ज्ञान साझेदारी पर अपने विचार साझा किए। द्वितीय तकनीकी सत्र में 12 शोधपत्र प्रस्तुत हुए, जिनमें एआई, आईसीटी, वर्चुअल असिस्टेंट, महिला पुस्तकालय पेशेवरों की भूमिका, ओपन एक्सेस इकोसिस्टम तथा डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर जैसे समसामयिक विषयों पर गहन चर्चा हुई। समापन सत्र के मुख्य अतिथि प्रो. आरएल रैना ने कहा कि विकसित भारत 2047 की परिकल्पना को साकार करने में पुस्तकालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने पुस्तकालयों को नवाचार, समावेशन और ज्ञान-साझेदारी के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का सशक्त माध्यम बताया।

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