स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है परिवहन प्रदूषण

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दुनिया भर के बहुत से देशों में सड़कों पर वाहनों की निरंतर बढ़ती संख्या परिवहन प्रदूषण का एक प्रमुख स्रोत है। हमारा देश भारत भी इस समय परिवहन प्रदूषण की विभीषिका से जूझ रहा है। सड़कों का आधारभूत ढांचा हमारी अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ आधार है। सड़कें हमारे परिवहन का मुख्य साधन हैं। जहाँ हर रोज हमारे लाखों व्यवसायिक और निजी वाहन सरपट सड़कों पर दौड़ते हैं। सड़क परिवहन ने सामाजिक एवं आर्थिक विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है। सड़क परिवहन के विस्तार को जहां परिवहन के विकास से जोड़कर देखा जाता है, वहीं पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभाव भी किसी से छिपे नहीं हैं। परिवहन के साधनों के तीव्र विकास के साथ प्रदूषण जैसे दुष्परणाम को भी हम भुगत रहे है। हमें परिवहन से हो रहे प्रदूषण को रोकने पर ध्यान देना होगा। देश में कुल वायु प्रदूषण का लगभग 40 प्रतिशत सड़क यातायात के कारण होता है और इसलिए देश में सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने परिवहन प्रदूषण की समस्या पर पर देशवासियों को विश्वास दिलाया है की पारिस्थितिकी और पर्यावरण केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार कई विकल्पों पर विचार कर रही है और उसी लिहाज से विभिन्न परियोजनाओं पर युद्धस्तर पर काम कर रही है। उन्होंने कहा देश में वाहन प्रदुषण को रोकने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना बहुत जरूरी है। सरकार सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न उपाय लागू कर रही है।
भारत 135 करोड़ लोगों का देश है और मोटर वाहनों या ऑटोमोबाइल का सबसे बड़ा उपभोक्ता है। ये वाहन या तो पेट्रोल या डीजल से संचालित होते हैं, पर्यावरण और हमारे पारिस्थितिकी तंत्र को बेहद प्रभावित करते हैं। आमतौर पर कार से निकलने वाले प्रदूषक तत्व वातावरण में ग्रीनहाउस उत्सर्जन के सबसे बड़े योगदानकर्ताओं में से एक हैं।आज पूरी दुनिया ग्लोबल वार्मिंग के डर से गुजर रही है और इसका सबसे बड़ा कारण वाहन प्रदूषण का बढ़ता स्तर है जिस पर हम सभी को शीघ्र ध्यान देने की आवश्यकता है। सड़क पर वाहनों की बढ़ती संख्या के साथ वाहन प्रदूषण के प्रभाव दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। वाहन प्रदूषण के प्रभाव पृथ्वी पर रहने वाले प्राणियों को बुरी तरह से प्रभावित कर रहे हैं और स्वास्थ्य संबंधी बहुत सारी समस्याएं पैदा कर रहे हैं।
मोटर गाड़ियों से निकले धुएँ के कारण बच्चों में सांस से सम्बन्धित रोग तथा नजले की शिकायत बढ़ रही है। वाहनों से निकलने वाले धुएँ में कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन, अलडीहाइड, लेड ऑक्साइड प्रमुख हैं जो कि वायुमंडल को प्रदूषित करती हैं। आजादी से पूर्व भारत में परिवहन के सीमित साधन थे। आजादी के बाद इस दिशा में तीव्र गति से काम हुआ। परम्परागत साधनों के अलावा सड़क, रेल, वायु और जल परिवहन यातायात के मुख्य साधन है। यहाँ हम सड़क परिवहन की बात करना चाहते है जो सबसे प्रचलित और लोकप्रिय साधन माना जाता है। परिवहन अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। परिवहन के कारण ही कच्चा माल कारखानों तक पहुँच पाता है और उत्पाद ग्राहकों तक पहुँच पाते हैं। परिवहन से हमारा आशय यात्रियों एवं वस्तुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर लाने ले जाने से है। परिवहन के साधन किसी देश के उद्योग व कृषि के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। किसी भी देश में परिवहन तंत्र की सघनता और आधुनिकता वहाँ के आर्थिक विकास का संकेत है। भारत एक विशाल देश है, जिसमें प्राकृतिक, आर्थिक, सामाजिक व अन्य विविधताएँ पाई जाती है। इन विविधताओं को एकता के सूत्र में बांधने में परिवहन साधनों का विशेष योगदान है। परिवहन के माध्यम से ही कृषि तथा औद्योगिक उत्पादन उपभोक्ताओं तक पहुँचते हैं। सड़कों को चार वगों में विभाजित किया गया। ये राष्ट्रीय राजमार्ग, प्रांतीय राजमार्ग, जिला सड़कें और ग्रामीण सड़कें है। भारत में सड़क घनत्व इस समय लगभग 1.43 किलोमीटर प्रति वर्ग किलोमीटर है, जो कई देशों से बेहतर है। सड़कों के नेटवर्क के विकास की जिम्मेदारी केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और स्थानीय प्रशासन की होती है। राष्ट्रीय राजमार्गों की कुल लंबाई एक लाख चार हजार किलोमीटर है, जो सड़कों के कुल नेटवर्क के दो प्रतिशत से कम है। लेकिन इन मार्गों से कुल सड़क परिवहन का 40 प्रतिशत से अधिक परिवहन होता है। इस स्थिति में सरकार के साथ साथ हम सब का दायित्व है अपने वाहनों की प्रदूषण जाँच समय पर करवाएं और परिवहन प्रदूषण के बढ़ते खतरे से बचे।

-बालमुकुंद ओझा

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