हिट हो गई मोदी और शाह की जोड़ी

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बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को मिली प्रचंड जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की जोड़ी को दिया जा रहा है। यह कहने में किसी को कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि मोदी और अमित शाह ने मिलकर जीत की पटकथा तैयार की। बिहार चुनाव जीतकर मोदी और शाह की जोड़ी ने भारतीय राजनीति को दिशा और दृष्टि दी। बिहार चुनाव में हिट हो गई मोदी नीतीश की जोड़ी। यह जोड़ी भाजपा की रणनीति से लेकर सफलता का आधार रही है। मोदी के निर्देशन में अमित शाह ने बिहार जीतने के लिए माइक्रो-प्लानिंग पर बहुत ध्यान दिया। उन्होंने बूथ और ब्लॉक स्तर के कार्यकर्ताओं के साथ सीधी बैठकें कीं। उनकी पारखी नज़रों ने बिहार को पहचानने में देर नहीं की। उन्होंने स्पष्ट किया कि किस बूथ पर किस दल का प्रभाव है और कार्यकर्ताओं को किस तरह गठबंधन साथी के उम्मीदवार के लिए काम करना है। इस जमीनी रणनीति ने गठबंधन के वोटों को एक साथ लाने में निर्णायक भूमिका निभाई और सीटें बढ़ाने में मदद की। शाह की रणनीति के आगे विपक्ष चारो खाने चित हो गया। अमित शाह भाजपा के चाणक्य है। उनके नेतृत्व में भाजपा जीत के रिकॉर्ड कायम कर रही है। बिहार के बाद अब मोदी और शाह की जोड़ी की अग्नि परीक्षा अगले साल बंगाल विधान सभा के चुनाव में होंगी। मोदी ने घोषणा कर दी है कि बिहार के जनादेश ने अब बंगाल में भाजपा की जीत का रास्ता खोला है और पार्टी वहां भी जंगल राज खत्म करेगी। यदि इस परीक्षा में यह जोड़ी सफल हो जाती है तो 2027 में यूपी चुनाव में जीतना आसान हो जायेगा।
जनसंघ और भाजपा में अटल आडवाणी की जोड़ी कई दशकों तक छाई रही। पार्टी के सभी फैसले यह जोड़ी ही लेती थी। पार्टी के पोस्टर, बैनर और लगभग सभी स्थानों पर इन दोनों के चित्र ही लगे रहते थे। अटलजी के बीमार होने और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अटल आडवाणी जोड़ी का स्थान नरेंद्र मोदी अमित शाह की जोड़ी ने ले लिया। अमित शाह आज देश के गृह मंत्री है। शाह फर्श से अर्श तक पहुँचने वाले एक साधारण कार्यकर्त्ता से शक्तिशाली पद पर प्रतिष्ठित हुए है। एक राज्य स्तर के नेता का धूमकेतु की तरह इतनी जल्दी राष्ट्रीय स्तर पर छा जाना कोई कम महत्त्व नहीं है। शाह की सांगठनिक क्षमता और भाषण शैली भी गजब की है। उन्होंने अपने तार्किक और प्रभावशाली भाषण से श्रोताओं के साथ दूसरे नेताओं को भी प्रभावित किया है। उनकी इस क्षमता से प्रभावित होकर ही आर एस एस ने पहले भाजपा मुखिया फिर गृह मंत्री बनाने की मोदी की गुहार को अपनी स्वीकृति दी थी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के जानकर लोगों का कहना है कि वाजपेयी और आडवाणी की ही तरह उन्होंने नरेंद्र मोदी को राजनीति के राष्ट्रीय फलक पर लाने में भरपूर मदद की। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, मोदी और शाह एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। वो दशकों से एक साथ रहे हैं। वो एक जैसा सोचते हैं और एक विश्वस्त टीम की तरह काम करते हैं। अमित शाह और नरेंद्र मोदी के जीवन में कई समानता है। दोनों ने आरएसएस की शाखाओं में जाना बचपन से शुरू कर दिया था और दोनों ने अपनी जवानी में अपने जोश और कुशलता से वरिष्ठ नेताओं को प्रभावित किया था। दोनों की संवाद शैली काफी प्रभावोत्पादक है।
2001 में मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बनाये जाते हैं। तब नरेंद्र मोदी ने अमित शाह को अपने मंत्री मंडल में शामिल किया और उन्हें 17 पोर्टफोलियो दिये गये। यहीं से दोनों की दोस्ती गाढ़ी होती गई। 2003 में नरेंद्र मोदी फिर गुजरात के मुख्यमंत्री बने तो नरेंद्र मोदी ने अमित शाह को प्रदेश के गृहमंत्री सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी। 2014 में बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को अपना प्रधानमंत्री का उम्मीदवार बनाया तो अमित शाह ने इस चुनाव में रणनीतिकार की महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। चुनाव बीजेपी के पक्ष में रहा नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बन गये। मोदी ने भी इस विश्वास को आगे बढ़ाते हुए अमित शाह को बीजेपी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया। 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने केंद्रीय मंत्री मंडल में अमित शाह को जगह देते हुए देश का गृह मंत्री बनाकर सबसे महत्वपूर्ण पद दिया। यहीं से दोनों की मित्रता के विकास की यात्रा बढ़ती गई जो आज भी कायम है। कुछ लोगों का कहना है मोदी के बाद शाह देश की कमान संभालेंगे। इसके लिए मोदी अपनी सोची समझी रणनीति पर काम कर रहे है।

– बाल मुकुन्द ओझा

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