संकटनाशन गणपति की आराधना को समर्पित विकट संकष्टी का पर्व, नोट कर लें शुभ-अशुभ समय

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नई दिल्ली। हिंदू पंचांग के अनुसार वैशाख माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को विकट संकष्टी का पर्व मनाया जाता है। इस साल यह पावन पर्व 5 अप्रैल, रविवार को पड़ रहा है। भगवान गणेश के अष्टविनायक रूपों में से एक विकट रूप की इस दिन विशेष आराधना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि विकट गणेश अपने भक्तों की सभी प्रकार के ज्ञात-अज्ञात भय, रोग, शोक और दुर्घटनाओं से रक्षा करते हैं। यह व्रत न सिर्फ व्यक्ति को निर्भीक बनाता है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में संघर्ष करने का साहस भी प्रदान करता है। घोर संकटों में भी भक्तों की रक्षा करने वाले विकट गणेश अपराजेयता का वरदान देते हैं। 5 अप्रैल को चतुर्थी तिथि दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से शुरू होकर अगले दिन तक रहेगी। व्रत रखने वाले भक्त पूरे दिन उपवास रखेंगे। शाम को चंद्रमा के उदय के बाद पूजा और चंद्र दर्शन कर व्रत का पारण का विधान है।
5 अप्रैल को सूर्योदय 6 बजकर 7 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 41 मिनट पर होगा। वहीं, चंद्रोदय रात 9 बजकर 58 मिनट पर होगा। शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 35 मिनट से 5 बजकर 21 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 11 बजकर 59 मिनट से 12 बजकर 49 मिनट तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 30 मिनट से 3 बजकर 20 मिनट
तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 3 मिनट तक रहेगा। वहीं, अमृत काल दोपहर 2 बजकर 24 मिनट से 4 बजकर 10 मिनट तक रहेगा।
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल शाम 5 बजकर 7 मिनट से 6 बजकर 41 मिनट तक, यमगण्ड दोपहर 12 बजकर 24 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक रहेगा और गुलिक काल दोपहर 3 बजकर 33 मिनट से 5 बजकर 7 मिनट तक, दुर्मुहूर्त शाम 5 बजकर 1 मिनट से 5 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। वहीं, भद्रा सुबह 6 बजकर 7 मिनट से दोपहर 11 बजकर 59 मिनट तक रहेगा।

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