हिंदी को लेकर स्टालिन की टिप्पणी समाज को बांटने का ओछा प्रयास: वैष्णव

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सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बृहस्पतिवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन की ‘‘हिंदी थोपने’’ संबंधी टिप्पणी को उनकी सरकार के खराब शासन को छिपाने के लिए समाज को बांटने का ‘‘ओछा प्रयास’’ बताया और सवाल किया कि क्या कांग्रेस नेता राहुल गांधी भी द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (द्रमुक) नेता के विचारों से सहमत हैं।स्टालिन द्वारा द्रमुक कार्यकर्ताओं को लिखे गए पत्र पर प्रतिक्रिया में वैष्णव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘समाज को विभाजित करने के ऐसे ओछे प्रयासों से खराब शासन कभी नहीं छिप पाएगा।’’ पत्र में स्टालिन ने दावा किया कि बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में बोली जाने वाली मैथिली, ब्रजभाषा, बुंदेली और अवधी जैसी कई उत्तर भारतीय भाषाएं ‘‘हिंदी के वर्चस्व के कारण नष्ट हो गई हैं।’’वैष्णव ने सवाल किया कि क्या स्टालिन से लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी सहमत हैं। वैष्णव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘यह जानना दिलचस्प होगा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी जी का इस विषय पर क्या कहना है। क्या वह हिंदी भाषी क्षेत्र की सीट के सांसद के रूप में इससे सहमत हैं।

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