संबित ने कांग्रेस पर लगाया, नक्सलवाद को पालने पोसने का आरोप

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं सांसद डॉ. संबित पात्रा ने सोमवार को कांग्रेस पार्टी पर नक्सलवाद को बढ़ावा देने का आरोप लगाया और कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के शासनकाल में अगर कांग्रेस नेता महेन्द्र कर्मा द्वारा शुरू किये गये सलवा जुडूम जैसे आंदोलन को रोका ना गया होता तो भारत 2020 के पहले ही नक्सल मुक्त हो जाता।

लोकसभा में नक्सलवाद-मुक्त भारत विषय पर नियम 193 के तहत हुई अल्पकालिक चर्चा में भाग लेते हुए डॉ पात्रा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नक्सलवाद को देश की सबसे घातक समस्या बताया था, लेकिन कांग्रेस के दूसरे धड़े ने इसे रोमांचकारी गतिविधि के रूप में दिखाने का काम किया। इसी का परिणाम था कि कांग्रेस के एक आदिवासी नेता ने नक्सलियों के खिलाफ 2005 में सलवा जुडूम आंदोलन शुरू किया जिसे भाजपा की रमन सिंह सरकार ने आगे बढ़ाया लेकिन दूसरे धड़े ने संप्रग सरकार की मूक सहमति से उच्चतम न्यायालय के माध्यम से इसे खत्म करवा दिया। उन्होंने लेखिका अरुंधती रॉय का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने नक्सलियों को गांधीवादी बंदूकधारी बताया था।

भाजपा सांसद ने दंडकारण्य, पार्श्वनाथ और बूढ़ा पर्वत जैसे क्षेत्रों को ‘स्वतंत्र क्षेत्र’ बताते हुए कहा कि वहां भारतीय संविधान और सुरक्षा बलों का दबदबा नहीं था। उन्होंने 6 अप्रैल 2010 को छत्तीसगढ़ में हुए नक्सली हमले का उल्लेख किया जिसमें केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 76 जवान शहीद हुए थे।

पात्रा ने उच्चतम न्यायालय में 2013 में दाखिल तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे के हस्ताक्षर वाले जवाबी हलफनामे का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इसमें कहा गया था कि माओवादी शहरी नक्सलियों, अनुषांगिक संगठनों और मानवाधिकारों की पैरवी करने वाले स्वयंसेवी संगठनों के जरिए युवाओं को प्रभावित कर रहे हैं। हलफनामे में यह भी दर्ज था कि माओवादी सुरक्षा और विकास के अभाव वाले क्षेत्रों में प्रवेश कर राजनीतिक निर्वात पैदा करते हैं।

उन्होंने ओडिशा के मलकानगिरी के कलेक्टर आर विनील कृष्णन के 2011 में हुए अपहरण का जिक्र किया। पात्रा ने कहा कि उस समय आठ माओवादियों को छोड़ा गया था, जिनमें ए पद्मा भी शामिल थीं। बाद में ए पद्मा हर्ष मंदार के संगठन ‘अमन वेदिका’ से जुड़ीं। उन्होंने डॉ. विनायक सेन का जिक्र करते कहा कि राजद्रोह के मामले में दोषी ठहराए जाने के बावजूद नक्सली विनायक सेन को 12वीं पंचवर्षीय योजना की स्वास्थ्य समिति में शामिल किया गया। एक बहुत बड़े पत्रकार ने उस समय लिखा था कि कांग्रेस अंदर उस समय यह भावना थी कि सैनिकों तुम संघर्ष करो, हम पता नहीं किसके साथ हैं।

पात्रा ने छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उन्होंने 2005 में सलवा जुडूम आंदोलन शुरू किया था। रमन सिंह सरकार ने पुनर्वास केंद्र बनाकर आदिवासियों को नक्सलियों से लड़ने के लिए तैयार किया। लेकिन नंदिनी सुंदर की याचिका पर उच्चतम न्यायालय ने 2011 में इसे समाप्त कर दिया। पात्रा ने दावा किया कि अगर सलवा जुडूम नहीं रोका जाता तो भारत 2020 तक नक्सल मुक्त हो जाता। उन्होंने 2013 के दरभा घाटी हमले का भी जिक्र किया जिसमें कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोग मारे गए थे।

उन्होंने 2018 के भीमा कोरेगांव-एल्गार परिषद मामले का जिक्र करते हुए रोमा विल्सन, वरवरा राव, सुधा भारद्वाज, गौतम नवलखा और महेश राउत की गिरफ्तारी का जिक्र किया। उन्होंने राहुल गांधी के उस समय के ट्वीट का हवाला देते हुए कहा कि कांग्रेस ने शहरी नक्सलियों का समर्थन किया। पात्रा ने कहा कि महेश राउत को 2013 में महाराष्ट्र में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उस समय कांग्रेस सरकार में केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने पत्र लिखकर उन्हें छोड़ने की सिफारिश की थी। बाद में उन्हें पीएमआरडी फेलोशिप भी दी गई।

पात्रा ने कहा कि 76 सीआरपीएफ जवानों के शहीद होने पर दिल्ली के एक विश्वविद्यालय में जश्न मनाया गया। यह नया भारत है जहां कांग्रेस ने आत्मसमर्पण किया है और भाजपा धुरंधर की भूमिका निभा रही है।

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