राजस्व विभाग की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित: डिजिटलीकरण से सरल एवं पारदर्शी हुई राजस्व प्रक्रियाएँ किसानों और आमजन को मिल रहा लाभ – राजस्व मंत्री श्री हेमन्त मीणा

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जयपुर। राजस्व मंत्री श्री हेमन्त मीणा ने कहा कि राजस्व विभाग आमजन एवं किसानों से जुड़ा हुआ विभाग है। समय के साथ विभाग भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण, ऑनलाइन नामांतरण एवं तकनीकी उपयोग से सीमांकन के साथ धुनिकीकरण की ओर बढ़ रहा है। इससे विभाग के प्रशासनिक ढांचे में पारदर्शिता आई है। इससे किसानों के हितों का संरक्षण, भू-अधिकारों की सुरक्षा एवं न्याय पूर्ण राजस्व प्रणाली निर्मित हुई है। श्री हेमन्त मीणा शनिवार को विधान सभा में राजस्व विभाग की (मांग संख्या-16) अनुदान मांग पर हुई बहस का जवाब दे रहे थे। चर्चा के बाद सदन ने राजस्व विभाग की 23 अरब 34 करोड़ 61 लाख 01 हजार रूपए की अनुदान मांगें ध्वनिमत से पारित कर दीं।

नामांतरण की प्रक्रिया आसान होने से किसानों को राहत
राजस्व मंत्री ने बताया कि नामांतरण के मामलों में किसानों को काफी समस्या का सामना करना पड़ता था। प्रदेश सरकार द्वारा भू नामांतरण आवेदन दर्ज एवं स्वीकृत करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से पेपरलेस कर दिया गया है। तहसीलदार के स्तर पर आवेदन स्वीकार करने की प्रक्रिया में फिको सिस्टम (फर्स्ट इन फर्स्ट आउट) लागू किया गया है। इससे भू नामांतरण प्रकिया आसान हुई है और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगने से किसानों को राहत मिली है। उन्होंने बताया कि लघु उद्योग को प्रोत्साहन देने एवं ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ाने के लिए कृषि भूमि के गैर कृषि प्रयोजन के लिए कन्वर्जन हेतु निर्धारित समयावधि को 90 दिन से घटकर 45 दिन किया गया है। साथ ही पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन संपन्न करने का प्रावधान किया गया है। विभाग द्वारा गत दो वर्षों में 43 हजार 350 प्रकरणों में 24 हजार 886 हैक्टेयर भूमि का कन्वर्जन किया गया । श्री मीणा ने बताया कि फर्जी तरीके से सरकारी भूमियों को खुर्द-बुर्द करने के प्रकरणों की रोकथाम हेतु प्रदेश सरकार द्वारा राजकीय भूमियों के संरक्षण के लिए राजकीय भूमि नामान्तरण परामर्श समिति का गठन किया गया है।

वंचित वर्गों के साथ राज्य सरकार
राजस्व मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार वंचित वर्गों के उत्थान हेतु प्रतिबद्ध है। प्रदेश सरकार द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के किसानों की खातेदारी भूमि पर सौर एवं पवन ऊर्जा परियोजना हेतु कन्वर्जन निःशुल्क किए जाने एवं रेकॉर्डेड रास्ते होने की अनिवार्यता समा​प्ति किये जाने के प्रावधान किये गये है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के विभिन्न आदिवासी बाहुल्य जिलों के राजस्थान ग्रामदानी अधिनियम से शासित गांवों के किसानों के नाम राजस्व रेकॉर्ड में अंकित नहीं होते हैं। इससे उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं, बैंक ऋण आदि का लाभ नहीं मिल पाता है। प्रदेश सरकार द्वारा बजट में इस अधिनियम में संशोधन कर इन गांवों के किसानों को खातेदारी अधिकार के लाभ प्रदान करने की घोषणा की गई है। साथ ही तहसीलदार को उक्त प्रयोजन हेतु कन्वर्जन आदेश जारी करने हेतु अधिकृत किया गया है। श्री मीणा बताया कि आवास से वंचित डीएनटी समुदाय के लोगों को भू-खण्ड आवंटित करने हेतु पट्टा वितरण अभियान के दौरान राज्य सरकार की शक्तियां समस्त जिला कलेक्टर को अपने-अपने क्षेत्राधिकार में प्रत्यायोजित की गयी हैं। इसकी अवधि को 19 मई 2026 तक बढा दिया गया है।

खेजड़ी संरक्षण के लिए लाया जाएगा कानून
राजस्व मंत्री ने बताया कि राज्य वृक्ष खेजड़ी के संरक्षण हेतु मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी द्वारा 5 फरवरी 2026 को की गई घोषणा की अनुपालना में जल्द ही कानून लाया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार पर्यावरण संरक्षण एवं आस्था स्थलों के संरक्षण हेतु महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। इसी क्रम में 2842 हेक्टेयर राजकीय सिवायचक भूमि को ‘ओरण’ प्रयोजनार्थ आरक्षित किया गया है।

राजस्व इकाईयों के पुनर्गठन हेतु समिति गठित
श्री हेमंत मीणा ने कहा कि आमजन को सुलभ प्रशासन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राजस्व इकाईयों के पुनर्गठन के लिए डॉ. ललित के. पंवार की अध्यक्षता में राज्य प्रशासनिक इकाई पुनर्गठन सलाहकार समिति का गठन किया गया है। यह समिति नवीन राजस्व ईकाइयों के संबंध में मार्गदर्शी सिद्धान्त तथा कार्यों के अनुपात में पदों की आवश्यकता को देखते हुए प्रशासनिक ईकाइयों एवं राजस्व न्यायालयों की पदीय संरचना के संबंध में अनुशंसा करेगी।

राज्य सरकार के फैसलों से किसानों को राहत
राजस्व मंत्री ने कहा कि किसानों को खेत तक पहुंच मार्ग उपलब्ध कराने हेतु प्रदेश सरकार द्वारा ‘‘रास्ता खोलो अभियान’’ चलाकर कुल 9404 रास्ते खुलवाये गये हैं। साथ ही खातेदार को अपनी जोत तक पहुंचने हेतु चारागाह में से रास्ता दिये जाने के लिए भी प्रावधान किये गये हैं। उन्होंने बताया कि किसानों को भूमि संबंधी विवादों के लिए दूरदराज स्थित न्यायालयों में ना जाना पड़े इसके लिए प्रदेश सरकार द्वारा भू-प्रबंध अधिकारी एवं राजस्व अपील प्राधिकारियों के कैम्प कोर्ट वल्लभनगर, केकड़ी एवं शाहपुरा (भीलवाड़ा) में लगाने का निर्णय लिया गया है। श्री मीणा ने कहा कि प्रदेश सरकार किसानों को दिन में भी बिजली उपलब्ध कराये जाने के लिए गम्भीर है। इस हेतु विद्युत उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की ओर अग्रसर है। प्रदेश सरकार ने दो वर्षों में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं हेतु लगभग 99 हजार हैक्टेयर राजकीय भूमि का आवंटन किया गया है। गत सरकार के संपूर्ण कार्यकाल में नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं हेतु लगभग 22 हजार हैक्टेयर राजकीय भूमि का ही आवंटन किया गया।

भूतपूर्व सैनिकों के साथ राज्य सरकार
राजस्व मंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार भूतपूर्व सैनिको एवं उनके परिवारजनों के अधिकारों के संरक्षण के प्रति प्रतिबद्ध है। इसी भावना के अनुरूप ऐसे 106 प्रकरणों में जहाँ भूतपूर्व सैनिक की मृत्यु आवंटन या भूमि का कब्जा ग्रहण करने से पूर्व हो गई थी, भूमि को संबंधित वारिसों के नाम से बहाल किया गया। यह निर्णय उन परिवारों के प्रति राज्य सरकार की कृतज्ञता का प्रतीक है जिन्होंने राष्ट्र सेवा में अपना सर्वस्व समर्पित किया।

पदकविजेता खिलाड़ियों को अब तक 119 हैक्टेयर भूमि आवंटित
श्री हेमंत मीणा ने कहा कि खेल एवं खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से प्रदेश सरकार के द्वारा अब तक 19 पदक विजेता खिलाड़ियों को 119 हैक्टेयर भूमि आवंटित की जा चुकी है जबकि गत सरकार के पूर्ण कार्यकाल में 10 खिलाडियो को 62 हेक्टेयर भूमि ही आवंटित की गयी थी।

शिविरों से आमजन को राहत
राजस्व मंत्री ने कहा कि गत वर्ष पंडित दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा और ग्रामीण शिविरों के माध्यम से गरीब, मजदूर, महिला, युवा सहित समाज के सभी वर्गों की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया गया। पंडित दीनदयाल उपाध्याय अन्त्योदय संबल पखवाड़ा के दौरान आयोजित शिविरों में 60 हजार 716 सीमांकन, 1 लाख 32 हजार से अधिक नामांतरण, 26 हजार 858 सहमति विभाजन और 31 हजार 848 रास्तों से जुड़े मामलों का समाधान कर वर्षों पुराने विवाद सुलझाए गए। इसी प्रकार गत वर्ष सेवा पर्व पखवाड़ा के अंतर्गत ग्रामीण सेवा शिविरो का आयोजन पंचायत मुख्यालय पर किया गया। इन शिविरों में 15 विभागों विभागों की अनेक सेवाएँ एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गई। इस दौरान 1 लाख 16 हज़ार 883 राजस्व कार्यों का सम्पादन किया गया। इन शिविरों में 10 लाख 91 हज़ार 214 किसानों को किसान गिरदावरी एप के माध्यम से डिजिटल सेवाओं से जोड़ा गया। राजस्व मंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती राज्य सरकार के प्रथम दो वर्षों में कुल 1 लाख 99 हजार 466 राजस्व वादों का ही निस्तारण किया जा सका, जबकि वर्तमान राज्य सरकार के प्रथम दो वर्षों में 4 लाख 70 हजार 378 प्रकरणों का प्रभावी रूप से निस्तारण किया जा चुका है। गत राज्य सरकार के 5 वर्ष के संपूर्ण कार्यकाल के दौरान ही कुल 5 लाख 62 हजार 488 राजस्व वादों का निस्तारण किया गया।

केन्द्र की एग्रीस्टैक परियोजनान्तर्गत फार्मर रजिस्ट्री में राजस्थान प्रथम स्थान पर
राजस्व मंत्री ने कहा कि केन्द्र की एग्रीस्टैक परियोजनान्तर्गत राज्य के किसानों की आधार ई-केवाईसी करते हुए 11 डिजिट की एक यूनिक आईडी बनाई जा रही है। यह योजना किसानों को विभिन्न सरकारी योजनाओं और सेवाओं से जोड़ने के लिए बनाई गई है। इससे किसानों को जरूरत के अनुसार सहायता और लाभ सीधे उपलब्ध हो सकेंगे। इसके तहत 82 लाख किसानों को पंजीकृत किया जा चुका है तथा इसमें राजस्थान देश में प्रथम स्थान पर है। उन्होंने कहा कि राजस्व विभाग द्वारा भारत सरकार की एग्रीस्टैक योजना के अंतर्गत प्रदेश में जियो-लोकेशन एवं फोटो सहित डिजिटल फसल सर्वे लागू किया गया है। यह पहल कृषि क्षेत्र में किसानों की भागीदारी को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। अब किसान स्वयं भी मोबाइल ऐप के माध्यम से अपनी फसल का सर्वे कर सकता है। वर्तमान में रबी सीजन 2025-26 में राज्य ने 2.64 करोड़ खसरों में डिजिटल फसल सर्वे का लक्ष्य निर्धारित किया है, जिसमें से अब तक 1.58 करोड़ खसरों में सर्वे कार्य पूर्ण किया जा चुका है। जिनमें से 3 लाख 17 हजार खसरों का सर्वे स्वयं किसानों द्वारा मोबाइल ऐप के माध्यम से किया गया है।

डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम से बढ़ रही पारदर्शिता
राजस्व मंत्री ने कहा कि भारत सरकार की डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत प्रदेश में 425 में से 422 तहसीलो को ऑनलाईन अधिसूचित किया जाकर राजस्व रेकार्ड को ऑनलाइन किया गया है। इससे आम नागरिक, किसान और खातेदार को अपनी जमाबंदी, खसरा गिरदावरी की प्रतियां QR कोड सहित “अपना खाता” पोर्टल एवं मोबाइल ऐप के माध्यम से निःशुल्क प्राप्त हो रही हैं। अब उन्हें पटवार मंडल या तहसील कार्यालयों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है। इससे समय, श्रम और धन तीनों की बचत हुई है तथा भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में संचालित 7 उपनिवेशन तहसीलों के अभिलेखों के कम्प्यूटरीकरण का कार्य प्रारम्भ करवा दिया गया है। यह प्रणाली भविष्य में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT), कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन, ऋण वितरण की सरलता तथा डिजिटल कृषि सेवाओं के लिए सुदृढ़ आधार सिद्ध होगी।

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