आरबीआई ने पहली और दूसरी तिमाही के लिए जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया

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मुंबई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 2026-27 की पहली एवं दूसरी तिमाही के लिए देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को बढ़ाकर क्रमश: 6.9 और सात फीसदी कर दिया है। आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा क‍ि वित्त वर्ष 2025-26 में वास्तविक जीडीपी के 7.4 फीसदी की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करने की उम्मीद है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में कहीं अधिक है। मल्‍होत्रा ने बताया कि वैश्विक चुनौतियों के बीच निजी उपभोग और स्थिर निवेश ने वृद्धि को सहारा दिया है।

मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए आरबीआई गवर्नर संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार बेहतर राह पर बनी हुई है। उन्‍होंने कहा कि आरबीआई ने मुक्‍त व्यापार समझौतों, जीएसटी युक्तिकरण और मजबूत कृषि उत्पादन के मद्देनजर जीडीपी ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया है। आरबीआई ने दिसंबर में वित्‍त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के लिए वास्तविक जीडीपी वृद्धि 6.7 फीसदी और जुलाई-सितंबर के लिए 6.8 फीसदी रहने का अनुमान लगाया था।

गवर्नर ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी रहने की उम्मीद है। कृषि गतिविधियों को जलाशयों के स्वस्थ स्तर, मजबूत रबी बुवाई और फसलों की स्थिति में सुधार से समर्थन मिलेगा। इसके अलावा कॉरपोरेट क्षेत्र के प्रदर्शन में सुधार और असंगठित क्षेत्र में बनी गति से विनिर्माण गतिविधियों को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि निर्माण क्षेत्र की वृद्धि मजबूत रहने के आसार हैं और घरेलू मांग के मजबूत होने के साथ सेवा क्षेत्र में भी मजबूती बनी रहेगी।

संजय मल्‍होत्रा ने कहा कि पूरे वित्त वर्ष 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान अप्रैल में अगली मौद्रिक नीति में घोषित किए जाएंगे, जिसमें नए जीडीपी एवं उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) श्रृंखला को अद्यतन आधार वर्ष (2024) के साथ शामिल किया जाएगा। गवर्नर ने मांग पक्ष पर कहा कि 2026-27 में निजी उपभोग की गति बनी रहने की उम्मीद है जबकि ग्रामीण मांग स्थिर रहेगी। उन्होंने कहा कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) युक्तिकरण और नरम मौद्रिक नीति के निरंतर समर्थन से शहरी उपभोग में सुधार होगा। मल्होत्रा ने कहा कि उच्च क्षमता उपयोग, तेज होती बैंक ऋण वृद्धि, अनुकूल वित्तीय परिस्थितियां और बुनियादी ढांचे पर सरकार का निरंतर जोर निवेश गतिविधियों को प्रोत्साहन देगा।

गवर्नर ने कहा कि हाल में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) और प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के साथ कई अन्य व्यापार करार मध्यम अवधि में निर्यात को समर्थन देंगे। इसके अलावा, केंद्रीय बजट में घोषित कई उपाय भी वृद्धि के लिए अनुकूल रहने की संभावना है।

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