गाजा में भुखमरी के साये में रमजान : इफ्तार की थाली हुई दोगुनी महंगी, अर्थव्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त

ram

गाजा। दो साल से जारी भीषण युद्ध और इजरायली प्रतिबंधों के बीच गाजा पट्टी में रह रहे फिलिस्तीनी इस साल एक अभूतपूर्व आर्थिक तबाही के बीच रमजान का पवित्र महीना बिता रहे हैं। अल जजीरा के एक ताजा विश्लेषण के अनुसार, गाजा में बुनियादी खाद्य पदार्थों की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम परिवारों के लिए इफ्तार का इंतजाम करना एक बड़ी चुनौती बन गया है। आसमान छूती कीमतें अक्टूबर 2023 में युद्ध शुरू होने के बाद से खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल आया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार: चिकन: 14 शेकेल से बढ़कर 25 शेकेल प्रति किलो (80% वृद्धि) हो गया है। अंडे: 30 अंडों की ट्रे 13 शेकेल से बढ़कर 35 शेकेल (170% वृद्धि) की हो गई है। सब्जियां: टमाटर की कीमतें दोगुनी हो गई हैं, जबकि खीरा 300% तक महंगा हो गया है। इफ्तार का खर्च 90% बढ़ा छह सदस्यों के एक मध्यम वर्गीय परिवार के लिए बुनियादी इफ्तार (चिकन, चावल, सलाद और तेल आदि) का खर्च अब लगभग 150 शेकेल ($48) तक पहुंच गया है, जो युद्ध से पहले केवल 79 शेकेल ($25) था। वहीं, सहरी के साधारण भोजन का खर्च भी 18.6 शेकेल से बढ़कर 31.5 शेकेल हो गया है। क्रय शक्ति और रोजगार का संकट कीमतें बढ़ने के साथ-साथ लोगों की कमाई का जरिया पूरी तरह खत्म हो चुका है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय $1,250 से घटकर महज $161 रह गई है। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि बेरोजगारी की दर 95% को पार कर चुकी है। कारखाने, खेत और मछली पकड़ने वाली नावें नष्ट होने के कारण अब लोग काम नहीं, बल्कि जीवित रहने के लिए भोजन के पैकेट तलाश रहे हैं। आपूर्ति में बाधा और एकाधिकार आर्थिक विशेषज्ञों का आरोप है कि इजरायल की प्रतिबंधात्मक नीतियों के कारण मानवीय सहायता के ट्रक पर्याप्त संख्या में गाजा नहीं पहुंच पा रहे हैं। जहां प्रतिदिन 1,000 ट्रकों की जरूरत है, वहां केवल 200 से 250 ट्रक ही पहुंच पा रहे हैं। इसके अलावा, आयात पर कुछ ही व्यापारियों के एकाधिकार ने भी कीमतों को कृत्रिम रूप से ऊंचा बनाए रखा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *