अतीत, वर्तमान और भविष्य को साथ लेकर चलने का उत्सव बना राजस्थान दिवस, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल से प्रदेश की विरासत, अवसर एवं संभावनाओं का परिचायक बना आयोजन

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जयपुर। भारतीय सांस्कृतिक परंपरा में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को नववर्ष के साथ ही नव चेतना एवं नव आरंभ का प्रतीक माना जाता है। इसी पावन बेला पर रेवती नक्षत्र एवं इंद्रयोग में 30 मार्च, 1949 को देश के पहले गृहमंत्री लौह पुरूष सरदार वल्लभभाई पटेल की दूरदर्शिता से नए राजस्थान की सुदृढ़ नींव रखी गई। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने वर्ष 2025 में इस गौरवशाली परंपरा को पुनर्स्थापित करते हुए 30 मार्च के स्थान पर चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को ही राजस्थान दिवस मनाए जाने की शुरूआत की। राजस्थान ने इस बार नव संवत्सर वि.सं. 2083 की चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (19 मार्च) को प्रदेश की विरासत, अवसर एवं संभावनाओं के परिचायक के रूप में अपना स्थापना दिवस मनाया। राज्य सरकार द्वारा इस विशेष दिवस के उपलक्ष्य में 14 से 19 मार्च तक आयोजित कार्यक्रमों ने एक ओर जहां प्रदेश के गौरवशाली अतीत को प्रभावी ढंग से संरक्षित और पुनर्स्थापित करने का काम किया, वहीं दूसरी ओर जनकल्याणकारी कार्यों से खुशहाल वर्तमान एवं सुनहरे भविष्य के प्रति आश्वस्त भी किया।

अतीत: जड़ों से जुड़ाव, परंपरा एवं संस्कृति की सशक्त अभिव्यक्ति
राजस्थान दिवस 2026 के आयोजनों में प्रदेश की ऐतिहासिक विरासत और सांस्कृतिक पहचान को केंद्र में रखते हुए परंपरा को नए संदर्भों में प्रस्तुत किया गया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 15 मार्च को नई दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस में ‘राजस्थान उत्सव 2026’ का शुभारंभ किया। इस आयोजन ने प्रदेश की लोककला, हस्तशिल्प, लोकसंगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजनों की समृद्ध झलक को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया। वहीं, 19 मार्च को आयोजित राज्य स्तरीय एवं जिला स्तरीय भव्य सांस्कृतिक संध्या इस विरासत का चरम रूप रही, जहां लोक कलाकारों ने राजस्थान की जीवंत परंपराओं को साकार किया। राजस्थान दिवस की पूर्व संध्या पर मुख्यमंत्री शर्मा की उपस्थिति में जयपुर के गोविंददेव जी मंदिर में आयोजित महाआरती और प्रदेशभर के राजकीय मंदिरों में हुए विशेष धार्मिक ने प्रदेशवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम किया। इसी तरह ज्ञान, तकनीक और नवाचार पर आधारित “राजस्थान को जानें” डिजिटल क्विज के माध्यम से युवाओं एवं नागरिकों को प्रदेश के गौरवशाली इतिहास एवं कला-संस्कृति से रूबरू होने का अवसर मिला।

वर्तमान: सामाजिक सरोकार, सुशासन और समावेशी विकास को नई दिशा
राज्य सरकार ने इन कार्यक्रमों में सामाजिक सरोकारों के साथ ही वर्तमान की दृष्टि से जनकल्याण, सुशासन और समावेशी विकास को प्राथमिकता दी। मुख्यमंत्री शर्मा ने 14 मार्च को स्वच्छता संकल्प एवं जागरूकता कार्यक्रम में श्रमदान कर स्वच्छता का संदेश दिया तथा 15 मार्च को राज्य स्तरीय ‘विकसित राजस्थान रन-2026’ में सहभागिता कर युवाओं को स्वस्थ एवं अनुशासित जीवन शैली अपनाने का आह्वान किया। इसी कड़ी में 16 मार्च को डूंगरपुर के बेणेश्वर धाम में मनाए गए राजस्थान जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनजातीय क्षेत्रों को 1 हजार 902 करोड़ रुपये के 326 विकास कार्यों के लोकार्पण एवं शिलान्यास की सौगात दी। वहीं, उन्होंने 19 मार्च को राजस्थान रोडवेज की 207 नवीन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

भविष्य: नव शक्ति, निवेश एवं नवाचार की आधारशिला
भविष्य के कर्णधार युवाओं को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए राज्य सरकार ने 17 मार्च को राजस्थान युवा शक्ति दिवस के रूप में मनाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और खेल से जुड़े 485 करोड़ रुपये के विभिन्न कार्यों का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। उन्होंने 403 स्टार्टअप्स को वायबिलिटी गैप का 1 हजार 145 लाख रुपये का फंड का वितरण किया तथा 9 हजार 432 युवाओं को कौशल उन्नयन प्रमाण पत्र भी सौंपे। राजस्थान को औद्योगिक और तकनीकी हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री ने 18 मार्च को उद्यमी संवाद समारोह में इंडस्ट्रियल पार्क प्रमोशन पॉलिसी, राजस्थान एयरोस्पेस एंड डिफेंस और राजस्थान सेमीकंडक्टर पॉलिसी का अनावरण किया। इस कार्यक्रम के माध्यम से रीको औद्योगिक क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं के विकास से जुड़े 119 करोड़ रुपये लागत के 40 कार्यों का लोकार्पण और 226 करोड़ रुपये के 46 कार्यों का शिलान्यास भी किया गया। साथ ही, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार और विश्वकर्मा युवा उद्यमी प्रोत्साहन योजना सहित विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र तथा जोधपुर-पाली-मारवाड़ और बूढ़ी बावल औद्योगिक क्षेत्रों के आरक्षण पत्र सहित लीज डीड और अलॉटमेंट लेटर भी प्रदान किए गए। शर्मा ने राजस्थान दिवस के अवसर पर 19 मार्च को नई पहल करते हुए ‘मुख्यमंत्री विकसित ग्राम-वार्ड अभियान’ का शुभारंभ किया। इस अभियान का उद्देश्य ग्राम पंचायतों और शहरी वार्डों के विकास के लिए स्थानीय लोगों से सुझाव लेते हुए भविष्य की आवश्यकता के अनुसार मास्टर प्लान तैयार करना है, जो कि विकास की अवधारणा को विकेंद्रीकृत, जन सहभागिता और साक्ष्य-आधारित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन आयोजनों की श्रृंखला में राज्य सरकार ने प्रदेश की समृद्ध विरासत को सहेजते हुए विकास यात्रा को गति दी और युवा शक्ति के माध्यम से भविष्य के सशक्त राजस्थान का स्पष्ट खाका प्रस्तुत किया। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि भविष्य का नया राजस्थान अपनी संस्कृति एवं परंपराओं पर गर्व की अनुभूति करने के साथ ही आधुनिक तकनीक, निवेश, कौशल और नवाचार के माध्यम से आत्मनिर्भर एवं विकसित राज्य बनने की दिशा में अग्रसर है।

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