जयपुर। शिक्षा मंत्री श्री मदन दिलावर ने शुक्रवार को विधानसभा में कहा कि तृतीय श्रेणी शिक्षकों के लिए स्थानांतरण नीति बनाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण के विषय पर गंभीरता से विचार कर रही है। शिक्षामंत्री प्रश्नकाल के दौरान विधायक श्री गोविन्द प्रसाद द्वारा इस संबंध में पूछे गए पूरक प्रश्नों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2018 में जारी आदेश के अनुसार तृतीय श्रेणी शिक्षकों के जिला परिवर्तन की स्थिति में वरिष्ठता विलोपन के सहमति पत्र लेकर स्थानांतरण किए गए थे। इसके अंतर्गत 31 दिसंबर 2012 के बाद नियुक्त वे शिक्षक स्थानांतरण के पात्र माने गए, जो गंभीर बीमारियों जैसे कैंसर, गुर्दा प्रत्यारोपण, हृदय शल्य चिकित्सा आदि से पीड़ित थे अथवा पूर्णतया दृष्टिहीन या दिव्यांग थे। इसी प्रकार 31 दिसंबर 2012 से पूर्व के नियुक्त शिक्षक जो असाध्य बीमारियों, कैंसर, गुर्दा अथवा हृदय रोग से पीड़ित , पूर्णतया दृष्टिहीन या 70 प्रतिशत से अधिक अधिक दिव्यांग शिक्षकों को पात्रता दी गई। उन्होंने बताया कि जिन शिक्षकों की संतान दिव्यांग, मंदबुद्धि या असाध्य बीमारी से पीड़ित है अथवा अध्यापिका के पति इन बीमारियों से ग्रसित हैं या वह विधवा/परित्यक्ता है, उन्हें भी स्थानांतरण के लिए पात्र माना गया। इसके अलावा 31 दिसंबर 2008 से पूर्व नियुक्त वे सभी शिक्षक जो प्रतिबंधित जिलों में पदस्थापित थे, उन्हें भी स्थानांतरण के दायरे में शामिल किया गया था। इससे पहले सदस्य के मूल प्रश्न के लिखित जवाब में शिक्षा मंत्री ने बताया किवर्तमान में प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा स्थानान्तरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया हुआ है। परन्तु विभागीय आवश्यकतानुसार व अति आवश्यक प्रकृति के प्रकरणों में निर्धारित विभागीय प्रक्रिया के अनुसार सक्षम स्तर से अनुमोदन उपरांत स्थानान्तरण किये गए हैं। उन्होंने तृतीय श्रेणी अध्यापकों के स्थानान्तरण आदेश 14 अक्टूबर 2024 का विवरण सदन के पटल पर रखा।
तृतीय श्रेणी शिक्षकों के स्थानांतरण की नीति बनाने की कार्यवाही प्रक्रियाधीन -शिक्षा मंत्री
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