नई दिल्ली। उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में त्रिपुरा के छात्र एंजेल चकमा की हत्या के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक रूप ले लिया है। इस घटना को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला बोला है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने इसे ‘नफरती अपराध’ करार देते हुए सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं।
क्या बोले राहुल गांधी?
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एंजेल चकमा की हत्या की कड़ी निंदा की है। उन्होंने सोमवार को भाजपा पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ताधारी पार्टी ने नफरत को सामान्य बना दिया है, जिसकी वजह से ऐसी घटनाएं हो रही हैं। इसको लेकर राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, “देहरादून में एंजेल चकमा और उनके भाई माइकल के साथ जो हुआ, वह एक भयानक नफरत का अपराध है। नफरत रातों-रात पैदा नहीं होती। वर्षों से इसे रोज बढ़ावा दिया जा रहा है। खासकर हमारे युवाओं को जहरीले कंटेंट और गैर-जिम्मेदार कहानियों के जरिए सत्ताधारी भाजपा के नफरत फैलाने वाले नेताओं ने इसे नॉर्मल बनाया जा रहा है। भारत सम्मान और एकता पर बना है, डर और गाली-गलौज पर नहीं। हम प्यार और विविधता का देश हैं। हमें एक ऐसा मरा हुआ समाज नहीं बनना चाहिए जो अपने साथी भारतीयों को निशाना बनते हुए देखे और चुप रहे। हमें सोचना चाहिए और सामना करना चाहिए कि हम अपने देश को क्या बनने दे रहे हैं। मेरी संवेदनाएं चकमा परिवार और त्रिपुरा और नॉर्थ ईस्ट के लोगों के साथ हैं। हमें आपको अपना साथी भारतीय भाई-बहन कहने पर गर्व है।”
कपिल सिब्बल की अमित शाह से अपील
वहीं, राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरा है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपील की कि वे नफरत भरे अपराधों के खिलाफ अपनी आवाज उठाएं। सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “एंजेल चकमा की हत्या, एक चौंकाने वाला उदाहरण है- नफरत भरे अपराध का, कट्टरता का, सरकार में हमारे नेताओं की चुप्पी का। ये अपनी निष्क्रियता से इसमें शामिल हैं।’ सिब्बल ने अपनी पोस्ट में कहा, ‘प्रिय अमित शाह जी, नफरत भरे अपराधों के खिलाफ आवाज उठाएं।”
क्या है पूरा मामला?
पुलिस के मुताबिक, यह घटना 9 दिसंबर को देहरादून के सेलाकुई बाजार में हुई थी। त्रिपुरा के उनाकोटी जिले के रहने वाले एंजेल चकमा और उनके भाई माइकल का कुछ लोगों से झगड़ा हुआ था। इस दौरान आरोपियों ने उन पर चाकू और पीतल के नकल से हमला किया। इस हमले में 24 वर्षीय एंजेल चकमा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इसके बाद 26 दिसंबर को अस्पताल में इलाज के दौरान एंजेल की मौत हो गई।
पिता ने लगाया आरोप
एंजेल के पिता तरुण चकमा, जो सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में तैनात हैं, ने आरोप लगाया कि हमलावरों ने उनके बेटे को ‘चीनी मोमो’ कहकर नस्लीय गालियां दीं। जब एंजेल ने विरोध करते हुए कहा कि वह भी भारतीय है, तो उस पर हमला कर दिया गया। हालांकि, पुलिस ने नस्लीय हमले के एंगल से इनकार किया है। देहरादून एसएसपी अजय सिंह ने तर्क दिया कि आरोपियों में से एक खुद मणिपुर का रहने वाला है।
5 आरोपी गिरफ्तार, मुख्य आरोपी फरार
पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए दो नाबालिगों समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपी यज्ञराज अवस्थी, जो नेपाल का रहने वाला है, अभी फरार है। उस पर 25,000 रुपये का इनाम रखा गया है। इस घटना पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ऐसी घटनाएं अस्वीकार्य हैं और सरकार दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेगी। वहीं, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने बताया कि उन्होंने उत्तराखंड के अपने समकक्ष धामी से बात की है, जिन्होंने उन्हें दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है



