आज गणतंत्र दिवस है। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस हमारे राष्ट्रीय पर्व हैं। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस पर देखते हैं लोगों का तिरंगे के प्रति विशेष सम्मान झलकता है और होना भी चाहिए क्योंकि यह हमारा राष्ट्रीय गौरव है। राष्ट्र का प्रतीक है। संविधान में तिरंगे को फहराने के, बनाने के, पकड़ने के, सुरक्षित रखने के, क्षतिग्रस्त होने पर निपटारे के विशेष नियम (भारतीय झंडा संहिता) हैं। राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 की धारा 2 में भारतीय राष्ट्रीय प्रतीकों जैसे राष्ट्रीय ध्वज, संविधान, राष्ट्रगान और भारतीय मानचित्र के अपमान को रोकने के मकसद से सजा के प्रावधान किए गए हैं। यदि उन नियमों की पालना नहीं होती है तो दोषी पर सख्त कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है। भारतीय झंडा संहिता के नियमों के मुताबिक अगर कोई व्यक्ति तिरंगे का अपमान करता है तो उसे 3 साल तक कैद की सजा या आर्थिक दंड या फिर दोनों सजा का प्रावधान है।
गत वर्षों से तिरंगा यात्राएं निकाल रही है, हर घर तिरंगा घर-घर तिरंगा लहरा रहे हैं लेकिन देखने में आया है कहीं-कहीं उन नियमों का पालन नहीं होता। हालांकि सरकार ने जुलाई 2020 में ध्वज संहिता में बदलाव कर दिए जिसके आधार पर नागरिक दिन और रात दोनों समय झंडा फहरा सकते हैं। फहराने के नियम तो बदल दिए पर इसके सम्मान और इसकी मर्यादा का ध्यान रखना भी जरूरी है। लगातार फहराए जाने से ध्वज कट फट जाता है, मैला हो जाता है फिर भी लोग नहीं उतारते ऐसा नहीं होना चाहिए। यात्रा करते समय मैंने कई बार कई जगह पर देखा है ध्वज का रंग बिदरंगा हो गया, ध्वज कट फट गया, तारों में उलझा है फिर भी उसी स्थान पर लगा रहता है पर किसी का भी ध्यान नहीं जाता। जब रात और दिन फहराने का नियम कर दिया तो लोग लापरवाह हो गए, उसे सामान्य ध्वज की तरह मानने लगे। हालांकि मीडिया में देखने पर ज्ञात होता है कि कुछ जगह कार्रवाई होती भी है पर कई जगह अनदेखा किया जाता है या कोई देखने वाला भी नहीं होता। सड़क पर छोटी-छोटी झंडिया पड़ी रहती हैं लोग देख कर भी अनदेखा करके निकल जाते हैं। जब न संभले तो मत ले जाओ, तिरंगे का अपमान मत करो। यह देश का वह प्रतीक है जिसके लिए अनेक शहीदों ने कुर्बानी दी है। बच्चे भूल करते हैं तो उन्हें बताओ, समझाओ। जब बड़े ही समझदारी नहीं दिखाएंगे तो फिर किसको कहेंगे? राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान देश के हर नागरिक की जिम्मेदारी होती है। देशवासियों को राष्ट्रीय ध्वज से संबंधित नियम कानून को समझना चाहिए।
संविधान में तिरंगे के संबंध में बहुत स्पष्टता पूर्वक नियम बने हुए हैं पर मैं विशेष रूप से यहां उन नियमों का उल्लेख कर रहा हूॅं जो आमजन के लिए हैं। अधिक जानकारी के लिए तिरंगे से संबंधित संवैधानिक नियम (भारतीय झंडा संहिता 2002) व राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम 1971 उपलब्ध हैं उन्हें पढ़ने समझने का प्रयास करना चाहिए।
तिरंगा फहराते समय तिरंगे का सम्मान सर्वोपरि है। आम नागरिकों को ध्वज से संबंधित नियमों का ध्यान रखना चाहिए तथा इनका पालन करना चाहिए। पहले तो यह समझना होगा कि ध्वजारोहण और ध्वज फहराने में अंतर होता है। 15 अगस्त, 1947 को जब स्वतंत्रता मिली तो इस खास अवसर पर ब्रिटिश साम्राज्य के झंडे को नीचे उतारकर भारत का राष्ट्रीय ध्वज उपर चढ़ाया गया था। स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्रीय ध्वज को जब नीचे से ऊपर की ओर ले जाया जाता है, तो उसे ध्वजारोहण कहा जाता है। यह परंपरा तब से चलती आ रही है। 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ था यानी संविधान के लागू होने के दिन भारत को एक संप्रभु, लोकतांत्रिक गणराज्य घोषित किया गया था। गणतंत्र दिवस के अवसर पर ध्वज को फहराया जाता है। इसमें हमारा राष्ट्रीय ध्वज पहले से ही खंभे पर बंधा होता है। 15 अगस्त के दिन प्रधानमंत्री जो कि केंद्र सरकार के प्रमुख होते हैं वे लालकिले पर ध्वजारोहण करते हैं और राष्ट्र को संबोधित करते हैं क्योंकि स्वतंत्रता प्राप्ति के दिन भारत का संविधान लागू नहीं हुआ था और राष्ट्रपति जो कि राष्ट्र के संवैधानिक प्रमुख होते हैं, उन्होंने पदभार ग्रहण नहीं किया था। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति राष्ट्र के नाम अपने सन्देश में देशवासियों को संबोधित करते हुए स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि देते हैं और राष्ट्र की उपलब्धियों व भविष्य के लक्ष्यों पर बात करते हैं जबकि 26 जनवरी जो कि देश में संविधान लागू होने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है इस दिन संवैधानिक प्रमुख राष्ट्रपति राजपथ पर झंडा फहराते हैं।
जब भी कभी ध्वजारोहण हो या ध्वज फहराया जाए तो उसकी स्थिति सम्मानपूर्ण और विशिष्ट होनी चाहिए। ध्वज फहराने वाली जगह को उचित स्थान दिया जाना चाहिए और उसको ऐसे स्थान पर फहराया जाना चाहिए जहां से वह सभी को दिखाई दे। हमारे राष्ट्रीय ध्वज में तीन रंगों की पट्टियां होनी चाहिए जिसमें समान चौड़ाई वाली तीन आयताकार पटिया होंगी। सबसे ऊपर केसरिया रंग की पट्टी होगी और सबसे नीचे की पट्टी हरे रंग की होगी। बीच में सफेद रंग की पट्टी होगी जिसके बीच में समान अंतर पर 24 धारियों वाले नेवी ब्लू रंग के अशोक चक्र का डिजाइन होगा। तिरंगे को कभी भी उल्टा नहीं फहराया जाना चाहिए। तिरंगा फहराते समय केसरिया रंग सबसे ऊपर नजर आना चाहिए। राष्ट्रीय ध्वज आयताकार में होना चाहिए। ध्वज की लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 होगा। कभी भी गंदा या फटा हुआ तिरंगा नहीं फैराना चाहिए। ध्वज को किसी के भी समक्ष झुकाया नहीं जाए। साथ ही तिरंगे के आसपास कोई दूसरा ध्वज उससे ऊंचा न हो और न ही उसकी बराबरी पर हो। तिरंगे के पोल पर कोई और चीज ना रखी जाए इसमें फूल मालाएं और प्रतीक चिन्ह शामिल हैं। तिरंगा फहराते समय न वह जमीन पर लगे न पानी में। राष्ट्रीय ध्वज का इस्तेमाल किसी मूर्ति या इमारत को ढकने के लिए, समारोह में किसी टेबल पर बिछाने या मंच को सजाने के लिए नहीं किया जा सकता। ध्वज को किसी भी रूप में लपेटने, किसी व्यक्ति की शव यात्रा में शामिल करने के काम में नहीं लाया जा सकता। किसी सामान को देने, पकड़ने या ले जाने के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। कार या फिर अन्य वाहनों में तिरंगा नहीं लगाया जा सकता। तिरंगे को किसी पहनावे के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। रुमाल, नेपकिन, कुशन, तकिया या किसी भी ऐसी चीज पर तिरंगे का इस्तेमाल नहीं हो सकता। साथ ही तिरंगे पर कुछ लिखा भी नहीं जा सकता। ध्वज किसी भी रूप में विज्ञापन के काम में नहीं लाया जाएगा और न ही उस डंडे पर जिस पर कि ध्वज फहराया जाता है कोई विज्ञापन लगाया जाएगा। झंडे का प्रयोग बंदनवार, फीता या झंडिया बनाने या किसी दूसरे प्रकार की सजावट के लिए नहीं किया जाएगा। ध्वज का प्रयोग इस प्रकार से नहीं किया जाएगा या उसे इस प्रकार नहीं रखा जाएगा कि वह खराब या मैला हो जाए। जब ध्वज क्षतिग्रस्त या खराब हो जाए तो उसे नियमानुसार पूरी तरह से एकांत में और अधिमान्यत: जलाकर या ऐसा कोई ध्वज संहिता द्वारा मान्य तरीका अपनाकर पूर्णतया नष्ट कर दिया जाना चाहिए जिससे उसकी गरिमा बनी रहे।
-अशोक बैद ‘बाडेलावाला’



