राष्ट्रीय टीकाकरण दिवस विशेष: टीकाकरण में राजस्थान की प्रगति बेमिसाल, तीन दशक में 21 से 91 प्रतिशत तक पहुंचा टीकाकरण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुरक्षा को मिली नई मजबूती

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जयपुर। देशभर में आज (16 मार्च) टीकाकरण दिवस मनाया जा रहा है। राजस्थान के लिए यह दिवस इन मायनों में महत्वपूर्ण है कि बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकलते हुए राजस्थान ने टीकाकरण के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हासिल की है। करीब 3 दशक पूर्व प्रदेश में टीकाकरण का प्रतिशत मात्र 21 था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर लगभग 91.8 प्रतिशत हो गया है। यह मात्र उपलब्धि नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता और समाज की जागरूकता का प्रतीक है। राजस्थान में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन से बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विभिन्न जानलेवा बीमारियों से सुरक्षित रखने की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। टीकाकरण कार्यक्रम के तहत जन्म से 16 वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को विभिन्न टीकों के माध्यम से स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान की जा रही है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने बताया कि यह गर्व की बात है कि राजस्थान में वर्ष 1992-93 के एनएफएचएस सर्वे के मुताबिक पूर्ण टीकाकरण का प्रतिशत मात्र 21.1 था, जो एनएफएचएस सर्वे 2020-21 तक बढ़कर 80.4 प्रतिशत हो गया तथा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2024-25 में पूर्ण टीकाकरण का प्रतिशत 91.8 है। ये केवल आंकड़ें नहीं, बल्कि लाखों बच्चों और माताओं को मिला नया जीवन है। टीकाकरण के प्रभावी क्रियान्वयन से ही प्रदेश में विगत वर्षों में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर तेजी से कम होकर राष्ट्रीय औसत से बेहतर स्थिति में है। टीकाकरण का प्रतिशत भी एनएफएचएस सर्वे-5 में 80.4 प्रतिशत था, जो राष्ट्रीय औसत से 4 अंक ज्यादा है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया कि राज्य में टीकाकरण से रोकी जा सकने वाली बीमारियों से बचाव के लिए बच्चों को 10 प्रकार के टीके लगाए जाते हैं, जिनसे लगभग 11 गंभीर बीमारियों से सुरक्षा मिलती है। इनमें बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी, पेंटावेलेंट, पोलियो, रोटा वायरस, पीसीवी, खसरा-रूबेला, आईपीवी, डीपीटी बूस्टर तथा टीडी टीके शामिल हैं। गर्भवती महिलाओं को भी टिटनेस और डिप्थीरिया से बचाव के लिए टीडी का टीका लगाया जाता है।

टीकाकरण कवरेज में लगातार सुधार
राठौड़ ने बताया कि राज्य में टीकाकरण कवरेज के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि पिछले वर्षों में इसमें निरंतर सुधार हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021-22 में पूर्ण टीकाकरण का स्तर 83.3 प्रतिशत था, जो वर्ष 2022-23 में बढ़कर 85.2 प्रतिशत और वर्ष 2023-24 में 88.2 प्रतिशत तक पहुंच गया। वर्ष 2024-25 में यह और बढ़कर 91.8 प्रतिशत हो गया, जो राज्य में टीकाकरण कार्यक्रम की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

विगत 5 वर्ष में 8 प्रतिशत तक की वृद्धि
पिछले पांच वर्षों में राज्य में पूर्ण टीकाकरण कवरेज में लगभग 7 से 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह वृद्धि स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए सुदृढ़ प्रबंधन, नियमित टीकाकरण सत्रों, आंगनबाड़ी केन्द्रों की सक्रिय भूमिका तथा समुदाय की बढ़ती जागरूकता का परिणाम है।

विभिन्न टीकों की उपलब्धि भी बेहतर
आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 (फरवरी 2026 तक) टीडी टीकाकरण की उपलब्धि 89 प्रतिशत, बीसीजी 86 प्रतिशत, ओपीवी-3 लगभग 88.8 प्रतिशत, पेंटावेलेंट-3 लगभग 91.9 प्रतिशत तथा खसरा-रूबेला (एमआर-1) लगभग 90.6 प्रतिशत रही है। इससे स्पष्ट होता है कि राज्य में अधिकांश प्रमुख टीकों का कवरेज 85 से 90 प्रतिशत से अधिक स्तर पर बना हुआ है।

नई वैक्सीन से मजबूत हुआ कार्यक्रम
समय-समय पर नई वैक्सीन को शामिल कर टीकाकरण कार्यक्रम को और प्रभावी बनाया गया है। वर्ष 2014 में पेंटावेलेंट वैक्सीन, वर्ष 2016 में आईपीवी, वर्ष 2017 में रोटा वायरस वैक्सीन तथा वर्ष 2018 से चरणबद्ध तरीके से पीसीवी वैक्सीन को नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किया गया। इन वैक्सीन के माध्यम से बच्चों को निमोनिया, डायरिया तथा अन्य गंभीर संक्रमणों से सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

राजस्थान में वर्ष 2009 के बाद पोलियो का कोई मामला नहीं
राजस्थान में वर्ष 2009 के बाद पोलियो का कोई मामला सामने नहीं आया है और भारत को वर्ष 2014 में पोलियो मुक्त घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पल्स पोलियो अभियान नियमित रूप से आयोजित किए जाते हैं, जिनमें लाखों बच्चों को पोलियो की खुराक दी जा रही है।

एचपीवी टीकाकरण का शुभारम्भ भी राजस्थान से
महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी टीकाकरण अभियान भी शुरू किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 28 फरवरी, 2026 को अजमेर से इस अभियान का राष्ट्रीय स्तर पर शुभारंभ किया गया, जिसके तहत 14 से 15 वर्ष आयु वर्ग की बालिकाओं को एचपीवी वैक्सीन लगाई जा रही है। इससे भविष्य में सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद मिलेगी। स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य के लिए प्रत्येक बच्चे का समय पर टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है। सरकार और समाज के संयुक्त प्रयासों से राजस्थान टीकाकरण के क्षेत्र में नई उपलब्धियाँ हासिल कर रहा है।

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