वर-वधु के माता-पिता की सहमति के बाद ही मान्य हो विवाह

ram

दुनिया में भारत एक ऐसा देश है जहाँ संविधान द्वारा हर वर्ग, हर धर्म, हर जाति और हर समाज के व्यक्ति को स्वतंत्र रूप से जीवन जीने का अधिकार प्राप्त है। भारतीय संविधान में नागरिकों को अनेक मौलिक अधिकार दिए हैं। इन्हीं में से अनुच्छेद 21 के अंतर्गत व्यक्ति को अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने का अधिकार भी प्राप्त है। यदि भारतीय संविधान को दुनिया का सबसे सुंदर और उदार संविधान कहा जाता है, तो इसका मुख्य कारण यह है कि यह देश के प्रत्येक नागरिक को अपनी पसंद से जीवन जीने की स्वतंत्रता देता है।

आज के आधुनिक और तकनीकी युग में हर समाज और हर धर्म के लोगों को अपनी पसंद से जीवन जीने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। हालांकि यह भी उतना ही आवश्यक है कि स्वतंत्रता एक निश्चित सीमा के भीतर ही रहे। जब स्वतंत्रता किसी व्यक्ति, समाज या धर्म की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँचाने लगे, तब उस पर कानून और समाज द्वारा नियंत्रण आवश्यक हो जाता है । वर्तमान समय में भारत में अपनी पसंद से विवाह करने के अधिकार के नाम पर कई बार धोखाधड़ी और अपराध की घटनाएं भी सामने आने लगी हैं। कई मामलों में युवाओं को प्रेम के नाम पर बहला-फुसलाकर या झूठे वादों के माध्यम से विवाह के लिए प्रेरित किया जाता है। ऐसे मामलों के कारण परिवारों में तनाव और सामाजिक चिंताएँ बढ़ रही हैं।

आज देश के अनेक परिवारों में माता-पिता इस बात को लेकर चिंतित रहते हैं कि कहीं उनके बच्चे किसी झूठे प्रेम या लालच का शिकार न हो जाएँ। कई मामलों में ऐसे संबंधों का दुखद अंत भी देखने को मिला है, जिससे समाज में भय और असुरक्षा का माहौल बनता है। इस स्थिति को देखते हुए आवश्यक है कि केंद्र और राज्य सरकारें, समाज और सभी धार्मिक समुदाय विवाह से जुड़े कानूनों और व्यवस्थाओं पर गंभीरता से विचार करें। एक ऐसी व्यवस्था विकसित की जा सकती है जिसमें विवाह से पहले दोनों पक्षों के परिवारों की सहमति और कानूनी प्रक्रिया को अधिक महत्व दिया जाए, ताकि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रह सके।

हाल के वर्षों में कुछ राज्यों ने विवाह कानूनों और पारिवारिक व्यवस्थाओं में सुधार के प्रयास भी किए हैं। उदाहरण के लिए, उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं, जिसमें विवाह पंजीकरण जैसी व्यवस्थाओं को अनिवार्य बनाया गया है। ऐसे कदम समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने में सहायक हो सकते हैं। बेशक उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ऐतिहासिक कार्य किया हे ! गुजरात सरकार भी अपने मैरिज एक्ट में संशोधन करने जा रही हे ! मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी विवाह अधिनियम संशोधन पर विचार किया जा रहा हे ! केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार से निवेदन हे कि देश के सीमा पार बैठे दुश्मनों की साजिश को नाकाम करने हेतु और बहुसंख्यक हिन्दू वर्ग के साथ साथ सभी वर्ग के बच्चों का जीवन सुरक्षित रखने हेतु विवाह अधिनियम में संशोधन आज की आवश्यकता हे !

अतएव सरकार द्वारा सभी धर्म और जातियों में माता पिता की सहमति के उपरांत ही विवाह मान्य करने सम्बन्धी कानून शीघ्र लागू किया जाये ! आज आवश्यकता इस बात की है कि विवाह जैसी महत्वपूर्ण सामाजिक संस्था को मजबूत बनाने के लिए संतुलित और व्यावहारिक कानून बनाए जाएँ। इससे न केवल युवाओं की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि परिवार और समाज की मर्यादा भी बनी रहेगी।

-अरविंद रावल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *