नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय के जस्टिस रविंद्र डूडेजा की बेंच ने उन्नाव रेप मामले में पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि सेंगर को मिली 10 साल की सजा में से साढ़े सात साल हिरासत में बीत चुके हैं। कोर्ट ने कहा कि सेंगर की दोषी करार देने के फैसले के खिलाफ दायर याचिका में देरी की वजह खुद सेंगर ही है, क्योंकि उसने कई दूसरी याचिकाएं दायर कर रखी हैं। तीस हजारी कोर्ट ने 16 दिसंबर, 2019 को रेप पीड़िता के पिता की हिरासत में हत्या के मामले में कुलदीप सिंह सेंगर को 10 साल की कैद की सजा सुनाई थी। तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर पर 10 लाख का जुर्माना भी लगाया था। तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर समेत सभी सातों आरोपितों को भी 10-10 साल की कैद और 10-10लाख के जुर्माने की सजा सुनाई थी। रेप पीड़िता के पिता की न्यायिक हिरासत में 9 अप्रैल, 2018 को मौत हो गई थी। 4 जून, 2017 को रेप पीड़िता ने जब कुलदीप सेंगर पर रेप का आरोप लगाया था। उसके बाद कुलदीप सिंह सेंगर के भाई अतुल सिंह और उसके साथियों ने पीड़िता के पिता को बुरी तरह पीटने के बाद पुलिस को सौंप दिया था। रेप पीड़िता के पिता को जेल में शिफ्ट करने के कुछ ही घंटों बाद जिला अस्पताल में लड़की के पिता की मौत हो गई थी। पीड़िता से 20 दिसंबर 2019 को रेप के मामले में तीस हजारी कोर्ट ने सेंगर को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने उम्रकैद के अलावा 25 लाख का जुर्माना लगाया था। जुर्माने की इस रकम में से 10 लाख रुपये पीड़िता को देने का आदेश दिया था। तीस हजारी कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ भी कुलदीप सिंह सेंगर ने दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की है।

उन्नाव रेप पीड़िता के पिता की कस्टडी में मौत मामले में कुलदीप सेंगर की जमानत याचिका खारिज
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