कोटा। राज्य सरकार की पहल पर आयोजित पंडित दीनदयाल उपाध्याय अंत्योदय संबल पखवाड़ा शिविर ग्रामीण जनजीवन में राहत और पारदर्शिता का नया उदाहरण बन रहे हैं। शुक्रवार को उपखंड कनवास की देवली माझी ग्राम पंचायत में आयोजित शिविर में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां दो भाइयों की पुश्तैनी भूमि का बंटवारा न किसी कोर्ट-कचहरी के चक्कर, न किसी खर्चीली प्रक्रिया के माध्यम से, बल्कि गांव में ही सहजता से कर दिया गया। शिविर में ही हुआ वर्षों पुराने बंटवारे का समाधान देवली माझी निवासी तुलसीराम व मोहनलाल अपनी पुश्तैनी भूमि जो देवली व ढीकोली गांवों में लगभग 9.69 हैक्टेयर है कृ का आपसी सहमति से बंटवारा चाहते थे। आमतौर पर ऐसे मामलों में न्यायालयीन प्रक्रिया लंबी, जटिल और खर्चीली होती है, लेकिन उन्होंने अपनी पीड़ा शिविर में उपखंड अधिकारी श्री रामावतार मीणा के समक्ष रखी। श्री मीणा ने गम्भीरता दिखाते हुए तत्काल तहसीलदार को सहमति बंटवारे का प्रस्ताव तैयार कराने और इंतकाल प्रक्रिया शुरू कराने के निर्देश दिए। बिना खर्च और समय बर्बाद किए मिला न्याय दोनों भाइयों ने इस त्वरित और पारदर्शी समाधान पर संतोष जताते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा कि ष्जो काम वर्षों तक रुका रहा, वह आज बिना किसी खर्च के, गांव में ही हो गया। पहले कभी कल्पना नहीं की थी कि इतना आसान और पारदर्शी समाधान भी संभव है। यह सब मुख्यमंत्री जी की दूरदर्शिता और संवेदनशील प्रशासन की देन है।”
शिविर में अन्य सेवाएं भी प्रदान की गईं। शिविर में केवल बंटवारे ही नहीं, बल्कि कई प्रकार की सुविधाएं ग्रामीणों को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गईं। नामांतरण, सीमाज्ञान, प्रचलित रास्तों के विवाद, और 251 (क) जैसे राजस्व के 3 प्रकरणों का मौके पर ही निस्तारण किया गया। शिविर में कुल 5 सहमति बंटवारे, 5 सीमाज्ञान, 8 नामांतरण और 14 रास्तों के समाधान हुए। इसके अलावा शिविर में आधार सीडिंग, स्वास्थ्य जांच, चिकित्सा किट वितरण, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, उज्ज्वला योजना, पालनहार योजना और श्रमिक कार्ड पंजीयन जैसी जनकल्याणकारी सेवाएं भी तत्परता से की गईं। ग्रामीणों को कई योजनाओं की जानकारी भी मौके पर दी गई और पात्रता अनुसार फार्म भरवाए गए।
शिविर प्रभारी एवं उपखंड अधिकारी श्री रामावतार मीणा ने कहा कि इन शिविरों के माध्यम से सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीणों को न्याय, राहत और योजनाओं का लाभ उनके गांव में ही मिले, वह भी पारदर्शी और त्वरित प्रक्रिया के माध्यम से। यह शिविर शासन और जनता के बीच सेतु बनकर भरोसा और सहूलियत दोनों दे रहे हैं।


