कोटा। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत समन्वित फसलोत्तर प्रबंधन कार्यक्रम को प्रोत्साहित किए जाने से जिले में विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जानी प्रस्तावित हैं। उद्यानिकी उत्पादों की फसल तुड़ाई के उपरांत होने वाली हानि को कम करने, खराब होने से बचाने, संरक्षित रखने, गुणवत्ता बनाए रखने, शेल्फ लाइफ बढ़ाने तथा मूल्य संवर्धन हेतु प्रसंस्करण करने से कृषकों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त होगा और किसानों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही, उपभोक्ताओं को वर्षभर ताज़ा एवं पौष्टिक खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने में कोल्ड चौन की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। कृषि अधिकारी (उद्यान) डॉ. भंवरलाल मीणा ने बताया कि पीएचएमएम कार्यक्रम में किसान, उद्यमी, एफपीओ, एनजीओ, स्वयं सहायता समूह आदि को इंटीग्रेटेड कोल्ड पैक हाउस, प्री-कूलिंग यूनिट, राइपनिंग चौम्बर, कोल्ड रूम, कोल्ड स्टोरेज, रेफ्रिजरेटेड वेन, प्राथमिक एवं न्यून प्रसंस्करण इकाई, सोलर क्रॉप ड्रायर, मूल्य संवर्धन हेतु सेकेंडरी प्रोसेसिंग यूनिट तथा इंटीग्रेटेड कोल्ड चौन सप्लाई सिस्टम जैसी संरचनाओं की स्थापना हेतु परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करने पर एनसीसीडी के दिशा-निर्देशों के अनुसार इकाई लागत का 35 प्रतिशत या अधिकतम 10 लाख से 1.68 करोड़ रुपये तक की अनुदान सहायता देय है। इन परियोजनाओं के लिए चार्टर्ड अकाउंटेंट द्वारा तैयार प्रस्ताव प्रस्तुत करना आवश्यक है, तथा बैंक से ऋण लेना अनिवार्य है। उप निदेशक (उद्यान) नंद बिहारी मालव ने बताया कि किसानों द्वारा स्वयं के खेत पर फार्म गेट पैक हाउस (मूवेबल हैंडलिंग ट्रॉली, सॉर्टिंग टेबल सहित) अथवा फार्म गेट स्टैंडअलोन कोल्ड स्टोरेज (9 गुणा 6 मीटर आकार) के निर्माण पर इकाई लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 12.50 लाख रुपये तक की अनुदान सहायता देय है। उन्होंने बताया कि कोल्ड चैन से संबंधित उद्यानिकी फसलों के फसलोत्तर प्रबंधन गतिविधियों के प्रस्तावों को प्राथमिकता दी जाएगी तथा मल्टी कमोडिटी कोल्ड स्टोरेज की स्थापना को भी अनुदान के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा।
कोटा : फसलोत्तर प्रबंधन परियोजना प्रस्ताव पर मिलेगा अनुदान
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