किसानों की आमदनी के स्थायी आधार के रूप में उभर रहा जयपुर का पंच गौरव आंवला — पंच गौरव के तहत जयपुर में आंवला संवर्धन को लेकर प्रशिक्षण सेमिनार का आयोजन

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जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशानुसार जयपुर जिले में पंच गौरव के संरक्षण, संवर्धन एवं समग्र विकास को गति प्रदान करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा निरंतर विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है। “एक जिला–एक उपज” की अवधारणा के अंतर्गत जयपुर जिले के पंच गौरव में आंवले को शामिल किया गया है, ताकि किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ जिले की विशिष्ट पहचान को भी सुदृढ़ किया जा सके। जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशों की अनुपालना में जयपुर जिले की समस्त पंचायत समितियों में प्रथम चरण में प्रत्येक पंचायत समिति स्तर पर कृषकों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण सेमिनार आयोजित किए जा रहे हैं। इन सेमीनारों के माध्यम से कृषकों को आंवला फल के औषधीय गुणों, इसकी खेती से होने वाली स्थायी आमदनी की संभावनाओं तथा प्रसंस्करण से संबंधित प्रायोगिक जानकारी प्रदान की जा रही है। अतिरिक्त जिला कलक्टर मती विनीता सिंह ने बताया कि इन प्रशिक्षण सेमिनार में महिला स्वयं सहायता समूहों, महिला कृषकों एवं युवा कृषकों की विशेष सहभागिता सुनिश्चित की जा रही है। कृषि विज्ञान केन्द्र, आईएचआईटीसी दुर्गापुरा, जयपुर तथा कृषि विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के माध्यम से प्रतिभागियों को दो दिवसीय आंवला प्रोसेसिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे वे मूल्य संवर्धन की दिशा में आगे बढ़ सकें। मुख्य आयोजना अधिकारी डॉ. सुदीप कुमावत ने बताया कि इसी क्रम में बुधवार को शाहपुरा स्थित कृषि प्रशिक्षण हॉल में पंच गौरव प्रशिक्षण सेमीनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के दौरान कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को आंवला खेती के आधुनिक एवं उन्नत तरीकों, उत्पादन बढ़ाने तथा गुणवत्ता सुधार से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दीं। उन्होंने बताया कि योजना के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों, कृषक महिलाओं एवं युवा कृषकों के क्षमता संवर्धन के लिए कुल 38 लाख रुपये व्यय किए जाएंगे। आंवला को जयपुर की पहचान के रूप में स्थापित करने तथा किसानों की आय का स्थायी साधन विकसित करने के लिए जिला प्रशासन द्वारा निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ. कुमावत ने बताया कि आंवला एक टेबल फल नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उपयोग प्रसंस्कृत उत्पादों के रूप में किया जाता है। घरेलू स्तर पर आंवला प्रोसेसिंग को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर इसकी मांग में वृद्धि की जा सकती है, जिससे न केवल किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

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