जयपुर: टूरिस्ट गाइडों की ओपिनियन : स्मारकों के टिकट हुए दोगुने, तो पर्यटकों से सूने हो जाएंगे आमेर और हवामहल

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जयपुर। राजस्थान में नए साल का आगाज पर्यटकों के लिए किसी ‘वित्तीय झटके’ से कम नहीं होने वाला है। पुरातत्व विभाग द्वारा 1 जनवरी 2026 से स्मारकों और संग्रहालयों की प्रवेश दरों में की गई बेतहाशा वृद्धि ने पर्यटन जगत में उबाल ला दिया है। राजपूताना गाइड एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर इस फैसले को पर्यटन उद्योग के लिए ‘आत्मघाती’ कदम करार दिया है। एसोसिएशन का दावा है कि पर्यटन सीजन के बीचों-बीच दरों को अचानक दोगुना करना तर्कसंगत नहीं है। यदि यह नई दरें लागू होती हैं, तो जयपुर के प्रमुख स्मारकों (आमेर, जंतर-मंतर, हवामहल) को देखने के लिए एक भारतीय परिवार को केवल टिकटों पर ही ₹4000 से ₹5000 खर्च करने होंगे। पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि राजस्थान महंगा होने पर पर्यटक मध्य प्रदेश या गुजरात जैसे राज्यों का रुख कर सकते हैं। टिकट महंगे होने पर पर्यटक स्मारकों के अंदर जाने के बजाय बाहर से फोटो खिंचवाकर निकल जाएंगे, जिससे विभाग का राजस्व बढ़ने के बजाय घट सकता है। महंगी दरों का फायदा उठाकर ‘लपके’ पर्यटकों को गुमराह करेंगे। वे सस्ते निजी म्यूजियम का लालच देकर पर्यटकों को ठगेंगे और सरकारी स्मारकों की छवि खराब करेंगे। जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री से निवेदन किया है कि या तो इन नई दरों पर तत्काल रोक लगाई जाए या फिर वृद्धि को सीमित करते हुए इसे अधिकतम 10 प्रतिशत तक ही रखा जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि होटल, परिवहन और खाने के खर्च के बाद टिकटों का इतना भारी बोझ आम पर्यटक की पहुंच से बाहर हो जाएगा।

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