जयपुर: आरएसएमएम खनिज खनन में नवीनतम तकनीक का उपयोग करते हुए उत्पादन, वार्षिक कारोबार और लाभदायकता बढ़ाएं- मुख्य सचिव

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जयपुर। मुख्य सचिव एवं चेयरमेन आरएसएमएम श्री वी. श्रीनिवास ने राजस्थान स्टेट माइंस एवं मिनरल (आरएसएमएम) से खनिज खनन में नवीनतम तकनीक का उपयोग करते हुए उत्पादन, वार्षिक कारोबार और लाभदायकता बढ़ाने की आवश्यकता प्रतिपादित की है। उन्होंने कहा कि स्टील ग्रेड लाइमस्टोन और रॉक फास्फेट के उत्पादन में आरएसएमएम का समूचे देश में लगभग एकाधिकार है। हमेें इस एकाधिकार का लाभ उत्पादन व और अधिक कारोबार बढ़ाने में करना होगा। उन्होंने जिप्सम और लिग्नाइट का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया। मुख्य सचिव श्री वी श्रीनिवास मंगलवार को सचिवालय के चिंतन कक्ष में आरएसएमएम की 75वीं वार्षिक साधारण सभा और संचालक मण्डल की 421 वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने बताया कि आरएसएमएम द्वारा 35 लाख टन सालाना लाइम स्टोन का उत्पादन किया जा रहा है वहीं वर्ष 2024-25 में रॉक फास्फेट, लाइमस्टोन, जिप्सम और लिग्नाइट का 62 लाख टन उत्पादन किया गया है। इस साल नवंबर माह तक 39 लाख टन खनिजों का उत्पादन किया जा चुका है। श्री वी. श्रीनिवास ने आरएसएमएम के 50 वर्ष पूर्ण होने पर गतिविधियों पर आधारित एक फिल्म बनवाने और काफी टेबल बुक भी तैयार कराने को कहा। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्रों के विकास में भी आरएसएमएम को भागीदारी बढ़ानी होगी। प्रमुख सचिव माइंस श्री टी. रविकान्त ने कहा कि आरएसएमएम को कार्यों में विविधीकरण करते हुए नए क्षेत्रों में भी संभावनाएं तलाशनी होगी। उन्होंने खनन सुरक्षा मानकों की पालना सुनिश्चित करते हुए उत्पादन और आक्रामक मार्केंटिंग पर जोर दिया। श्री रविकान्त ने कहा कि आरएसएमएम के पास खेती में उपयोगी रॉकफास्फेट के विपुल भण्डार होने के साथ ही जैसलमेर में स्टीलग्रेड लाइमस्टोन के प्रचुर भण्डार है। ऐसे में स्टील उद्योग में मांग और आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास किए जाएं। आरएसएमएम की प्रबंध निदेशक प्रज्ञा केवलरमानी आरएसएमएम की गतिविधियों और प्रगति से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि आरएसएमएम के 50 साल पूरे होने पर स्वास्थ्य जांच, रक्तदान शिविर सहित अनेक कल्याणकारी गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है। प्रतिवर्ष जनवरी में खेल प्रतियोगिता आयोजित करने और 26 जनवरी को पुरस्कार वितरण किया जाएगा।
बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव वन एवं पर्यावरण श्री आनंद कुमार, प्रमुख सचिव वित श्री वैभव गालरिया ने भी सुझाव दिए।

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