जयपुर। सीतापुरा स्थित जयपुर एग्जीबिशन एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राजस्थान डिजिफेस्ट–टाई ग्लोबल समिट 2026 के दूसरे दिन सोमवार को मुख्य हॉल में आयोजित फायरसाइड चैट में पूर्व भारतीय क्रिकेटर श्री वीरेंद्र सहवाग का सत्र दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण का केन्द्र रहा। ‘नो फियर, नो लिमिट्स: लेसन्स फ्रॉम द वर्ल्ड्स मोस्ट एग्रेसिव ओपनर’ विषय पर आयोजित इस संवाद सत्र में श्री सहवाग ने खेल, स्टार्ट-अप, निवेश, नेतृत्व, टीमवर्क और जोखिम प्रबंधन जैसे विषयों पर अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि साहस और आक्रामक सोच के बिना न तो खेल में और न ही जीवन में बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। टाई ग्लोबल के कन्वीनर श्री महावीर प्रताप शर्मा से संवाद करते हुए श्री सहवाग ने कहा कि भारत में खेल प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं हैं, आवश्यकता केवल प्रतिभाओं की पहचान, उन्हें तराशने और सही मार्गदर्शन देने की है। उन्होंने कहा कि जोखिम लेना हर क्षेत्र में जरूरी है—चाहे वह क्रिकेट हो, स्टार्ट-अप हो या निवेश। श्री सहवाग ने कहा कि किसी भी टीम या संगठन की सफलता का आधार टीम में विश्वास, पारस्परिक सहयोग और सकारात्मक नेतृत्व होता है। हर कंपनी को अपने कर्मचारियों का ध्यान रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि आलोचना से घबराने के बजाय अपने प्रदर्शन से उसका जवाब देना चाहिए। उन्होंने नेतृत्व और कार्यस्थल संस्कृति पर बोलते हुए कहा, ‘बॉस—बॉस होता है, लेकिन कठिन समय में यदि आप अपने बॉस का साथ देते हैं, तो समय आने पर वह भी आपकी मदद करता है।’ छोटी-छोटी रणनीतियों से बड़ी चुनौतियों को जीता जा सकता है। आईपीएल के प्रभाव का उल्लेख करते हुए श्री सहवाग ने कहा कि इसके बाद विदेशी खिलाड़ियों के नजरिये में बदलाव आया है और अब स्लेजिंग जैसी प्रवृत्तियां कम हुई हैं। उन्होंने कहा कि भारत का समय आ चुका है, हालांकि टेस्ट और वनडे क्रिकेट हमेशा प्रदर्शन का मजबूत आधार बने रहेंगे। भविष्य को लेकर उन्होंने कहा कि टी-20 के बाद टी-10 क्रिकेट का दौर भी देखने को मिल सकता है। स्टार्ट-अप और निवेश पर बोलते हुए श्री सहवाग ने कहा कि जोखिम लिए बिना प्रगति संभव नहीं है, लेकिन जोखिम नपा—तुला और समझदारी से लिया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं को सलाह दी, ‘स्मार्ट बनिए, सही निवेशक चुनिए और सही घोड़े पर दांव लगाइए।’ स्टार्ट-अप संस्कृति युवाओं को जोखिम लेना और नवाचार करना सिखाती है। श्री सहवाग ने कहा कि क्रिकेट के अलावा हॉकी सहित अन्य खेलों में खिलाड़ियों को पर्याप्त आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पाती। हर खेल में निवेशकों का आना जरूरी है, ताकि खिलाड़ियों को वित्तीय स्थिरता और सुरक्षा मिल सके। उन्होंने कहा कि अच्छा प्रदर्शन सराहा जाता है, वहीं खराब प्रदर्शन पर आलोचना स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि हर दिन आपका नहीं होता, इसलिए अपने टीम-साथियों के अच्छे प्रदर्शन की भी कामना करनी चाहिए। यदि देशभर में खेल प्रतिभाओं को खोजकर उन्हें सही संसाधन और मंच उपलब्ध कराए जाएं, तो भारत ओलंपिक में अधिक पदक हासिल कर सकता है।

जयपुर: राजस्थान डिजिफेस्ट टाई ग्लोबल समिट-2026 ‘नो फियर, नो लिमिट्स’— साहस, जोखिम और टीमवर्क से ही मिलती है सफलता —श्री वीरेंद्र सहवाग का फायरसाइड चैट सत्र रहा आकर्षण का केन्द्र
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