जयपुर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने शनिवार को भारतीय शिक्षण मंडल की वार्षिक पत्रिका “रश्मिपथ” के भारतीय ज्ञान परम्परा अंक का विमोचन किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परम्परा ज्ञान एवं विज्ञान, लौकिक एवं पर-लौकिक, कर्म एवं धर्म तथा भोग व त्याग का अद्भुत समन्वय है। उन्होंने शिक्षा से जुड़ी भारतीय ज्ञान परम्परा की चर्चा करते हुए कहा कि हमारी प्राचीन शिक्षा प्रणाली में ’मनुर्भव’ पर जोर दिया गया है। इसका अर्थ है, पहले मनुष्य बनें। मनुष्य बनने का अर्थ है, अपने लिए नहीं दूसरो के लिए भी जीवन जीएं। राज्यपाल ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद में भारतीय ज्ञान परम्परा के बीज निहित है। उन्होंने कहा भारतीय संस्कृति में निष्ठा रहेगी तभी भारत एकात्म रहेगा। उन्होंने कहा कि भारत को अगर विश्व में पहचान मिलेगी तो उसके मूल में भारतीय संस्कार व संस्कृति ही होगी। इससे पहले राज्यपाल ने “रश्मिपथ” पत्रिका का विमोचन करते हुए कहा कि इसमें प्रकाशित लेख सभी वर्ग के लोगों के लिए पठनीय है।

जयपुर: भारतीय शिक्षण मंडल की “रश्मिपथ” पत्रिका का भारतीय ज्ञान परंपरा अंक- भारतीय संस्कार व संस्कृति ही है हमारी ज्ञान परंपरा- राज्यपाल
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