जयपुर: मधुमक्खी पालन से किसानों की आय होगी दोगुनी, राजस्थान बनेगा शहद उत्पादन का हब — कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल

ram

जयपुर। कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने कहा कि प्रदेश के किसानों और पशुपालकों के आर्थिक विकास एवं सशक्तीकरण के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे कृषि एवं सम्बद्ध क्षेत्रों में नवीन तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाएं, जिससे आय में वृद्धि हो और किसान आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। डॉ. किरोड़ी लाल शनिवार को कृषि प्रबंध संस्थान, दुर्गापुर में आयोजित “हाई वैल्यू मधुमक्खी उत्पादन: तकनीकी, वर्तमान परिदृश्य, भविष्य एवं संभावनाएं” विषय पर दो दिवसीय राज्य स्तरीय सेमिनार के समापन समारोह में यह कहा। कृषि मंत्री ने कहा कि प्रदेश का किसान मेहनती और ईमानदार है तथा कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों में नवाचार के जरिए राजस्थान को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से किसान तेजी से प्रगतिशील बन रहे हैं। उन्होंने बताया कि आईसीएआर के अनुसार मधुमक्खी पालन से संबंधित क्षेत्रों में फसलों की पैदावार में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि राजस्थान विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाला प्रदेश है, जहां जंगली और कृषि दोनों प्रकार की वनस्पतियों की व्यापक श्रृंखला उपलब्ध है। यहां मकरंद और पराग की प्रचुरता मधुमक्खी पालन के लिए प्रदेश को अत्यंत अनुकूल बनाती है। मधुमक्खी पालन अब किसानों के लिए आय का सशक्त स्रोत बन चुका है और किसान खेती के साथ शहद उत्पादन कर आय में वृद्धि कर रहे हैं। डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि देश के कुल शहद उत्पादन में राजस्थान की हिस्सेदारी 9 प्रतिशत है और प्रदेश देश के पांच अग्रणी शहद उत्पादक राज्यों में शामिल है। वर्तमान में प्रदेश में 3 हजार 350 मधुमक्खी पालकों के पास 2 लाख 76 हजार मधुमक्खी कॉलोनियां हैं, जिनसे लगभग 8 हजार 500 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हो रहा है। शहद उत्पादन में अलवर, भरतपुर और हनुमानगढ़ अग्रणी जिले हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में राज्य सरकार द्वारा मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए 50 हजार मधुमक्खी कॉलोनियां एवं 50 हजार मधुमक्खी बॉक्स वितरित किए जा रहे हैं, जिन पर 40 प्रतिशत अनुदान के रूप में कुल 8 करोड़ रुपये की सहायता दी जा रही है। पराग की अनुपलब्धता एवं अधिक तापमान की स्थिति में मधुमक्खी कॉलोनियों के माइग्रेशन हेतु राज्य के 1000 मधुमक्खी पालकों को 9 हजार रुपये प्रति पालक की दर से सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक तरीके से शहद उत्पादन के प्रशिक्षण भी दिए जा रहे है। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा 2 करोड़ रुपये की लागत से 1000 मधुमक्खी पालकों को मधुमक्खी पालन किट वितरित की जा रही है। कृषि मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत भरतपुर और टोंक जिलों में 10-10 करोड़ रुपये की लागत से मधुमक्खी पालन के उत्कृष्टता केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों के माध्यम से मधुमक्खी पालकों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन, गुणवत्ता युक्त कॉलोनियां, प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पैकेजिंग, विपणन एवं शहद की गुणवत्ता जांच जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार मधुमक्खी पालकों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। शहद उत्पादन में आ रही समस्याओं और मधुमक्खी पालकों की मांगों को प्राथमिकता से पूरा किया जाएगा। कृषि मंत्री ने विभागीय अधिकारियों को शहद के प्रचार-प्रसार तथा आमजन को इसके स्वास्थ्य लाभों के प्रति जागरूक करने के निर्देश भी दिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *