पहले चरण में बड़े स्टेक होल्डर्स के 125 तुलाई कांटों का ऑटोमाइजेशन, कार्य में आएगी पारदर्शिता और छीजत पर लगेगी रोक- प्रमुख सचिव माइंस

ram

जयपुर। राज्य में पहले चरण में बड़े स्टेक होल्डर्स से जुड़े 125 तुलाई कांटों में ऑटोमाइजेशन किया गया है वहीं 3 हजार से अधिक खनिज परिवहन वाहनों को व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम से जोड़ा जा चुका है। खान एवं भूविज्ञान विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री टी. रविकान्त ने शनिवार को रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेयशन आरएफआईडी की हाईब्रीड मोड़ पर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में मार्च के अंत तक एक हजार से अधिक तुलाई यंत्रों को आनलाइन ऑटोमाइजेशन सुविधा से जोड़ दिया जाएगा। प्रमुख सचिव श्री रविकान्त ने बताया कि खान विभाग द्वारा पहले चरण में हिन्दुस्तान जिंक, कॉपर, लिग्नाइट व सीमेंट आदि बड़े स्टेक होल्डर्स के करीब 120 तुलाई कांटों के ऑटोमाइजेशन का लक्ष्य रखा था जिसके विरुद्ध 125 तुलाई कांटों में हार्डवेयर इंस्टालेशन और ऑटोमाइजेशन का काम किया गया है और इनमें से 105 से अधिक तुलाई कांटों में सफल परीक्षण हो चुका है व शेष एक दो दिन में पूरा कर लिया जाएगा। श्री रविकान्त ने बताया कि पहले चरण में 3073 वाहनों में व्हीकल ट्रेकिंग सिस्टम इंस्टाल किया जा चुका है। मोड्यूल्स की सहज उपलब्धता के लिए 59 जीपीएस वेंडर्स/ओईएम का पंजीकरण किया जा चुका है। प्रमुख सचिव माइंस श्री रविकान्त ने बताया कि यह प्रोजेक्ट पीएम उन्नती प्रोजेक्ट से जुड़ा होने के साथ ही राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकता में है। इससे खनिज क्षेत्र में पारदर्शिता आने के साथ ही राजस्व छीजत पर प्रभावी रोक लग सकेगी। यह राज्य सरकार और खनन पट्टाधारकों दोनों के लिए ही लाभकारी है। निदेशक माइंस श्री महावीर प्रसाद मीणा ने बताया कि विभाग स्तर पर मोनेटरिंग जारी है।अतिरिक्त निदेशक मुख्यालय श्री महेश माथुर ने बताया कि बताया कि पहले चरण में बड़े स्टेक होल्डर्स को आरआईएफडी के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया। उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में एक हजार से अधिक तुलाई यंत्रों का लक्ष्य रखा गया है। बैठक में संयुक्त सचिव श्री अरविन्द सारस्वत, ओएसडी श्री श्रीकृष्ण शर्मा, एसएमई श्री प्रताप मीणा, अधीक्षण भूवैज्ञानिक श्री संजय सक्सैना, अतिरिक्त निदेशक आईटी शीतल अग्रवाल व एसएमई स्तर के अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *