चंडीगढ़। पत्र सूचना कार्यालय (पीआईबी) जयपुर के नेतृत्व में राजस्थान से आए पत्रकारों के एक प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रोपड़ और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (एनआईईएलआईटी) रोपड़ का दौरा कर वहां संचालित शैक्षणिक, शोध, नवाचार एवं कौशल विकास गतिविधियों का अवलोकन किया। आईआईटी रोपड़ में प्रतिनिधिमंडल का स्वागत निदेशक प्रो. राजीव आहूजा, डीन (कैप्स) प्रो. पुष्पेंद्र पाल सिंह तथा जनसंपर्क अधिकारी निखिल स्वामी ने किया। प्रो. आहूजा ने संस्थान की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आईआईटी रोपड़ का लक्ष्य प्रतिभा को प्रोत्साहित करना, नवाचार को गति देना और अनुसंधान आधारित समाधान विकसित करना है। शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से स्थापित ANNAM.AI – आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर एग्रीकल्चर उत्कृष्टता केंद्र, 300 करोड़ रुपये से अधिक निवेश के साथ, कृषि क्षेत्र में एआई आधारित तकनीकों को विकसित कर रहा है। यह केंद्र मृदा स्वास्थ्य मैपिंग, फसल पूर्वानुमान, स्मार्ट सिंचाई और जलवायु अनुकूल खेती जैसे विषयों पर कार्य कर रहा है।
संस्थान ने भारतीय सेना के सहयोग से आर्मर्ड कोर सेंटर एंड स्कूल (ACC&S) के अधिकारियों के लिए रक्षा प्रौद्योगिकी में एम.टेक कार्यक्रम भी शुरू किया है, जो स्वदेशी रक्षा निर्माण और आधुनिकीकरण को बढ़ावा देगा। सेंटर ऑफ ड्रोन एंड ऑटोनॉमस सिस्टम्स (CoDRAS) एआई आधारित नेविगेशन, स्वचालित लैंडिंग और रियल-टाइम जियोट्रैकिंग पर कार्य कर रहा है। साथ ही “100 स्टार्टअप्स 100 डेज़” डीप-टेक एक्सेलरेशन अभियान के माध्यम से एग्रीटेक, वाटर-टेक, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और साइबर-फिजिकल सिस्टम्स क्षेत्रों के स्टार्टअप्स को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
इसके पश्चात प्रतिनिधिमंडल ने एनआईईएलआईटी रोपड़ का दौरा किया। वैज्ञानिक ‘एफ’ एवं रजिस्ट्रार डॉ. मनीष अरोड़ा ने बताया कि वर्ष 1978 से संचालित यह संस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शिक्षा एवं प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है। देशभर में एनआईईएलआईटी के 56 केंद्र हैं, जिनमें रोपड़ प्रमुख है। यहां सॉफ्टवेयर विकास, डाटा प्रोसेसिंग, परीक्षा एवं भर्ती परियोजनाओं के साथ-साथ ऊर्जा बिलिंग, जन्म-मृत्यु पंजीकरण डिजिटलीकरण तथा उपभोक्ता मूल्य सूचकांक प्रणाली जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं।
संस्थान में एआई, साइबर सुरक्षा, बिग डेटा, एआर/वीआर और ब्लॉकचेन जैसी उभरती तकनीकों में प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रतिनिधिमंडल ने दोनों संस्थानों की नवाचार, शोध और कौशल विकास की पहलों की सराहना करते हुए इन्हें आत्मनिर्भर भारत और डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।



