जयपुर। विधानसभा में दो साल बनाम पांच की जगह दो साल के सरकार के कामकाज के प्रतिवेदन पर बहस का प्रस्ताव रखने पर विवाद और हंगामा हो गया। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने सरकार के दो साल के प्रतिवेदन पर बहस का प्रस्ताव रखा। इस प्रस्ताव पर पहले नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने आपत्ति करते हुए कहा कि बहस पांच साल बनाम दो साल पर करवाने का तय हुआ था, बीएसी में भी यही तय हुआ था। संसदीय कार्यमंत्री जोगाराम पटेल और सरकारी मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने विपक्ष की आपत्तियों को खारिज कर दिया। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 5 फरवरी को मुख्यमंत्री के सदन में बयान का हवाला देते हुए कहा कि बहस दो साल बनाम पांच साल पर करवाने की सीएम ने घोषणा की थी। यहां इस प्रस्ताव से मुख्यमंत्री की बेइज्ज्जती हो रही है। जब मुख्यमंत्री की बात की ही वैल्यू नहीं है तो फिर हमारा क्या मतलब है। इसे लेकर लंबी नोकझोंक हुई। पटेल और डोटासरा के बीच नोकझोंक होने के बाद भारी हंगामा हुआ। कांग्रेस विधायकों ने वेल में आकर नारेबाजी शुरू कर दी। काफी देर हंगामा होने के बाद स्पीकर ने आधे घंटे के लिए 3 बजकर 57 मिनट तक सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
BAP विधायकों की विधानसभा में नारेबाजी, पोस्टर लहराए
इससे पहले विधानसभा में राजस्व की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के विधायकों ने सदन में नारेबाजी की और पोस्टर लगाए। बीएपी विधायकों ने पेपरलीक और भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की सीबीआई से जांच करवाने की मांग की। बीएपी विधायकों ने सीबीआई जांच की मांग वाली टीशर्ट पहन रखी थी। बीएपी विधायकों ने बेरोगजारों को न्याय दिलाने और सीबीआई जांच की मांग को लेकर नारेबाजी की। नारेबाजी कर रहे बीएपी विधायकों से कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने कांग्रसे प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा की तरफ इशारा करते हुए कहा- मेरे साढ़ू डोटासरा जी को सुनाओ। साढ़ू बहरे हो गए इन्हें सुनाई नहीं दे रहा। कुछ देर नारेबाजी के बाद माहौल शांत हो गया। इससे पहले बीएपी विधायक थावरचंद ने कहा- यहां पर मंत्री डॉ. किरोडीलाल बैठे हैं। इन्होंने कांग्रेस राज में खूब घरने दिए। आपने बेरोजगारों को न्याय का भरेसा दिया था। आपकी सरकार आने पर आपसे उम्मीद थी कि बेरोजगारों से अन्याय करने वाले चोरों को जेल भेजेंगे, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। पेपरलीक और भर्ती परीक्षाओं में धांधली की सीबीआई जांच होनी चाहिए। बहस के बाद राजस्व विभाग की अनुदान मांगें पारित कर दी गई।
कांग्रेस सरकार ने गांव वालों की एक नहीं सुनी थी
बीजेपी विधायक शत्रुघ्न गौतम ने पिछली कांग्रेस सरकार पर चारागाह जमीन के गलत तरीके से आवंटन कर 400 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया। बीजेपी विधायक कहा- बीसलपुर विस्थापितों को मुआवजे के नाम पर चारागाह जमीन अलॉट की, लेकिन उसी जमीन को कांग्रेस नेताओं ने अपने चहेतों के नाम करवा ली। ग्रामीण इसके विरोध में थे, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं ने चारागाह जमीन का 400 करोड़ का घोटाला किया। चारागाह की जमीन नहीं दे सकते थे, लेकिन मुआवजे के नाम पर जमीन दी। इसके दोषी अफसरों के खिलाफ तत्कलीन सीएम अशोक गहलोत ने कार्रवाई ड्रॉप कर दी।
रात को ऑफिस खोलकर रजिस्ट्रियां हुईं
बीजेपी विधायक शत्रुघ्न गौतम ने कहा- केकड़ी में कांग्रेस राज के दौरान बाइपास को सांप की तरह घुमाया गया। जहां कांग्रेस नेताओं की जमीनें थीं, वहीं बाइपास घुमा दिया। कांग्रेस नेताओं के चहेतों के नाम 400 से ज्यादा रजिस्ट्री की गई। तहसीलदार ने तबादले के बाद रात में दफ्तर खोलकर रजिस्ट्री की। इन सब गड़बड़ियों की जांच करवाकर कार्रवाई करनी चाहिए।
विधायक का आरोप, प्रभारी मंत्री ने फोन नहीं उठाया
राजस्व की अनुदान मांगों पर बहस के दौरान कांग्रेस विधायक रीटा चौधरी ने झुंझुनूं के प्रभारी मंत्री (सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री अविनाश गहलोत) पर गंभीर आरोप लगाए। रीटा चौधरी ने कहा- मेरे क्षेत्र मंडावा में हवेलियों और जमीन कब्जे करने के लिए माफिया सक्रिय हैं। मैंने इसकी शिकायत कई जगह की। प्रभारी मंत्री को भी फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठाया। प्रभारी मंत्री हवेलियों पर कब्जा करवाने सहित कई तरह के गलत कामों में लिप्त हैं। उस वक्त का कलेक्टर भी गड़बड़ी कर रहा था।



