जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के तहत सीएसआर कार्यशाला संपन्न, 140 करोड़ के कार्यों की समीक्षा और नए एमओयू किए गए

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जयपुर। मंत्री श्री मदन दिलावर ने कहा कि जल स्वावलंबन अभियान का मूल उद्देश्य समझना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने भूजल स्तर में लगातार हो रही गिरावट पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इसके कारणों का विश्लेषण कर प्रभावी समाधान ढूंढना होगा। उन्होंने जल दोहन को नियंत्रित करने तथा अधिक से अधिक जल पुनर्भरण (वॉटर रिचार्ज) के उपाय अपनाने के कार्य करने के निर्देश दिए। शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री श्री मदन दिलावर मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के अंतर्गत कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) को बढ़ावा देने के संबंध में एक महत्वपूर्ण कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। श्री दिलावर ने कहा कि जल स्तर बढ़ाने के लिए व्यापक स्तर पर पौधारोपण, चारागाह विकास, तालाबों एवं एनीकेट (छोटे बांध) का निर्माण, विलुप्त नदियों का पुर्नजीवित तथा अन्य जल स्रोतों का सृजन आवश्यक है। साथ ही, प्राकृतिक जल मार्गों में आई बाधाओं को दूर कर जल के प्राकृतिक प्रवाह को पुनर्स्थापित करना चाहिए। मंत्री श्री दिलावर ने इस दिशा में सुझाव आमंत्रित करते हुए अब तक किए गए प्रयासों की सराहना की और विकास कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए। मंत्री श्री दिलावर ने प्रत्येक ग्राम पंचायत में गौ वंश के संरक्षण को लेकर कार्य योजना बनाने पर भी चर्चा कर निर्देश दिए। उन्होंने कार्यशाला में पोलीथीन का इस्तेमाल नहीं करने का संकल्प भी दिलाया। उन्होंने जल उपलब्धता के आंकड़े बताते हुए डार्क जॉन के खतरे से निपटने की दिशा में कार्य के भी निर्देश दिए। पंचायत राज राज्य मंत्री ओटाराम देवासी ने कहा कि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान एक व्यापक एवं महत्वपूर्ण योजना है, जिसका मुख्य उद्देश्य बहते हुए जल को रोककर उसका संरक्षण करना है। उन्होंने सिरोही जिले में धरातल जल स्तर में आई उल्लेखनीय वृद्धि का उदाहरण देते हुए वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। श्री देवासी ने जनभागीदारी को इस अभियान की सफलता का प्रमुख आधार बताते हुए कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही जल संरक्षण संभव है। उन्होंने बावड़ियों, तालाबों के पुनर्जीवन, घास विकास, पौधारोपण एवं अन्य जल स्रोतों के निर्माण को प्राथमिकता देने को कहा। कार्यशाला का आयोजन गुरुवार को पंत कृषि भवन, जयपुर के सभा कक्ष में किया गया। इसमें पंचायती राज विभाग के शासन सचिव एवं आयुक्त डॉ. जोगाराम ने सीएसआर के कार्यों एवं सरकार द्वारा जल संरक्षण के लिए चलाए जा रहे विकास कार्यों की जानकारी दी। और तथा जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग की निदेशक एवं विशिष्ट शासन सचिव श्रीमती कल्पना अग्रवाल ने भी विभाग की योजनाओं की प्रगति एवं आगामी कार्ययोजना बताई। इस अवसर विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। कार्यशाला का आयोजन जल ग्रहण विकास एवं भू-संरक्षण विभाग द्वारा किया गया, जिसमें एनजीओ तथा सीएसआर प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला के दौरान 1 दिसंबर 2025 को आयोजित सीएसआर कॉन्फ्रेंस की समीक्षा की गई, जिसमें लगभग 140 करोड़ रुपए के विकास कार्यों के लिए प्रतिबद्धताएं प्राप्त हुई थीं। इन कार्यों की प्रगति का आकलन करते हुए सीएसआर के तहत किए जा रहे कार्यों के प्रावधान, कार्य योजना, वित्तीय स्वीकृति एवं विस्तृत परियोजनाओं पर गहन चर्चा की गई। इस अवसर पर विभिन्न संस्थाओं के साथ एमओयू भी संपन्न किए गए तथा विकास कार्यों को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौते किए गए और विकास कार्य की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यशाला में उपस्थित अधिकारियों एवं सीएसआर प्रतिनिधियों ने भी अपने सुझाव प्रस्तुत किए तथा जल संरक्षण के लिए नवाचार आधारित पहल पर चर्चा की गई। इस प्रकार, कार्यशाला में जल स्वावलंबन अभियान 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन एवं सीएसआर सहयोग से किए जा रहे अन्य विकास कार्यों पर भी विस्तार से चर्चा की गई।

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