हरित परिवहन की ओर बढ़ता Chandigarh, सड़कों पर उतरी इलेक्ट्रिक बसें

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चंडीगढ़। परिवहन सेवाओं के बीच केंद्र शासित प्रदेश Chandigarh ने इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू कर एक मिसाल पेश की है। जहां एक ओर पारंपरिक डीजल बसें पर्यावरण और बजट—दोनों पर बोझ बनती रही हैं, वहीं चंडीगढ़ में ईवी बसें आमजन की पहली पसंद बनती जा रही हैं। 428 इलेक्ट्रिक बसों को केंद्र सरकार से मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें से 25 बसें सड़कों पर उतर चुकी हैं और मार्च के पहले सप्ताह तक इनकी संख्या 45 होने जा रही है।

पीएम ने किया शुभारंभ, 10 मिनट की फ्रीक्वेंसी लक्ष्य
इन बसों का वर्चुअल शुभारंभ प्रधानमंत्री Narendra Modi ने गुवाहाटी से किया। प्रशासन का लक्ष्य प्रमुख रूट्स पर हर 10 मिनट में बस उपलब्ध कराना है। अभी कई रूट्स पर 15–30 मिनट का अंतर है, जिसे नई बसों के आने से कम किया जाएगा। पिछले वर्ष नवंबर में 15 साल पुरानी 85 डीजल बसों को हटाए जाने के बाद शहर में बसों की कमी हो गई थी। अस्थायी तौर पर लंबी दूरी की बसों को सिटी रूट्स पर लगाया गया। अब ईवी बसों के शुरू होने से लॉन्ग रूट बसें अपने मूल मार्ग पर लौटेंगी। फिलहाल ट्राइसिटी में करीब 80 ई-बसें संचालित हैं।

घाटे से मुनाफे की ओर
Chandigarh City Bus Service Society वर्तमान में बस संचालन में घाटे से जूझ रही है, लेकिन ईवी मॉडल से अगले कुछ वर्षों में वित्तीय स्थिति सुधरने की उम्मीद है। बस संचालक कंपनी को 61 रुपये प्रति किलोमीटर भुगतान किया जाएगा, जबकि केंद्र सरकार 10 वर्षों तक 24 रुपये प्रति किलोमीटर की वित्तीय सहायता देगी। चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए करीब 11.87 करोड़ रुपये की सहायता स्वीकृत है।

सवा करोड़ की बस, 220 किमी की रेंज
चीफ ऑपरेशन मैनेजर यशजीत गुप्ता के अनुसार एक बस की कीमत लगभग सवा करोड़ रुपये है। एक बार चार्ज होने पर बस 220 किलोमीटर तक चल सकती है। डेढ़ घंटे में फुल चार्जिंग की सुविधा उपलब्ध है। 6 चार्जिंग स्टेशन तैयार हैं और 5 और प्रस्तावित हैं।

जीपीएस, सीसीटीवी और ऑनलाइन टिकटिंग
ईवी बसों में पांच सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस ट्रैकिंग, पैनिक बटन और टू-वे कम्युनिकेशन सिस्टम लगे हैं। हर टिकट ऑनलाइन दर्ज होता है, जिससे पारदर्शिता बनी रहती है। एक कमांड सेंटर से लोकेशन, देरी, राजस्व, दुर्घटना और स्टाफ गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। 89 हजार से अधिक यात्रियों ने स्मार्ट कार्ड बनवा रखा है।

दिव्यांगों और महिलाओं के लिए विशेष सुविधा
हर बस में महिलाओं के लिए 8 पिंक सीटें आरक्षित हैं। दिव्यांग यात्रियों के लिए पावर-ऑपरेटेड रैंप की सुविधा है, जिससे व्हीलचेयर उपयोगकर्ता बिना सहायता के बस में चढ़-उतर सकते हैं।

दो मिनट में सफाई
सेक्टर-43 स्थित डिपो में अत्याधुनिक वॉशिंग यार्ड बनाया गया है, जहां मात्र दो मिनट में बस की सफाई संभव है।

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