बून्दी : मसाला उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं निर्यात पर दो दिवसीय प्रशिक्षण हुआ संपन्न

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बून्दी। कृषि विज्ञान केन्द्र में मसाला उत्पादन, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन एवं निर्यात पर दो दिवसीय प्रशिक्षण बुधवार को सम्पन्न हुआ। जिसमें जिले की 20 महिला प्रतिभागियों ने भाग लिया। वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष प्रो. हरीश वर्मा ने बताया कि राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड द्वारा राज्य में मसाला प्रोत्साहन हेतु मसाला उत्पादक कृषकों एवं कृषि उत्पादक संगठनों के लिए मसाला उत्पादन बढ़ाने, मूल्य संवर्धन, प्रसंस्करण, निर्यात को बढ़ावा देने के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है। जिससे युवा उद्यमी व्यावसायिक स्तर पर यूनिट स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकेंगे और अपना रोजगार शुरु कर सकेंगे। हाड़ौती क्षेत्र में मसालों की खेती, खाद्य उद्योग में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, क्योंकि मसाले विभिन्न व्यंजनों में स्वाद और रंग को बढ़ाते हैं। कुछ मसाले फूलों, पत्तियों या तनों से आते हैं और जड़ी-बूटियों या गार्निश के रूप में उपयोग किए जाते हैं। अन्य का व्यापक रूप से दवा, धार्मिक अनुष्ठानों, सौंदर्य प्रसाधनों और इत्र में उपयोग किया जाता है। इन अनेक उपयोगों के कारण मसाला खेती भारत में एक लाभदायक व्यवसाय बन गई हैं। साथ ही उन्होंने मसाला फसलों में कीट रोग प्रबंधन के बारे में बताया। डाॅ. दुर्गालाल मौर्य ने उच्च गुणवत्ता के मसाला उत्पादन करने, निर्यात योग्य मसाला उत्पादन एवं मार्केटिंग के बारे में बताया। मसालों का प्रसंस्करण कर उनकी पैकिजींग, लेबेलिंग करके एफएसएसएआई लाइसेंस लेकर उत्पादों को बेचकर आय बढ़ाने पर जोर दिया। डाॅ. घनश्याम मीना ने मसाला फसलों की प्राकृतिक खेती करने की तकनीक को समझाया। पशु रोगों में उपचार के लिए मसालों के उपयोग के बारे में बताया एवं प्रसंस्करण इकाई का भ्रमण करवाकर मसालों का मूल्य संवर्धन कर आय बढ़ाने के बारे में जानकारी दी। प्रशिक्षण प्रभारी इंदिरा यादव ने जिले में उत्पादित मसालों का उत्पादन एवं प्रसंस्करण की प्रायोगिक जानकारी दी। तिलहन तकनीकी सहायक विजेन्द्र कुमार वर्मा ने आई हुई महिला प्रतिभागियों को केंद्र की जीवन्त इकाईयों का भ्रमण करवाया। प्रशिक्षण उपरान्त सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किये गये। प्रशिक्षण में तकनीकी सहायक महेन्द्र चैधरी, वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता दीपक कुमार, चन्द्र प्रकाश श्रृंगी, विकास ताखर, लोकेश प्रजापत, दुर्गा सिंह सोलंकी व रामप्रसाद ने सहयोग प्रदान किया।

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