उत्तराखंड सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को अवैध मदरसों के वित्तपोषण के स्रोतों का पता लगाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अवैध दरगाहों के खिलाफ बुलडोजर एक्शन भी तेजी से चलाया जा रहा है। इस मुद्दे को लेकर राज्य की राजनीति भी गर्मा गयी है। पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मदरसों और दरगाहों का पक्ष लिया है तो भाजपा ने उन पर तीखे सवाल उठाये हैं। हम आपको यह भी बता दें कि उत्तराखंड सरकार ने राज्य में 100 से अधिक अवैध मदरसों को सील कर दिया है। इसके साथ ही सभी जिलाधिकारियों की ओर से अवैध मदरसों को मिल रही फंडिंग की जांच के जो आदेश दिये गये हैं ।
उसके बारे में बताया जा रहा है कि इस दौरान यह पता लगाया जाएगा कि मदरसों को किन स्रोतों से धनराशि मिल रही थी और वे किस उद्देश्य से इसका इस्तेमाल कर रहे थे। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं इन मदरसों को हवाला के माध्यम से तो पैसा नहीं मिल रहा था।बताया जा रहा है कि अधिकारियों को जांच कर अपनी रिपोर्ट सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपने के लिए कहा गया है। हम आपको बता दें कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में कहा था कि राज्य में अवैध मदरसों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा था, ‘‘बड़े पैमाने पर अवैध मदरसों का संचालन गंभीर मामला है। इसकी जांच के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद राज्य में पिछले महीने शुरू किये गये अभियान के तहत अब तक 136 अवैध मदरसों को सील किया गया है। उधम सिंह नगर जिले में सबसे अधिक 64 मदरसे सील किये गये, जबकि देहरादून में 44, हरिद्वार में 26 और पौड़ी में दो मदरसों को सील किया गया है। आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य में 500 से अधिक अवैध मदरसे मदरसा बोर्ड से संबद्धता के बिना संचालित किए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड में पंजीकृत मदरसों की संख्या 450 है और ये प्रशासन को बैंक खाते का विवरण और अपने खर्चों का रिकॉर्ड जैसे दस्तावेज उपलब्ध कराते हैं।



