प्रयागराज। प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच 7 दिनों से विवाद जारी है। शिविर में युवकों के हंगामे पर अविमुक्तेश्वरानंद ने पहली बार बयान दिया है। उन्होंने कहा- हमारे ऊपर आक्रमण इसलिए किया गया है, क्योंकि हम गो-रक्षा की बात कर रहे हैं। हम इनकी (भाजपा) आंख की किरकिरी बन गए हैं, कितना भी परेशान करें, मैं पीछे नहीं हटूंगा। जितना हमारे ऊपर जुल्म होगा, उतनी ही मजबूती से कदम उठाऊंगा। दरअसल,शनिवार रात कट्टर सनातनी सेना नाम के संगठन के 8 से 10 युवक भगवा झंडा लिए नारे लगाते पहुंच गए थे। शंकराचार्य के शिविर में घुसने की कोशिश की। ‘आई लव बुलडोजर बाबा’ और ‘योगी जिंदाबाद’ के नारे लगाने लगे। अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से धक्का-मुक्की भी हुई। 15 मिनट तक हंगामा चला। संगठन का प्रमुख सचिन सिंह नाम का व्यक्ति बताया जा रहा है। इसके बाद शंकराचार्य के शिष्यों ने शिविर को चारों तरफ से ढंक दिया। अंदर जाने के रास्ते ब्लॉक कर दिए। शंकराचार्य के शिविर प्रभारी ने थाने में शिकायत दी है। कहा है कि असामाजिक लोग लाठी-डंडे और झंडे लेकर आए थे। जबरन शिविर में घुसकर मारपीट करने पर उतारू थे। शिविर में मौजूद सेवकों ने उन्हें समझाकर बाहर निकाल दिया, लेकिन हालात काफी गंभीर थे। बड़ी घटना हो सकती थी। ऐसे में शंकराचार्य की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
मौनी अमावस्या पर क्या हुआ था, जानिए-
18 जनवरी को माघ मेले में मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद पालकी में स्नान करने जा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका और पैदल जाने को कहा। विरोध करने पर शिष्यों से धक्का-मुक्की हुई। इससे नाराज अविमुक्तेश्वरानंद शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए।
प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे में दो नोटिस जारी किए। पहले में उनके शंकराचार्य की पदवी लिखने और दूसरे में मौनी अमावस्या को लेकर हुए बवाल पर सवाल पूछे गए। प्रशासन ने चेतावनी दी थी कि क्यों न आपको हमेशा के लिए माघ मेले से बैन कर दिया जाए। अविमुक्तेश्वरानंद ने दोनों नोटिस के जवाब भेज दिए थे।
अविमुक्तेश्वरानंद बोले- सीएम को औरंगजेब कहकर क्या गलत किया
अविमुक्तेश्वरानंद ने दैनिक भास्कर से कहा- शिविर में उपद्रव के मामले में थाने में तहरीर दी थी, कोई नहीं आया। कुछ भी नहीं हुआ। शिविर में घुसने वाले संगठन ने शिकायत की है कि उनके साथ मारपीट हुई।
इस पर कहा- आप CCTV देख लीजिए, सब स्पष्ट हो जाएगा। सम्मान संगम में स्नान करने के बाद ही शिविर में प्रवेश करेंगे। पहले दिन से स्टैंड यही है। हम उसी पर कायम हैं। आपने मुख्यमंत्री के लिए औरंगजेब-हुमायूं का बेटा कहा है?
इस पर अखाड़ा परिषद अध्यक्ष की नाराजगी जताई है। इस सवाल पर अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा- संत की भाषा हो या न हो, यह आस्थावान हिंदू की भाषा है। आस्थावान हिंदुओं ने मंदिर तोड़ने वालों को औरंगजेब ही कहा है।
औरंगजेब ही हैं वे, जिन्होंने मंदिर तोड़े हैं। बड़ा आश्चर्य होता है कि जब CM के लिए औरंगजेब शब्द का इस्तेमाल करते हैं तो अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष को पीड़ा होती है, लेकिन जब हमारे मंदिरों के अंदर की मूर्तियां तोड़ी जा रही थीं, तब उनका कोई बयान नहीं आया।
उनका मन भगवान से नहीं जुड़ा हुआ है, उनका मन सिर्फ नेताओं से जुड़ा हुआ है। सब जानते हुए भी मुख्यमंत्री की भक्ति कर रहे हैं। भगवान की भक्ति करनी चाहिए। ये संत के लक्षण नहीं हैं। मंदिर तोड़ दिए गए, मूर्तियां तोड़ दी गईं। हिंदू मजदूरों ने मना किया तो मुस्लिम मजदूरों को बुलाया गया। वो दृश्य हमने देखा है। तब हमने औरंगजेब कहा है। क्या गलत कह रहे हैं, बताइए।
जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य ने अविमुक्तेश्वरानंद खिलाफ दो शिकायतें कराईं
अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य और श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस के पक्षकार आशुतोष ब्रह्मचारी ने पुलिस से दो शिकायतें की हैं। पहली शिकायत में आरोप लगाया गया है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिविर और गुरुकुल में नाबालिग बच्चों को रखा जाता है।
उनसे निजी सेवा, भीड़ जुटाने, कार्यक्रमों और पालकी जैसे काम कराए जाते हैं। इसमें बच्चों के यौन शोषण की आशंका भी जताई गई है। माघ मेले जैसे बड़े आयोजनों में भी बच्चों से काम कराया गया, जो बाल अधिकार और श्रम कानूनों का उल्लंघन हो सकता है। इसके अलावा शिविर में अवैध हथियार होने की आशंका, आय से अधिक संपत्ति और कई बैंक खातों की जांच की मांग भी की गई है।
शिकायत में मुकुंदानंद नाम के व्यक्ति की भूमिका की जांच कराने की भी मांग की गई है। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने पुलिस से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, बच्चों की सुरक्षा और पुनर्वास की व्यवस्था हो और अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो पॉक्सो एक्ट, जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, आर्म्स एक्ट समेत अन्य धाराओं में सख्त कार्रवाई की जाए।
दूसरी शिकायत में अविमुक्तेश्वरानंद पर फर्जी लेटरपैड और दस्तावेज बनाने का आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि माघ मेला क्षेत्र में अविमुक्तेश्वरानंद खुद को ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य बताकर “ज्योतिष पीठ/श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से लेटरपैड और दस्तावेज बनवाकर प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र भेज रहे हैं।
आरोप है कि ये लेटरपैड और पत्र फर्जी और भ्रामक हैं, जिससे प्रशासन और आम लोगों को गुमराह किया जा रहा है। इन लेटरपैड पर 24 जनवरी 2026 (माघ शुक्ल पंचमी) की तारीख दर्ज है। इसी तारीख का इस्तेमाल कर “श्री शंकराचार्य शिविर” के नाम से पत्र जारी किए गए हैं, जिनकी वैधता पर सवाल उठाए गए हैं।
यह भी कहा गया है कि शंकराचार्य कोई सरकारी या संवैधानिक पद नहीं होता, इसलिए इस तरह के नाम और लेटरपैड का इस्तेमाल करना गलत है।



