रामसर साइट सिसीसेढ पर आयोजित हुआ अलवर बर्ड फेस्टिवल- केंद्रीय वन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव एवं वन राज्यमंत्री श्री संजय शर्मा ने की बर्ड वाचिंग

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जयपुर। केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री तथा अलवर सांसद श्री भूपेन्द्र यादव तथा वन एवं पर्यावरण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री संजय शर्मा ने सिलीसेढ झील पर आयोजित अलवर बर्ड वॉचिंग फेस्टिवल में शिरकत कर कार्यक्रम की शुरूआत की।
केंद्रीय वन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव ने आमजन को बर्ड फेस्टिवल की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अलवर केवल प्रकृति का उपहार नहीं, बल्कि बाबा भर्तृहरि की तपोभूमि के रूप में आध्यात्म की धरती है। उन्होंने कहा कि अलवर में 200 से ज्यादा पक्षियों की प्रजाति दुनियाभर से आती है जो यहां आने वलो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। उन्होंने कहा कि हर वर्ष फरवरी में टाइगर मैराथन और बर्ड फेस्टिवल का आयोजन अलवर के पर्यटन को विश्व स्तर पर उभारने का काम करेगा। उन्होंने कहा कि 8 फरवरी को अंतरराष्ट्रीय स्तर की टाइगर मैराथन का आयोजन होगा तथा अगले वर्ष फरवरी में सिलीसेढ में बर्ड फेस्टिवल का भव्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश-दुनिया के लोग यहां आकर अलवर की पहचान दुनिया तक लेकर जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत में 98 रामसर साइट घोषित की गई है तथा हिन्दुस्तान में पहली बार केंद्रीय बजट में बर्ड वाचिंग का विषय भी रखा गया है तथा प्रकृति का यह उपहार भी अलवर को मिला है। केंद्रीय मंत्री श्री यादव ने कहा कि अलवर में पर्यावरण संरक्षण और अलवर के विकास की दृष्टि से जो योजनाएं सामूहिक प्रयासों से शुरू की गई हैं वे बहुत ही कारगर साबित हुई है। आगे भी इसी दिशा में सार्थक प्रयास किए जाते रहेंगे। उन्होंने कहा कि भूरासिद्ध पर मातृवन एवं कटी घाटी पर नगर वन स्थापित किए गए तथा कटी घाटी पर बायोलॉजिकल पार्क का काम प्रगतिरत है, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महती भूमिका अदा करेगा।
उन्होंने कहा कि अलवर में टाइगर कंजर्वेशन, सफाई-स्वच्छता में आगे बढाने एवं दुनिया के नक्शे पर अलवर को उभारने के उद्देश्य से टाइगर मैराथन शुरू की गई है, जिसमें साढे 18 हजार युवाओं एवं आमजन ने रजिस्ट्रेशन कराए हैं। इस दौरान उन्होंने उपस्थित बच्चों से बर्ड की प्रजातियों के संबंध में उनके ज्ञान को परखकर बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए पक्षियों की प्रजातियों की जानकारी दी। वन राज्यमंत्री श्री संजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व एवं केंद्रीय वन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव के मार्गदर्शन में अलवर में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक काम किए गए हैं। उन्होंने कहा कि बर्ड फेस्टिवल का आयोजन उदयपुर में किया जाता है, इस बार बर्ड फेस्टिवल के आयोजन का अलवर में किया जाना जिले के लिए गौरव का पल है। उन्होंने कहा कि अलवर में आयोजित किए जा रहे बर्ड फेस्टिवल के माध्यम से अलवर के पर्यटन को गति मिलेगी। साथ ही देश-विदेश के लोग यहां आकर पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों पर शोध कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि जो सरिस्का बाघ विहिन हो गया था, वहां वर्तमान में वन विभाग की कुशल मॉनिटरिंग के कारण 50 बाघ मय शावक स्वच्छंद विचरण कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास दिलाया कि आज बर्ड फेस्टिवल की शुरूआत की गई है और इस परम्परा को निरन्तर आगे बढाते हुए हर वर्ष 2 फरवरी को बर्ड फेस्टिवल आयोजित कराया जाएगा। उन्होंने सिलीसेढ झील को रामसर साइट के रूप में दर्जा दिलाने पर केंद्रीय मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव का आभार जताते हुए जिले के मंगलासर बांध व मानसरोवर बांध को भी रामसर साइट का दर्जा दिलाकर अलवर को गौरवांवित करने का आह्वान किया।

इनको किया गया सम्मानित
केंद्रीय वन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव एवं वन राज्यमंत्री श्री संजय शर्मा ने वनजीव संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कार्मिक रेंजर प्रथम अकबरपुर श्री राजेन्द्र प्रसाद शर्मा, वनपाल टहला श्री सौरभ कुमार, वनपाल श्री धर्मसिंह, वनरक्षक सुश्री मनीषा यादव, वनरक्षक श्री रतन गुर्जर, होमगार्ड श्री कैलाश चंद एवं टाइगर ट्रेकर श्री रवीन्द्र शर्मा को सम्मानित किया। इस अवसर पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के महानिदेशक श्री सुशील कुमार अवस्थी, अतिरिक्त महानिदेशक वाइल्ड लाइफ श्री रमेश पाण्डे, राज्य के प्रमुख चीफ कंजरवेटर फोरेस्ट श्री पवन कुमार उपाध्याय, अतिरिक्त प्रमुख चीफ कंजरवेटर फोरेस्ट श्री के.सी.ए अरूण प्रसाद, जिला प्रमुख श्री बलबीर सिंह छिल्लर, पुलिस अधीक्षक श्री सुधीर चौधरी, सरस डेयरी के चेयरमैन श्री नितिन सांगवान, डीएफओ अलवर श्री राजेन्द्र हुड्डा, डीएफओ सरिस्का श्री अभिमन्यु सहारण, जिला अध्यक्ष श्री अशोक गुप्ता, श्री संजय नरूका, श्री बन्नाराम मीणा, श्री सतीश यादव, पं. जलेसिंह, श्री सुरेश मेहता सहित प्रबुद्ध व्यक्ति, संबंधित अधिकारी एवं बडी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

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