राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस भारत में हर साल 7 नवंबर को मनाया जाता है। यह दिवस देश में कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने, इसके शुरुआती लक्षणों की पहचान करने, और समय पर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से समर्पित है। दुनियाभर में कैंसर चिंता का सबब बना हुआ है। इसकी वजह से हर साल हजारों लोग अपनी जान गंवा देते हैं। भारत में कैंसर से होने वाली मृत्यु दर वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के अनुसार, देश में हर साल 14 लाख से अधिक नए कैंसर के मामले सामने आते हैं, और अगले दशक में यह संख्या तेजी से बढ़ने की संभावना है। 2040 तक, भारत में कैंसर की घटनाओं के दोगुना होने का अनुमान है, जो स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। भारत में कैंसर का खतरा पिछले कुछ वर्षों में काफी तेजी से बढ़ते देखा गया है। आईसीएमआर का कहना है कि कैंसर का पता लगाने के लिए अब बेहतर डायग्नोस्टिक तकनीक है, इन तकनीकों की आम लोगों तक पहुंच और उपलब्धता है, जिसके चलते कैंसर का जल्दी भी पता लग जाता है। एडवांस स्टेज में जाने से पहले स्क्रीनिंग के जरिए कैंसर का पता लगने से इलाज होना संभव हो जाता है। ऐसे में स्क्रीनिंग पर ध्यान देने की जरूरत है और लक्षणों के बारे में जानकारी होना जरूरी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर एजेंसी इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि भारत में साल-दर साल इस रोग का खतरा काफी तेजी से बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक पुरुषों में होंठ, ओरल कैविटी और फेफड़ों के कैंसर के मामले सबसे अधिक देखे जा रहे हैं, वहीं महिलाओं में स्तन और सर्वाइकल कैंसर के केस सबसे आम देखे गए हैं। नए कैंसर के मामलों में 27 फीसदी केस स्तन कैंसर जबकि 18 प्रतिशत मामले सर्वाइकल कैंसर के देखे गए हैं।
भारत में यह बीमारी बढ़ती जा रही है। स्वस्थ जीवन का अधिकार हर मनुष्य को है। आजकल नाना प्रकार की बीमारियों से बच्चे से बुजुर्ग तक पीड़ित है। भागदौड़ भरी ज़िंदगी में आज हर व्यक्ति अच्छी सेहत की बात करता है मगर अधिकांश व्यक्तियों को रोग का या तो समय पर पता नहीं चल पाता है या उसका सही तरह से उपचार नहीं हो पाता है, जिसके कारण हर साल पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों की असमय ही अकाल मृत्यु हो जाती है। ऐसी ही एक बीमारी कैंसर है। देश और दुनिया में लोगों को इस घातक बीमारी से सचेत और जागरूक करने के उद्देश्य से कैंसर जागरूकता दिवस का आयोजन किया जाता है। कैंसर एक नहीं अपितु कई तरह के होते हैं। इनमें मुख कैंसर, स्तन कैंसर, पेट का कैंसर, ब्लड कैंसर, गले का कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, अंडाशय का कैंसर, प्रोस्टेट (पौरुष ग्रंथि) कैंसर, मस्तिष्क का कैंसर, लिवर (यकृत) कैंसर, बोन कैंसर और फेफड़ों का कैंसर शामिल है। यहाँ हम मुख कैंसर की बात विशेष रूप से कर रहे है। हमारे देश को मुंह के कैंसर की वैश्विक राजधानी माना जाता है। मानव शरीर में जितने भी प्रकार के कैंसर पनपते हैं, उनमें से 30 प्रतिशत से भी अधिक मुंह के कैंसर होते हैं।
गुटखा, खैनी, तंबाकू सिगरेट, शराब, और पान मसाला मुख रोगों के लिए बेहद घातक और खतरनाक साबित हो रहे है। इनके सेवन से मुंह में जलन, छाले, मुंह के कम खुलने की समस्या आम है। मुंह के छाले यानी माउथ अल्सर यूं तो एक बहुत ही सामान्य परेशानी है, लेकिन इसे नजरअंदाज करना जानलेवा भी साबित हो सकता है, क्योंकि यह किसी गंभीर बीमारी का लक्षण भी हो सकता है। भारत में बच्चे से बुजुर्ग तक को सरे आम इनका सेवन करते देखा जा सकता है। यह शोक अमीर से गरीब तक सभी आयु वर्ग के लोगों में है। हमारे देश में लाखों लोग आज मुख की विभिन्न बीमारियों से ग्रसित है। यह बीमारी धीरे धीरे कैंसर का रूप ले रही है जिनका इलाज असाध्य हो चला है। आईसीएमआर की रिपोर्ट को देखें तो मुख के कैंसर से मरने वालों की तादाद में हर साल वृद्धि हो रही है जो हमारे लिए बेहद चिंतनीय है। यह स्थिति तो तब है जब अनेक राज्य सरकारों ने अपने यहाँ गुटखा और पान मसाला पर रोक लगा रखी है।
बाल मुकुन्द ओझा
वरिष्ठ लेखक एवं पत्रकार

कैंसर अब लाइलाज नहीं : बचाव ही सबसे बड़ा उपचार
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