इंफाल। मणिपुर के नोने जिले के नुंगबा पुलिस स्टेशन के अंतर्गत केकरू नागा गांव में आज अज्ञात सशस्त्र बदमाशों के बीच हुई गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई। मणिपुर पुलिस ने आज यह जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, मारे गए तीनों व्यक्तियों के पास से हथियार और गोलाबारूद बरामद हुए हैं। मणिपुर में हिंसा थमी नहीं है। इसी को देखते हुए शनिवार को इंफाल की सड़कों पर एक विशाल रैली निकाली। इसमें विभिन्न समुदायों के प्रतिनिधि शामिल थे। प्रदर्शनकारियों ने सरकार को ‘फाइनल वॉर्निंग’ देते हुए कहा कि या तो राज्य में पूरी तरह शांति बहाली हो या फिर यह सरकार इस्तीफा दे दे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मणिपुर में हिंसा के चलते हजारों लोगों ने अपना घर छोड़ दिया है। उनकी घऱ वापसी सुनिश्चित होनी चाहिए। इसके अलावा कुकी-जो उग्रवादी संगठन के खिलाफ ऑपरेशन फिर से शुरू होना चाहिए। प्रदर्शनकारियों की तीसरी मांग है कि एनआरईसी को 1951 को बेस ईयर मानकर लागू किया जाए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह सरकार राज्य में शांति स्थापित करने में फेल रही है इसलिए इसे इस्तीफा दे देना चाहिए।
किसने बुलाई थी रैली?
‘कोऑर्डिनेटिंग कमेटी ऑन मणिपुर इंटीग्रिटी’ (कोकोमी) और कई अन्य नागरिक समाज संगठनों द्वारा आयोजित इस महारैली का उद्देश्य जारी संघर्ष को समाप्त करने, स्वदेशी पहचान और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा करने तथा राज्य में स्थायी शांति की बहाली की मांग करना था। इस रैली में मणिपुर के घाटी और पहाड़ी, दोनों क्षेत्रों के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जो मौजूदा राजनीतिक और सुरक्षा स्थिति को लेकर जन आक्रोश और चिंता को दर्शाता है। लंबे समय से जारी इस संकट के बीच पहाड़ी और घाटी क्षेत्रों के बीच एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए कई नागा नागरिक समाज संगठनों ने भी इस मार्च में हिस्सा लिया। शुरुआत क्वाकीथेल स्थित टिडिम ग्राउंड से हुई, जहां से प्रदर्शनकारी थांगमेइबंद के थाऊ मैदान की ओर आगे बढ़ रहे थे। हालांकि, सुरक्षाकर्मियों ने जुलूस को कैसमपत जंक्शन पर रोक दिया, जहां पुलिस ने लोक भवन और अन्य महत्वपूर्ण सरकारी प्रतिष्ठानों की ओर मार्च को बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड्स लगा रखे थे। हाथों में तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने शांति, न्याय, स्वदेशी समुदायों की सुरक्षा और कुकी सशस्त्र समूहों के साथ जारी ‘सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस’ समझौते को रद्द करने के नारे लगाए।
लाया गया 6 सूत्री प्रस्ताव
प्रदर्शन के बाद एक 6 सूत्री प्रस्ताव अपनाया गया, जिसमें राज्य की सुरक्षा स्थिति, विस्थापन संकट, अवैध घुसपैठ, शासन व्यवस्था और मणिपुर की मूल आबादी के संरक्षण से जुड़ी प्रमुख मांगें शामिल हैं।



