“इलेक्ट्रोपैथी अनुसंधान में डेटा का महत्व एवं भूमिका” विषयक संगोष्ठी आयोजित, महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से जुड़े प्रसंगों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का किया अवलोकन

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जयपुर। राज्यपाल श्री हरिभाऊ बागडे ने कहा कि महात्मा गांधी सत्य को ईश्वर का सर्वोच्च रूप मानते थे। सत्याग्रह का उनका दर्शन यह था कि अन्याय के खिलाफ बिना हिंसा के नैतिकता के बल पर प्रतिकार किया जाए। उन्होंने लाल बहादुर शास्त्री के सादगीपूर्ण जीवन की चर्चा करते हुए कहा कि राष्ट्र के लिए समर्पित उनका जीवन नैतिकता से ओतप्रोत था। उन्होंने गांधी और शास्त्री जी के जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया। उन्होंने इन दोनों की जयंती पर शोध पर आधारित इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा पद्धति में डेटा के महत्व से जुड़े आयोजन को महत्वपूर्ण बताया। श्री बागडे शुक्रवार को महात्मा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस में “इलेक्ट्रोपैथी अनुसंधान में डेटा का महत्व एवं भूमिका” विषयक संगोष्ठी में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इलेक्ट्रोपैथी को भी पेड़ पौधों के अर्क से तैयार पैथी बताते हुए कहा कि आयुर्वेद ही सभी चिकित्सा पद्धतियों का जननी है। उन्होंने बख्तियार खिलजी द्वारा नालंदा के पुस्तकालय को आग लगाने की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि हमारे महान आयुर्वेद के ज्ञान से जिस खिलजी का इलाज किया गया, उसने उसी को नष्ट करने का प्रयास किया। राज्यपाल ने लाल बहादुर शास्त्री के जीवन की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि वह घर खर्च के लिए पत्नी को पचास रुपये देते थे। एक बार कोई उनके पैसे मांगने के लिए आया। पत्नी ने अपनी बचत में से यह रूपये उपलब्ध कराए। शास्त्री जी ने बाद में यह बचत के पैसे भी अपनी तनख़ाह से लेना बंद कर दिया। शास्त्री जी राष्ट्र के प्रति सदा समर्पित रहे। उन्होंने गांधी के सत्याग्रह और अहिंसा की संस्कृति को राष्ट्र की निधि बताते हुए उनसे प्रेरणा लेने पर जोर दिया। हरिजन सेवक संघ, नई दिल्ली के राष्ट्रीय सचिव श्री संजय राय ने मुख्य वक्ता के रूप में महात्मा गांधी के जीवन दर्शन आलोक में कहा कि सत्य अंतिम नहीं होता। उन्होंने कहा कि समय और नवीन संदर्भों में व्यक्ति सदा नया होता है, उसका कल का सत्य और बेहतर बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ता है। विधायक श्री गोपाल शर्मा ने गांधी और शास्त्री जी के जीवन आलोक को अनुकरणीय बताया तथा कहा कि भारतीय संस्कृति में सत्य, अहिंसा, सत्याग्रह, ईमानदारी और नैतिकता के पावन संदेशों का प्रवाह उन्होंने किया। इससे पहले श्री हेमन्त सेठिया ने कहा कि इलेक्ट्रोपैथी चिकित्सा पद्धति को महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की सादगी के जीवन की प्रेरणा से प्रारम्भ किया गया। वर्ष 2018 में इस पद्धति को सरकारी मान्यता मिली। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से हर्बल पद्धति है और इससे अधिकाधिक लोगों को लाभान्वित करने के लिए इसके डेटा के महत्व पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया है। राज्यपाल ने इससे पहले महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के जीवन से जुड़े प्रसंगों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।

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