जयपुर। विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर Rajasthan International Centre, जयपुर में पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय ‘Rajasthan Creators Conclave 2026’ का समापन हुआ। Conclave में देशभर के 100 से अधिक ट्रैवल ब्लॉगर्स, कंटेंट क्रिएटर्स, स्कूल-कॉलेज के यूथ और होटल इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स शामिल हुए। इन सभी क्रिएटर्स ने राजस्थान पर्यटन के नए अनुभवों, रील्स की भूमिका और हिडन डेस्टिनेशन प्रमोशन पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री श्रीमती दिया कुमारी ने प्रमुख ट्रैवल इन्फ्लुएंसर्स शशांक संघवी, प्रकृति अरोराऔर आशीष शर्मा के साथ मंच पर चर्चा करते हुए और उसके पश्चात मीडिया से बातचीत करते हुए राजस्थान पर्यटन का नया विजन रखा।
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के संबोधन के मुख्य बिंदु
1. Conclave का उद्देश्य – यूथ और क्रिएटर्स से सीखना: “ये सब हमारे ट्रैवल ब्लॉगर्स हैं जो ट्रैवल से रिलेटेड सोशल मीडिया पर हैं, उन सबको बुलाकर उनसे इंटरैक्शन किया जाए। बहुत सारे यूथ को हमने इन्वाइट किया है, स्कूल के बच्चे, कॉलेज के बच्चे। इसमें बहुत सारी चीजें सामने निकली हैं कि नेक्स्ट हमको टूरिज्म में क्या करना चाहिए, जिससे हर ट्रैवलर को अलग-अलग एक्सपीरियंस चाहिए। इनको पता है इनकी कौन सी रील आगे बढ़ी, कौन सी नहीं बढ़ी, लोगों को क्या पसंद है। आजकल लोग सोशल मीडिया, रील्स से बहुत प्रभावित होते हैं। हम लोग एक प्रोग्राम करते हैं उसमें वही लोग आते हैं, कोई नई चीज नहीं निकलती, तो क्यों ना हम इन्फ्लुएंसर्स के साथ मिलकर कुछ और अच्छा और नया करें।”
2. पर्यटन की परिभाषा बदल गई है – Experience is New Tourism: “हमारी संस्कृति के पास लोग जाना चाहते हैं क्योंकि उनको सब कुछ rare चाहिए जो वो feel कर सके। आजकल सब कुछ experience related हो गया है। सिर्फ monument में जाके photo खिंचवाना सब कुछ नहीं होता। लोग और कुछ करना चाहते हैं। जैसे rural tourism, homestay में किसी के घर में रहना – वो कैसे रहते हैं, क्या खाते हैं, क्या बोलते हैं, रहन-सहन कैसा है, culture क्या है, लोग वो experience करना चाहते हैं। पुराना तरीका – monument, museum देखकर photo खींच के आना भी जरूरी है, बहुत important है, पर साथ-साथ लोग festivals देखना चाहते हैं, part of that whole experience होना चाहते हैं। तो tourism की परिभाषा definitely change हुई है।”
3. साझेदारी मॉडल और सरकार की भूमिका: “कंटेंट क्रिएटर के साथ मिलकर राजस्थान सरकार पर्यटन को बढ़ावा देना चाहती है। सरकार और स्टेकहोल्डर के साथ मिलकर पर्यटन के क्षेत्र में काम किया जाना चाहिए। सरकार एक facilitator है। सरकार और private sector मिलकर जब कुछ करते हैं तो बहुत अच्छा result आता है, जैसे IIFA Awards।” “शेखावाटी की हवेलियों के सम्बन्ध में बहुत कुछ किया जा रहा है। जब हम पर्यटन स्थलों पर कुछ करते हैं तो वहां के लोगों के साथ मिलकर करते हैं, तभी creativity आती है।”
4. टेक्नोलॉजी बनाम मानवीय स्पर्श और विरासत संरक्षण: “तकनीक कितनी भी एडवांस हो जाए लेकिन मानवीय टच हमेशा और सबसे अधिक महत्वपूर्ण है।” “हमारी विरासत, कला, संस्कृति, रीति-रिवाज, भाषा सुरक्षित, संरक्षित रहे और आगे बढ़े, यह हमारी प्राथमिकता है।”
5. इंफ्रास्ट्रक्चर – बेसिक सुविधाओं का द्रुतगति से विकास: “हम बेसिक सुविधाओं का द्रुतगति से विकास कर रहे हैं। प्रदेश में रेल रोड कनेक्टिविटी बहुत अच्छी है, राजस्थान में बहुत सारे एयरपोर्ट हैं और एयरपोर्ट के विकास के काम हो रहे हैं, एयर कनेक्टिविटी को बढ़ाया जा रहा है ताकि हर पर्यटक को सुगम अनुभव मिले।”
6. हर जिला यूनिक – जयपुर से आगे देखो: “राजस्थान का हर स्थान यूनिक है और जयपुर का परकोटा एक दम यूनिक है, जिसके बाजार, चौराहों, नुक्कड़ गलियों की अपनी-अपनी यूनिक पहचान है जो एक प्लानिंग के तहत है। हवामहल यूनिक है। बाड़मेर, पुष्कर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर जैसे हर जिले का अपना फ्लेवर है।”
7. अनछुए स्थलों पर फोकस: “मैं तो कहूंगी सारा tourism important है। कई ऐसी जगहें हैं जो बहुत सुंदर हैं लेकिन वहां तक टूरिज्म नहीं पहुंचा या टूरिस्ट जानते ही नहीं। सबसे पहले उन destinations को बाहर निकालें, उनका प्रचार-प्रसार करें। इससे लोकल employment बढ़ेगी और लोकल economy मजबूत होगी, वो ज्यादा important है। उदयपुर जाने वाले डूंगरपुर, प्रतापगढ़, बांसवाड़ा देखने जाएं, बहुत सुन्दर है।”
8. ग्रामीण पर्यटन आत्मा है: “देवमाली एक ऐसा गांव है जहाँ आज भी कच्चे घर हैं। लोग आज भी अपनी परंपरा के साथ जीते हैं। यही हमारे ग्रामीण पर्यटन की असली आत्मा है।”

पर्यटन की परिभाषा बदली है, अब लोग फोटो नहीं एक्सपीरियंस चाहते हैं, क्रिएटर्स और यूथ के साथ मिलकर तय करेंगे टूरिज्म का अगला कदम – उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी
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