हवा में कदम, नीचे समंदर… कैलासगिरी पर रोमांच का नया ठिकाना

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-विशाखापट्टनम की खूबसूरती में जुड़ा कांच का नया अध्याय, 55 मीटर लंबे ग्लास स्काईवॉक से दिखता है बंगाल की खाड़ी का विहंगम नजारा

विशाखापट्टनम। समुद्र की लहरें, पहाड़ियों की हरियाली और दूर तक फैला नीला आसमान… इन सबके बीच अगर कदमों के नीचे जमीन की जगह पारदर्शी कांच हो तो रोमांच का अंदाजा लगाया जा सकता है। विशाखापट्टनम के प्रसिद्ध कैलासगिरी हिलटॉप पार्क में बना ग्लास स्काईवॉक अब शहर के पर्यटन आकर्षण को एक नया आयाम दे रहा है। पहाड़ी से बाहर हवा में निकला यह ग्लास ब्रिज पर्यटकों को समुद्र और शहर का नजारा एक अलग ही ऊंचाई से देखने का मौका देता है। करीब 7 करोड़ रुपए की लागत से विकसित इस ग्लास स्काईवॉक को विशाखापट्टनम मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (VMRDA) की पर्यटन विकास पहल के तहत तैयार किया गया है। यह दिसंबर 2025 में पर्यटकों के लिए खोला गया। इसके बाद कैलासगिरी आने वाले पर्यटकों के लिए यह नया आकर्षण केंद्र बन गया है। 55 मीटर का स्काईवॉक, 35 मीटर हिस्सा हवा में कैलासगिरी ग्लास ब्रिज की कुल लंबाई करीब 55 मीटर है। इसकी खासियत इसका कैंटिलीवर हिस्सा है। ब्रिज का लगभग 35 मीटर हिस्सा पहाड़ी से बाहर हवा में निकला हुआ है। इसी हिस्से पर चलते हुए पर्यटकों को नीचे पहाड़ी और दूर तक फैली समुद्री पट्टी दिखाई देती है। जैसे-जैसे पर्यटक ग्लास फ्लोर पर आगे बढ़ते हैं, नीचे दिखाई देता प्राकृतिक दृश्य रोमांच को बढ़ाता जाता है। एक तरफ बंगाल की खाड़ी का विशाल विस्तार तो दूसरी ओर विशाखापट्टनम शहर और आसपास की पहाड़ियां दिखाई देती हैं। साफ मौसम में यहां से समुद्र और तट का दृश्य विशेष आकर्षण बन जाता है।

कांच के नीचे दिखाई देती है गहराई
ग्लास ब्रिज की सबसे बड़ी खासियत इसका पारदर्शी फर्श है। सामान्य पुलों की तरह यहां पैरों के नीचे ठोस सतह दिखाई नहीं देती। नीचे पहाड़ी की ढलान और आसपास का प्राकृतिक क्षेत्र साफ नजर आता है। यही वजह है कि ग्लास स्काईवॉक पर पहला कदम रखना कई पर्यटकों के लिए रोमांच और उत्सुकता का मिश्रण बन जाता है। कुछ लोग शुरुआत में सावधानी से कदम बढ़ाते हैं तो कुछ पर्यटक ग्लास फ्लोर पर खड़े होकर नीचे का दृश्य अपने कैमरे में कैद करते नजर आते हैं।

समुद्र के किनारे तेज हवाओं को ध्यान में रखकर डिजाइन
विशाखापट्टनम समुद्र तट पर बसा शहर है, इसलिए यहां किसी ऊंची और खुली संरचना के निर्माण में तेज हवाओं और तटीय मौसम को ध्यान में रखना महत्वपूर्ण है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार ग्लास ब्रिज की संरचना को करीब 250 किलोमीटर प्रति घंटे तक की हवा की गति को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। ब्रिज के निर्माण में मजबूत स्टील संरचना और उच्च क्षमता वाले ग्लास का इस्तेमाल किया गया है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दोनों ओर रेलिंग और सपोर्टिंग सिस्टम लगाए गए हैं। पर्यटकों की आवाजाही को नियंत्रित रखने के लिए एक समय में सीमित संख्या में लोगों को प्रवेश दिया जाता है।

कैलासगिरी में पहले से मौजूद हैं कई आकर्षण
कैलासगिरी विशाखापट्टनम के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में पहले से शामिल रहा है। समुद्र तल से ऊंचाई पर स्थित इस पहाड़ी से शहर और बंगाल की खाड़ी का शानदार दृश्य दिखाई देता है। यहां स्थापित भगवान शिव और माता पार्वती की विशाल प्रतिमाएं, रोपवे और व्यू पॉइंट पर्यटकों को लंबे समय से आकर्षित करते रहे हैं। इसके अलावा एडवेंचर गतिविधियों के रूप में जिप लाइन और स्काई साइकिलिंग जैसी सुविधाएं भी विकसित की गई हैं। अब ग्लास स्काईवॉक के जुड़ने से कैलासगिरी की पहचान केवल एक हिलटॉप पार्क के रूप में नहीं, बल्कि नेचर और एडवेंचर टूरिज्म के प्रमुख केंद्र के रूप में और मजबूत हुई है।

सूर्यास्त के समय बढ़ जाता है नजारा
ग्लास ब्रिज का आकर्षण केवल दिन के समय तक सीमित नहीं है। शाम के समय जब सूरज बंगाल की खाड़ी के क्षितिज की ओर बढ़ता है, तब कैलासगिरी से दिखाई देने वाला सूर्यास्त पर्यटकों के लिए खास अनुभव बन जाता है। एक ओर समुद्र पर पड़ती सूरज की सुनहरी रोशनी और दूसरी ओर ऊंचाई से दिखाई देता विशाखापट्टनम का फैलाव—इस पूरे दृश्य को ग्लास स्काईवॉक से देखना इसे और यादगार बना देता है।

पर्यटन कारोबार को भी मिल सकता है फायदा
कैलासगिरी में नए आकर्षण के जुड़ने का असर केवल पर्यटकों तक सीमित नहीं माना जा रहा। किसी पर्यटन स्थल पर पर्यटकों की संख्या और ठहराव बढ़ने से होटल, रेस्तरां, स्थानीय परिवहन, गाइड, हस्तशिल्प और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को भी लाभ मिलता है। ग्लास ब्रिज के साथ कैलासगिरी क्षेत्र में पर्यटन सुविधाओं के विस्तार की योजनाएं भी बनाई गई हैं। VMRDA की परियोजनाओं में पर्यटकों के लिए अन्य सुविधाओं और एडवेंचर गतिविधियों के विकास का भी उल्लेख है।

विशाखापट्टनम की पर्यटन पहचान को नई ऊंचाई
विशाखापट्टनम पहले से ही समुद्र तट, पहाड़ियों, बंदरगाह, अराकू घाटी और प्राकृतिक पर्यटन के लिए देशभर में जाना जाता है। शहर में आधुनिक पर्यटन सुविधाओं का विस्तार होने से यहां आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षणों की संख्या बढ़ रही है। कैलासगिरी का ग्लास स्काईवॉक इसी बदलती पर्यटन तस्वीर का हिस्सा है। यह परियोजना प्राकृतिक सुंदरता को आधुनिक इंजीनियरिंग और एडवेंचर के साथ जोड़ती है।

एक नजर में ग्लास ब्रिज
स्थान: कैलासगिरी हिलटॉप पार्क, विशाखापट्टनम
लागत: करीब 7 करोड़ रुपए
कुल लंबाई: करीब 55 मीटर
कैंटिलीवर हिस्सा: करीब 35 मीटर
प्रकार: ग्लास स्काईवॉक/कैंटिलीवर ग्लास ब्रिज
विकास एजेंसी: VMRDA
पर्यटकों के लिए शुरुआत: दिसंबर 2025
प्रमुख आकर्षण: बंगाल की खाड़ी, समुद्र तट और विशाखापट्टनम का विहंगम दृश्य

कैलासगिरी अब सिर्फ पहाड़ी नहीं, रोमांच का नया पता
विशाखापट्टनम की पहचान समुद्र और पहाड़ियों से है, लेकिन कैलासगिरी का ग्लास ब्रिज इस प्राकृतिक खूबसूरती को देखने का नया तरीका लेकर आया है। कांच पर चलते हुए नीचे पहाड़ी, सामने समुद्र और चारों तरफ खुला आसमान—यही अनुभव इस ग्लास स्काईवॉक को विशाखापट्टनम के पर्यटन नक्शे पर अलग पहचान देता है। कैलासगिरी की पहाड़ी पर बना यह पुल आने वाले समय में शहर के उन पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकता है, जहां लोग केवल दृश्य देखने नहीं, बल्कि एक रोमांचक अनुभव अपने साथ लेकर लौटने पहुंचेंगे।

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