-1941 में शुरू हुआ हिंदुस्तान शिपयार्ड का सफर, अब तक 200 जहाजों का निर्माण; जहाजों की मरम्मत और पनडुब्बियों की रिफिटिंग में भी अहम भूमिका
विशाखापट्टनम। समुद्र किनारे बसे विशाखापट्टनम की पहचान केवल बंदरगाह और क्रूज पर्यटन तक सीमित नहीं है। यह शहर देश के महत्वपूर्ण जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत केंद्रों में भी शामिल है। यहां स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड देश की समुद्री और रक्षा जरूरतों के लिए जहाजों के निर्माण, मरम्मत और पनडुब्बियों की रिफिटिंग का काम करता है। कंपनी की स्थापना वर्ष 1941 में हुई थी और यह पूर्वी तट पर समुद्री इंजीनियरिंग के प्रमुख केंद्रों में विकसित हुआ है।
200 जहाजों का निर्माण
हिंदुस्तान शिपयार्ड के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार शिपयार्ड अब तक 200 जहाजों का निर्माण कर चुका है। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के 2,021 जहाजों की मरम्मत की जा चुकी है। शिपयार्ड में पनडुब्बियों की रिफिटिंग और आधुनिक समुद्री ढांचे के निर्माण की क्षमता भी है।
जहाज बनता कैसे है?
शिपयार्ड में जहाज निर्माण की प्रक्रिया डिजाइन और इंजीनियरिंग से शुरू होती है। इसके बाद जहाज के अलग-अलग हिस्सों और संरचनाओं को तैयार कर उन्हें एक साथ जोड़ा जाता है। भारी क्रेन और विशेष मशीनरी की मदद से जहाज का ढांचा तैयार होता है। इसके बाद इंजन, पाइपलाइन, विद्युत प्रणाली, नेविगेशन और अन्य उपकरण लगाए जाते हैं। अंतिम चरण में परीक्षण के बाद जहाज को समुद्र में उतारा जाता है।
रक्षा से लेकर समुद्री क्षेत्र तक उपयोग
हिंदुस्तान शिपयार्ड का काम केवल सामान्य जहाजों के निर्माण तक सीमित नहीं है। यह रक्षा क्षेत्र, समुद्री परिवहन और ऑफशोर गतिविधियों के लिए भी जहाज तथा अन्य संरचनाएं तैयार करता है। शिपयार्ड के पास उन्नत समुद्री और तटीय संरचनाओं के डिजाइन व निर्माण का अनुभव भी है।
जहाजों की मरम्मत का भी बड़ा केंद्र
विशाखापट्टनम में शिपयार्ड की दूसरी बड़ी गतिविधि जहाजों की मरम्मत और रखरखाव है। समुद्र में चलने वाले जहाजों को नियमित अंतराल पर तकनीकी जांच, मरम्मत और बड़े रखरखाव की जरूरत होती है। इसके लिए शिपयार्ड में बड़े जहाजों पर काम करने की सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब तक 2,000 से अधिक जहाजों की मरम्मत इसका बड़ा अनुभव आधार है।
पनडुब्बियों की रिफिटिंग भी
शिपयार्ड में पनडुब्बियों की रिफिटिंग भी की गई है। यह काम अत्यधिक तकनीकी और संवेदनशील प्रकृति का होता है, जिसमें पनडुब्बी के विभिन्न सिस्टम की जांच, मरम्मत और आधुनिकीकरण शामिल हो सकता है। HSL के अनुसार उसके अनुभव में पांच पनडुब्बियों की रिफिटिंग भी शामिल है।
समुद्र से जुड़ा पूरा इकोसिस्टम
विशाखापट्टनम में पोर्ट, शिपयार्ड, समुद्री परिवहन और क्रूज टर्मिनल की मौजूदगी इसे एक व्यापक समुद्री गतिविधि केंद्र बनाती है। एक तरफ पोर्ट पर बड़े जहाजों से कार्गो की आवाजाही होती है, दूसरी तरफ शिपयार्ड में जहाजों का निर्माण और मरम्मत होती है और क्रूज टर्मिनल के जरिए पर्यटक समुद्र के रास्ते शहर पहुंचते हैं।
रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए अहम
जहाज निर्माण और मरम्मत उद्योग से इंजीनियरिंग, वेल्डिंग, फिटिंग, इलेक्ट्रिकल, मशीनरी, डिजाइन, सुरक्षा और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में कुशल मानव संसाधन की जरूरत होती है। इसके साथ बड़ी संख्या में सहायक उद्योग और सेवा क्षेत्र भी जुड़े रहते हैं। ऐसे में शिपयार्ड विशाखापट्टनम के समुद्री औद्योगिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
समुद्र से जुड़ी तीन तस्वीरें, एक शहर
विशाखापट्टनम की समुद्री पहचान को तीन हिस्सों में देखा जा सकता है—जहां पोर्ट पर जहाजों से माल आता-जाता है, शिपयार्ड में जहाज तैयार और दुरुस्त होते हैं और क्रूज टर्मिनल से पर्यटक समुद्र के रास्ते शहर में प्रवेश करते हैं। यही वजह है कि विशाखापट्टनम को भारत के प्रमुख समुद्री केंद्रों में गिना जाता है।



