विशाखापट्टनम पोर्ट: 1933 से शुरू सफर, अब 8.26 करोड़ टन कार्गो संभालने की क्षमता

ram

-बड़े जहाजों की आवाजाही से लेकर कंटेनर, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात और पेट्रोलियम तक का प्रमुख समुद्री केंद्र

-आधुनिक टर्मिनल सुविधाओं और हरित पहल से बढ़ रही क्षमता

विशाखापट्टनम। वर्ष 1933 में सीमित स्तर पर खनिज अयस्कों के निर्यात से शुरू हुआ विशाखापट्टनम पोर्ट आज देश के प्रमुख समुद्री व्यापार केंद्रों में शामिल है। वित्त वर्ष 2024-25 में पोर्ट ने 82.62 मिलियन टन यानी करीब 8.26 करोड़ टन कार्गो संभाला। यहां बड़े समुद्री जहाजों से लेकर कंटेनर कार्गो, कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, पेट्रोलियम उत्पाद, उर्वरक और अन्य औद्योगिक माल की आवाजाही होती है। आधुनिक विशाखापट्टनम पोर्ट का संचालन 7 अक्टूबर 1933 को एसएस जलदुर्गा जहाज के प्रवेश के साथ शुरू हुआ था। शुरुआती दौर में मुख्य रूप से खनिज अयस्कों का निर्यात होता था, लेकिन औद्योगिक गतिविधियों और व्यापार के विस्तार के साथ पोर्ट पर कार्गो की विविधता लगातार बढ़ती गई। आज यह आंध्र प्रदेश के साथ-साथ ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना और देश के अन्य हिस्सों के लिए समुद्री लॉजिस्टिक्स का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

बड़े जहाजों को संभालने की क्षमता
विशाखापट्टनम पोर्ट की भौगोलिक स्थिति इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। डॉल्फिन्स नोज की प्राकृतिक संरचना पोर्ट को समुद्री परिस्थितियों से सुरक्षा देने में मदद करती है। बाहरी बंदरगाह में करीब 2 लाख डीडब्ल्यूटी तक के बड़े जहाजों को संभालने की क्षमता है। कंटेनर टर्मिनल स्तर पर भी आधुनिक सुविधाएं विकसित की गई हैं। टर्मिनल में 845 मीटर क्वे लंबाई, चार बर्थ, सात क्वे क्रेन, 18 ईआरटीजी, 4,412 ग्राउंड स्लॉट और करीब 16.5 मीटर गहरा पानी उपलब्ध है। यहां करीब 1,300 टीईयू की क्षमता, 650 रेफर चार्जिंग प्वाइंट और 390 मीटर तक एलओए वाले जहाजों को संभालने की सुविधा है। दो ऑन-डॉक रेल साइडिंग और छह सेमी-ऑटोमेटेड गेट के जरिए कार्गो की आवाजाही को गति दी जा रही है।

बड़े जहाज और रिकॉर्ड कंटेनर संचालन
जेएम बक्सी पोर्ट्स एंड लॉजिस्टिक्स के विशाखापट्टनम कंटेनर टर्मिनल की ओर से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2025 में 366 मीटर एलओए और 15,934 टीईयू क्षमता वाले सबसे बड़े जहाज को संभाला गया। इसी महीने 62,035 टीईयू का उच्चतम मासिक थ्रूपुट दर्ज किया गया। अक्टूबर 2025 में 3,909 टीईयू का रिकॉर्ड पार्सल आकार और जनवरी 2025 में 100 रेक संभालने का रिकॉर्ड भी दर्ज किया गया। ऑपरेशन की दक्षता के लिहाज से औसत जहाज टर्नअराउंड समय करीब 20 घंटे बताया गया है, जबकि पीक क्रेन उत्पादकता 40 मूव प्रति घंटे तक पहुंची। टर्मिनल एक साथ तीन जहाजों को संभालने और जहाजों को आगमन पर बर्थ देने की क्षमता भी रखता है।

देश के बड़े औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ा नेटवर्क
विशाखापट्टनम पोर्ट का कार्गो नेटवर्क कई राज्यों के औद्योगिक क्षेत्रों तक फैला है। ओडिशा में झारसुगुड़ा, संबलपुर, अंगुल, कलिंगानगर, कटक और भुवनेश्वर जैसे क्षेत्र इससे जुड़े हैं। छत्तीसगढ़ में कोरबा, रायगढ़, रायपुर और राजनांदगांव, जबकि तेलंगाना में हैदराबाद प्रमुख hinterland क्षेत्र हैं। आंध्र प्रदेश में विशाखापट्टनम के अलावा काकीनाडा, गुंटूर, गोदावरी क्षेत्र, श्रीकाकुलम, बोब्बिली, विजयनगरम और परवाड़ा जैसे औद्योगिक एवं व्यापारिक क्षेत्र इससे जुड़े हैं।

निर्यात में धातु से लेकर समुद्री उत्पाद तक
पोर्ट से होने वाले निर्यात में फेरो एलॉय, एल्युमिनियम, इस्पात, झींगा और चावल प्रमुख हैं। वहीं आयात में स्क्रैप, रसायन, रिफ्रैक्टरी सामग्री, भारी खनिज, फार्मा उत्पाद, कागज, मशीनरी और स्पेयर पार्ट्स शामिल हैं। नेपाल को जाने वाला कंटेनर कार्गो भी विशाखापट्टनम के व्यापारिक नेटवर्क का हिस्सा है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार नेपाल-बाउंड कार्गो में 45,582 टीईयू का स्तर दर्ज किया गया, जो तुलनात्मक अवधि में 24 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। रेल लॉजिस्टिक्स के जरिए भी कंटेनर और अन्य माल को पोर्ट से देश के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंचाया जा रहा है।

हरित तकनीक पर भी जोर
बढ़ते कार्गो संचालन के साथ पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं। टर्मिनल में यार्ड उपकरणों का विद्युतीकरण किया गया है, जिसमें आरएमक्यूसी, 18 आरटीजी, पांच रीच स्टैकर और एक फोर्कलिफ्ट शामिल हैं। मौजूदा ट्रेलरों को इलेक्ट्रिक वाहनों से बदलने की योजना भी बनाई गई है। टर्मिनल क्षेत्र में करीब 9 एकड़ का ग्रीन बेल्ट विकसित किया गया है, जहां 2,200 से अधिक पौधों का रखरखाव किया जा रहा है। इसके अलावा 5 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र की योजना है। जल संरक्षण के क्षेत्र में जीरो लिक्विड डिस्चार्ज प्रमाणन भी दर्ज है।

रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारी
पोर्ट संचालन से जुड़े कौशल विकास के लिए 548 लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है। सामाजिक दायित्व के तहत 32 चिकित्सा शिविर लगाए गए, जिनसे करीब 2,390 लोगों को निशुल्क चिकित्सा सहायता मिली। टर्मिनल संचालन में महिला कर्मचारियों की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।

दो प्रमुख कंटेनर टर्मिनल
विशाखापट्टनम कंटेनर टर्मिनल के तहत दो प्रमुख टर्मिनल सुविधाएं हैं। वीसीटी-I की क्वे लंबाई 449 मीटर और क्षमता 5.50 लाख टीईयू है, जबकि वीसीटी-II की क्वे लंबाई 395 मीटर और क्षमता 7.50 लाख टीईयू बताई गई है। इन सुविधाओं की रियायत अवधि क्रमशः सितंबर 2032 और मार्च 2049 तक है। इस तरह विशाखापट्टनम पोर्ट का सफर केवल समुद्री जहाजों से माल उतारने-चढ़ाने तक सीमित नहीं है। यह समुद्री परिवहन, कंटेनर संचालन, रेल लॉजिस्टिक्स, औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को जोड़ने वाले एक बड़े नेटवर्क के रूप में विकसित हो चुका है। 1933 में खनिज अयस्कों के सीमित निर्यात से शुरू हुआ यह सफर आज करोड़ों टन कार्गो और बड़े कंटेनर जहाजों के संचालन तक पहुंच गया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *