संयुक्त राष्ट्र की जेंडर रिपोर्ट : लैंगिंग समानता की बातें हवा हवाई

ram

बाल मुकुन्द ओझा
संयुक्त राष्ट्र की एक ताज़ा जेंडर स्नैपशॉट 2026 रिपोर्ट का गहराई से अध्ययन और विश्लेशण करे तो महिला समानता की वास्तविक स्थिति भयावह रूप से हमारे सामने प्रस्तुत होती है। रिपोर्ट में खुलाशा किया गया है कि, लैंगिक समानता के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में प्रगति बहुत धीमी है और वर्तमान दर से इसे हासिल करने में 171 साल लगेंगे। आंखें खोल देने वाली यह रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र महिला और संयुक्त राष्ट्र आर्थिक एवं सामाजिक मामलों के विभाग ने जारी की है। रिपोर्ट के अनुसार, लैंगिक समानता से संबंधित सतत विकास लक्ष्य का एक भी लक्ष्य ऐसा नहीं है, जिसके वर्ष 2030 तक प्राप्त होने की दिशा में अपेक्षित प्रगति हो रही हो। लैंगिक समानता संयुक्त राष्ट्र के 17 सतत विकास लक्ष्यों में से एक है। बताया गया है किसी भी देश ने पूर्ण कानूनी समानता हासिल नहीं की है, और अध्ययन किए गए 131 देशों में से 51 प्रतिशत में अभी भी महत्वपूर्ण कानूनी अंतराल मौजूद हैं, विशेषकर महिलाओं के भूमि अधिकारों के संबंध में। लैंगिक समानता का अर्थ है कि सभी लिंगों के व्यक्तियों को समान अधिकार, अवसर और व्यवहार प्राप्त हों, और उनके साथ उनके लिंग के आधार पर कोई भेदभाव न किया जाए। यह केवल महिलाओं और पुरुषों के बीच समानता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सभी लैंगिक पहचान वाले व्यक्ति शामिल हैं।
भारत की बात करे तो हमारे संविधान में महिला और पुरुष को समानता का अधिकार मिला है मगर वास्तविकता यह है हमने महिलाओं को बराबरी के अधिकार से वंचित रखा है। भारत में नारी पूजने का भी गर्व के साथ स्मरण करते हैं। मुट्ठी भर महिलाओं के आगे बढ़ने से सम्पूर्ण महिला समाज का उत्थान नहीं होगा। महिला समानता और सुरक्षा आज सबसे अहम मुद्दा है, जिसे किसी भी हालत में नकारा नहीं जा सकता। सच तो यह है कि एक छोटे से गांव से देश की राजधानी तक महिला सुरक्षित नहीं है। अंधेरा होते-होते महिला प्रगति और विकास की बातें छू-मंतर हो जाती हैं। रात में विचरण करना बेहद डरावना लगता है। कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित घर पहुँचने की चिंता सताने लगती है। ऐसे में जरूरी है कि हम नारी समानता और सुरक्षा की बात पर गहराई से मंथन करें।
आजादी के 79 वर्ष बीत जाने के बाद भी महिलाओं की स्थिति गौर करने के लायक है। आये दिन समाचार पत्रों में लड़कियों के साथ होने वाली छेड़छाड़ और बलात्कार जैसी खबरों को पढ़ा जा सकता है। स्वतंत्रता के 7 दशक बाद भी ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में महिलाओं को दोयम दर्जे की मार से जूझना पड़ रहा है। यूनीसेफ की रिपोर्ट यह बाताती है कि महिलाएं नागरिक प्रशासन में भागीदारी निभाने में सक्षम हैं। यही नहीं, महिलाओं के प्रतिनिधित्व के बगैर किसी भी क्षेत्र में काम ठीक से और पूर्णता के साथ संपादित नहीं हो सकता।
आजादी से पूर्व हमारा देश अनेक रूढ़ियों से ग्रसित था। बेटी को कोख में मारने, सती प्रथा जैसी कुप्रथा समाज में प्रचलित थी। नारी को पढ़ाना तक पाप समझा जाता था। नारी घूंघट में रहे, ऐसा हमारा सोचना और विचारना था। अंग्रेजों के आने के बाद हालांकि नारी स्वतंत्रता और समानता की बातें सुनने और पढ़ने को मिली। धीरे-धीरे समाज और वातावरण में आये बदलाव ने महिला स्वतंत्रता को समझा और उनके अधिकारों और कर्त्तव्यों की बातें होने लगी। नारी को चूल्हे-चौकी से बाहर लाया गया।
इस दौरान प्रगति और विकास का नया दौर प्रारम्भ हुआ। हमने महिलाओं के आरक्षण की दिशा में कदम उठाये। केन्द्र और राज्य स्तर पर चुनावों में महिलाओं की सीटों का आरक्षण कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया। फलस्वरूप पंच, सरपंच, प्रधान और जिला प्रमुख तक महिलाएँ काबिज हुईं और ग्राम के विकास की बात आगे बढ़ी। यह भी कहा जाने लगा कि महिला राज में भ्रष्टाचार कम हुआ है। यह सत्य भी है कि जहाँ महिलायें विभिन्न पदों पर काबिज हुई। वहाँ अकर्मण्यता, भ्रष्टाचार और अनियमितताओं में कमी देखने को मिली।
महिला विकास और महिला समानता की दिशा में सबसे बड़ी बाधा भ्रूण हत्या है। भ्रूण हत्या हमारे पुरजोर प्रयासों के बावजूद पूरी तरह नियंत्रित नहीं हो पाई है जिसका खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है। लड़कियों को शिक्षा ओर रोजगार उपलब्ध कराने की दिशा में हमारे सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर बाधाएँ सामने आती हैं। हम लड़कों को आगे बढ़ाने में अपनी रूचि लेते हैं ओर लड़कियों को पीछे रखने में अपनी भलाई समझते हैं। हमें अपनी इसी सोच को बदलना होगा। कहते है कि एक लड़की शिक्षित हुई तो पूरा परिवार शिक्षा की रोशनी से जगमगाने लगेगा। हम चाहते हैं कि लड़कियों को समान अधिकार मिले और देश खुशहाली की ओर कदम बढ़ाये तो हमें अपनी पुरानी सोच को बदलना होगा और लड़कियों को पर्दे के पीछे से बाहर लाकर संसार की प्रगति और विकास की सोच की ओर आगे बढ़ाना होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *