पेपर बैग : प्लास्टिक से मुक्ति की दिशा में एक सार्थक प्रयास

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बाल मुकुन्द ओझा
विश्व पेपर बैग दिवस हर साल 12 जुलाई को मनाया जाता है। वर्ष 26 में प्लास्टिक बैग की थीम एकल उपयोग प्लास्टिक से मुक्ति: एक एक स्थायी भविष्य की ओर रखी गई है। इस दिन का उद्देश्य प्लास्टिक बैग की जगह पेपर बैग के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है। यह दिन प्लास्टिक के दुष्प्रभावों के बारे में जन जन में जागरूकता फैलाने के लिए समर्पित है। पेपर बैग दिवस के आयोजन का महत्व प्लास्टिक की थैलियों के उपयोग को हतोत्साहित करना और इस बारे में जागरूकता पैदा करना है, साथ ही यह बताना है कि यह हमारे पर्यावरण के लिए कितना हानिकारक हैं। पेपर बैग भी कच्चे माल से तैयार होते हैं, जो एक स्थायी जीवन शैली को बढ़ावा देते हैं, क्योंकि उन्हें रिसाइकिल किया जा सकता है। इससे हमारे पर्यावरण को भी थोड़ी राहत मिलती है। पेपर बैग एक सस्टेनेबल पेपर सर्कल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। यह बांस जैसे प्राकृतिक स्रोत से तैयार किया जाता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक पेपर बैग के उपयोग से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। पेपर बैग पर्यावरण के अनुकूल और री साइकिल और रि- यूज करने लायक होते हैं साथ ही ये बायोडिग्रेडेबल भी होते हैं। पेपर बैग का उपयोग करके हम प्लास्टिक की मात्रा को कम कर पर्यावरण की रक्षा कर सकते है। एक रिपोर्ट के अनुसार भारत की आबादी 1.44 अरब से अधिक है और यहां हर दिन 26 हज़ार टन प्लास्टिक कचरा निकलता है। यह लगभग 26 हज़ार छोटी कारों के बराबर है। मार्केट ओवरव्यू 2024-2032 के अनुसार, भारत में पेपर बैग का बाजार 2023 में 727.4 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया था। भविष्य को देखते हुए, IMARC ग्रुप को उम्मीद है कि 2032 तक यह बाजार 1,087.7 ​​मिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगा, जो 2024-2032 के दौरान 4.4 फीसदी की वृद्धि दर दर्शाता है।
जहां तक प्लास्टिक थैलियों की बात है, मानव द्वारा निर्मित चीजों में प्लास्टिक थैली एक ऐसी वस्तु है जो जमीन से आसमान तक हर जगह मिल जाती है। पर्यटन स्थलों, समुद्री तटो, नदी नालों, खेतों खलिहानों, भूमि के अंदर बाहर सब जगहों पर आज प्लास्टिक के कैरी बैग्स अटे पड़े है। घर में रसोई से लेकर पूजा स्थलों तक हर जगह प्लास्टिक थेलिया रंग बिरंगे रूप में देखने को मिल जाएगी। चावल, दाल,तेल, मसाले, दूध, घी, नमक, चीनी आदि सभी आवश्यकता के सामान आजकल प्लास्टिक-पैक में मिलने लगे हैं। आज प्रत्येक उत्पाद प्लास्टिक की थैलियो में मिलता है जो घर आते आते कचरे में तब्दील होकर पर्यावरण को हानि पंहुचा रहा है। वर्तमान में प्लास्टिक प्रदूषण एक गंभीर समस्या बन गया है। दुनिया भर में अरबों प्लास्टिक के बैग हर साल फेंके जाते हैं। ये प्लास्टिक बैग नालियों के प्रवाह को रोकते हैं और आगे बढ़ते हुए वे नदियों और महासागरों तक पहुंचते हैं। चूंकि प्लास्टिक स्वाभाविक रूप से विघटित नहीं होता है इसलिए यह प्रतिकूल तरीके से नदियों, महासागरों आदि के जीवन और पर्यावरण को प्रभावित करता है। प्लास्टिक प्रदूषण के कारण लाखों पशु और पक्षी मारे जाते हैं जो पर्यावरण संतुलन के मामले में एक अत्यंत चिंताजनक पहलू है। आज हर जगह प्लास्टिक दिखता है जो पर्यावरण को दूषित कर रहा है। जहां कहीं प्लास्टिक पाए जाते हैं वहां पृथ्वी की उपजाऊ शक्ति कम हो जाती है और जमीन के नीचे दबे दाने वाले बीज अंकुरित नहीं होते हैं तो भूमि बंजर हो जाती है। प्लास्टिक नालियों को रोकता है और पॉलीथीन का ढेर वातावरण को प्रदूषित करता है। चूंकि हम बचे खाद्य पदार्थों को पॉलीथीन में लपेट कर फेंकते हैं तो पशु उन्हें ऐसे ही खा लेते हैं जिससे जानवरों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है यहां तक कि उनकी मौत का कारण भी। पेपर बैग का उपयोग कर हम अपने पर्यावरण के साथ प्लास्टिक प्रदूषण से मुक्ति पा सकते है।

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