जयपुर। आज़ाद फ़ाउंडेशन के जयपुर केंद्र में संयुक्त राज्य अमेरिका से आई हाई स्कूल की छात्रा एवं स्वयंसेवी सौम्या कटारिया ने महिलाओं के लिए अंग्रेज़ी भाषा का विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया। इस दौरान उन्होंने शब्दावली और संवाद आधारित सहभागितापूर्ण गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों को पढ़ने, बोलने और सुनने के कौशल का अभ्यास कराया। पूरे सत्र में महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अंग्रेज़ी में संवाद करने का आत्मविश्वास विकसित किया।
सौम्या पिछले कई महीनों से सक्हा और आज़ाद फ़ाउंडेशन के साथ स्वयंसेवी के रूप में जुड़ी हुई हैं। वह दिल्ली में पेशेवर महिला ड्राइवर के रूप में कार्यरत एक युवती को व्यक्तिगत रूप से अंग्रेज़ी का प्रशिक्षण भी दे रही हैं। उनका मानना है कि अंग्रेज़ी भाषा का ज्ञान महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ रोजगार और करियर के नए अवसरों के द्वार भी खोलता है।
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में आज़ाद फ़ाउंडेशन के कार्यों से प्रेरित होकर सौम्या अब संयुक्त राज्य अमेरिका में एक गैर-लाभकारी संस्था स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही हैं। इस संस्था के माध्यम से वह व्यक्तिगत दानदाताओं, परोपकारी संस्थाओं और कॉर्पोरेट प्रायोजकों का सहयोग जुटाकर आज़ाद फ़ाउंडेशन के कार्यक्रमों को व्यापक स्तर पर समर्थन प्रदान करना चाहती हैं।
सौम्या की योजना अमेरिका के हाई स्कूलों, कॉलेजों और अन्य स्वयंसेवकों का एक ऐसा नेटवर्क तैयार करने की है, जो ऑनलाइन माध्यम से सक्हा और आज़ाद फ़ाउंडेशन से जुड़ी महिलाओं को अंग्रेज़ी सिखाए। यह प्रशिक्षण केवल सामान्य अंग्रेज़ी तक सीमित नहीं होगा, बल्कि व्यावहारिक बोलचाल और प्रभावी संचार कौशल पर केंद्रित रहेगा, जिससे पेशेवर महिला ड्राइवर विदेशी और अंग्रेज़ी भाषी पर्यटकों से बेहतर संवाद कर सकें तथा भविष्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी प्राप्त कर सकें।
आज़ाद फ़ाउंडेशन वर्ष 2008 से वंचित समुदायों की महिलाओं को शिक्षा, कौशल विकास और सम्मानजनक आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के लिए कार्यरत है। संस्था की “विमेन विद व्हील्स” पहल के माध्यम से बड़ी संख्या में महिलाओं को पेशेवर ड्राइवर के रूप में प्रशिक्षित किया गया है। साथ ही सार्वजनिक परिवहन में लैंगिक समावेशन को बढ़ावा देने और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय पहचान भी हासिल की है।
इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि भारत की महिला शिक्षार्थियों और अमेरिका के स्वयंसेवकों को जोड़ने वाली यह पहल केवल भाषा सीखने का माध्यम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक आदान-प्रदान, आत्मविश्वास निर्माण और महिलाओं को आर्थिक रूप से अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।



