सहकारिता में पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता बनाये रखना सरकार की प्राथमिकता— सहकारिता मंत्री

ram

जयपुर। सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गौतम कुमार दक ने सहकारिता विभाग के कार्यालयों एवं सहकारी संस्थाओं में अनियमितताओं, गबन व भ्रष्टाचार आदि के दर्ज प्रकरणों में कठोर कार्रवाई करने के गृह विभाग, पुलिस व भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों को निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं की पारदर्शिता एवं विश्वसनीयता बनाये रखना राज्य सरकार की प्राथमिकता है तथा किसी भी प्रकार की अनियमितता को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दक बुधवार को शासन सचिवालय स्थित चिंतन सभागार में सहकारिता विभाग के प्रशासनिक नियंत्रणाधीन कार्यालयों एवं सहकारी संस्थाओं में गबन, अनियमितताओं एवं अन्य प्रकरणों में दर्ज एफआईआर के संबंध में कार्यवाही की प्रगति की समीक्षा कर रहे थे। प्रकरणों में त्वरित, निष्पक्ष एवं न्यायोचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए गृह विभाग, पुलिस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ यह बैठक आयोजित की गई। दक ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि गबन, भ्रष्टाचार एवं वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े मामलों में त्वरित अनुसंधान पूरा कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। गबन आदि के प्रकरणों में दोषियों के विरूद्ध आपराधिक धाराओं में कार्रवाई के साथ ही वसूली भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि फर्जीवाड़े और घोटालों के प्रकरणों में मुख्य आरोपियों के साथ ही पूरे नेटवर्क का खुलासा कर सभी के विरूद्ध कार्रवाई की जाए। साथ ही, दोषियों द्वारा जिन परिजनों के नाम पर सम्पत्ति बनाई गई है, उनके विरूद्ध भी कार्रवाई कर वसूली की जाए। सहकारिता मंत्री ने कहा कि गंभीर प्रकृति के प्रकरणों में जिस मंशा के साथ आरोपियों के विरूद्ध एफआईआर दर्ज करवाई जाती है, उसी के अनुरूप कार्रवाई भी होनी चाहिए। ऐसे प्रकरणों में बिना पर्याप्त आधार के एफआर लग जाने से गलत संदेश जाता है। अपराध प्रमाणित पाये जाने पर न्यायालय में समय पर चालान प्रस्तुत किये जाएं। उन्होंने कहा कि पुलिस मुख्यालय स्तर पर अलग सेल का गठन कर ऐसे प्रकरणों की नियमित रूप से मॉनिटरिंग की जानी चाहिए। दक ने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद सहित अन्य कार्यों में फर्जीवाड़े एवं अनियमितताओं के कुछ बड़े प्रकरण सामने आए हैं, जिनसे विभाग की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। ऐसे प्रकरणों पर विशेष रूप से फोकस किया जाए। उन्होंने फर्जीवाड़े में शामिल ई-मित्र संचालकों एवं बैंक खाते किराये पर देने वाले लोगों के विरूद्ध भी कार्रवाई के निर्देश दिए। दक ने कहा कि आमजन एवं किसानों का सहकारी संस्थाओं पर विश्वास बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए सभी समितियों में वित्तीय अनुशासन, नियमित ऑडिट, पारदर्शी कार्यप्रणाली एवं जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है। सहकारी संस्थाओं में भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं के प्रकरण सामने आने से विभाग की छवि धूमिल होती है तथा आमजन का विश्वास कम होता है। दोषियों के विरूद्ध सख्त कार्रवाई होने से भविष्य में ऐसे प्रकरणों पर अंकुश लगेगा तथा आमजन का सहकारिता पर विश्वास सुदृढ़ होगा। सहकारिता विभाग के शासन सचिव एवं रजिस्ट्रार, सहकारी समितिया डॉ. समित शर्मा ने कहा कि गबन एवं अनियमितताओं के प्रकरणों में विभाग द्वारा सहकारी अधिनियम की धाराओं के अंतर्गत जांच के उपरांत नियमानुसार कार्रवाई का प्रावधान है। केवल गंभीर प्रकृति के मामलों में ही एफआईआर दर्ज करवाई जाती है। चूंकि प्रकरण की पूर्व में जांच हो चुकी होती है तथा आरोपी भी ज्ञात होते हैं, अत: अधिकांश प्रकरण ऐसे होते हैं जिनमें पुलिस के स्तर पर तत्काल कार्यवाही सुनिश्चित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रकरणों में सख्त कार्रवाई होने से निचले स्तर तक स्पष्ट संदेश जाएगा और अनियमितताओं पर रोक लगेगी। पुलिस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के अधिकारियों ने विश्वास दिलाया कि आगामी दिनों में कार्यवाही में गति लाते हुए लम्बित प्रकरणों का तेजी से निस्तारण किया जाएगा। बैठक में पुलिस महानिरीक्षक, गृह विभाग दीपक कुमार, डीआईजी, सीआईडी (सी.बी.) दीपक भार्गव, राजफेड के प्रबंध निदेशक सौरभ स्वामी, पुलिस अधीक्षक (एसीबी) गोरधन लाल, संयुक्त शासन सचिव, सहकारिता विभाग प्रह्ललाद सहाय नागा, एडिशनल डीसीपी, पुलिस आयुक्तालय, जयपुर नीतिराज सिंह सहित सहकारिता विभाग, पुलिस एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *